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जन्मदिन-शादी की सालगिरह पर मवेशियों के लिए कर रहे दान: गांव के युवाओं ने बनाई टीम, मवेशियों के पानी-चारे पर महीने में खर्च हो रहे एक लाख – Pali (Marwar) News

जन्मदिन-शादी की सालगिरह पर मवेशियों के लिए कर रहे दान:  गांव के युवाओं ने बनाई टीम, मवेशियों के पानी-चारे पर महीने में खर्च हो रहे एक लाख – Pali (Marwar) News

भीषण गर्मी हम इंसानों से ज्यादा खुले आसमान के नीचे रहने वाले मवेशियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पीने के पानी और चारे की व्यवस्था नहीं होने पर और ज्यादा परेशानी होती है। इसे देखते हुए देवली कलां गांव के युवाओं ने एक टीम बनाई। जिसे नाम दिया जीवदया फंड। सोशल मीडिया ग्रुप में गांव के लोगों और भामाशाहों को जोड़ा। उनकी यह मुहिम रंग लाई। और बेसहारा गौवंश के लिए पानी के पानी और चारे की व्यवस्था जनसहयोग से कर रहे। जिसका हर महीने का खर्च करीब एक लाख रुपए तक होता है। ऐसे हुई शुरूआत
समाजसेवी नवीन शर्मा ने बताया कि करीब एक महीने पहले उन्होंने देखा कि गांव गलियों में बेसहारा मवेशी घूम रहे है। जिसके लिए पीने के पानी और चारे की व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में गांव के मौजिज लोगों से गांव की करीब 400-500 बेसहारा मवेशियों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था करने की बात कही। इस पर सभी ने सहमति दी। सोशल मीडिया ग्रुप बनाया जिसे नाम दिया जीव दया। गांव के मौजिज लोगों और प्रवासी ग्रामीणों को छोड़ा। जिसमें एक बैंक अकाउंट का क्यूआर कोड भेजा। लोगों को यथा संभव जीव दया के लिए दान की अपील की गई। जो रंग लाई। शादी की सालगिरह, जन्मदिन पर करने लगे दान
मवेशियों के लिए इस टीम की ओर से किए जा रहे काम को देखते हुए ग्रामीण भी आगे आने लगे। कोई अपने जन्मदिन पर मवेशियों के लिए एक दिन की चारे की व्यवस्था करने लगा तो कोई एक दिन का पेयजल का खर्च उठना लगा। इसके साथ ही ग्रामीण शादी की सालगिरह, परिजनों की पुण्यतिथि पर भी बेसहारा मवेशियों के लिए दान करने लग है। जिससे देवली कलां गांव के 400-500 बेसहारा मवेशियों को इस भीषण गर्मी में पेयजल और चारा मिल रहा है। पानी के कुंड बनाए, ताकि मवेशी प्यासे न रहे
जेसीबी से गोचर क्षेत्र में चार-पांच अलग-अलग जगह पर कुंड खुदवाए। जहां टैंकरों से पानी भरा। इसके साथ चारा खरीदकर भी जीवदया की टीम बेसहारा मवेशियों तक पहुंचा रही है। एक पानी के टैंकर के 500 रुपए लगते है। रोजाना चार-पांच टैंकर पानी इन कुंडों में खाली किया जाता है। महीने का औसत खर्च करीब एक लाख रुपए आता है। अब तक 100 से ज्यादा पंरिडे लगाए
सिर्फ पशुओं ही नहीं, पक्षियों के लिए भी गांव सहित आस-पास परिंडे लगाने का काम यह टीम कर रही है। ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को भी पानी के लिए भटकना न पड़े। इस सेवा कार्य में महेंद्र ग्रोवर, भाकरराम चौकीदार, गजेंद्र, राजेंद्र गिरी,देवाराम छोयल, बगदाराम बावरी बुधाराम, जगदीश सरगरा, संपत सरगरा, निर्मल राठौर सहित कई युवा सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।



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