बहादुरगढ़ की शिवा मार्किट में वक्फ बोर्ड की जमीन को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जमीन को लीज पर लेने वाले पक्ष ने नगर परिषद की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण और पक्षपातपूर्ण बताया है। मामले में न्यायिक जांच की मांग उठाई गई है, वहीं कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी तैयारी की जा रही है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब नगर परिषद की टीम मौके पर पहुंची और वहां बनी दीवार व दरवाजों को तोड़ दिया। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान तोड़े गए निर्माण का मलबा भी अधिकारी अपने साथ उठाकर ले गए। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और लीजधारकों में भारी रोष देखा गया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी बनाई थी दीवार जानकारी के अनुसार, 17 मई 2026 को जिला प्रशासन के निर्देश पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मौके पर दीवार बनाई गई थी। लेकिन अगले ही दिन 18 मई को नगर परिषद की टीम वहां पहुंची और तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी। इसे लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक दिन पहले प्रशासनिक निगरानी में बनी दीवार को अगले ही दिन क्यों तोड़ा गया। अशोक कुमार के नाम लीज पर दी थी जमीन बताया जा रहा है कि शिवा मार्किट स्थित करीब 750 गज जमीन वक्फ बोर्ड की ओर से अशोक कुमार के नाम लीज पर दी गई थी। लीजधारकों का दावा है कि यह जमीन वर्ष 1973 से वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज है और वर्ष 2026 की जमाबंदी में भी इंतकाल वक्फ बोर्ड के नाम ही दर्ज बताया गया है। लीजधारक बोले-प्रॉपर्टी आईडी नगर परिषद ने बनाई लीजधारकों का कहना है कि वर्ष 2018 में उन्हें विधिवत लीज दी गई थी और वे नियमित रूप से करीब 25 हजार रुपए प्रतिमाह किराया जमा कर रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 1988 तक का किराया भी जमा किया जा चुका है। इतना ही नहीं, जिस जमीन को लेकर विवाद चल रहा है उसकी प्रॉपर्टी आईडी भी नगर परिषद द्वारा ही बनाई गई थी और निर्माण का नक्शा भी नगर परिषद ने ही पास किया था। अन्याय कर रही नगर परिषद स्थानीय लोगों के अनुसार नगर परिषद की टीम एक ही दिन में तीन बार कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। इससे इलाके में तनाव का माहौल बना रहा। जमीन को लीज पर लेने वाले मनोज कुमार ने कहा कि नगर परिषद उनके साथ अन्याय कर रही है और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब इस मामले को लेकर अदालत में याचिका दायर की जाएगी और न्यायिक जांच की मांग की जाएगी। राजेंद्र मलिक बोले-नेताओं के इशारे पर कार्रवाई वहीं, राजेंद्र मलिक ने आरोप लगाया कि कुछ छुटभैया नेताओं के इशारे पर यह कार्रवाई जा रही है। उनका कहना है कि जमीन की लीज उनके भाई के नाम पर है और कुछ लोगों ने इस जमीन में हिस्सेदारी को लेकर उनसे संपर्क भी किया था। उन्होंने कहा कि अब उन्हें केवल अदालत से ही न्याय मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर इस पूरे मामले में बहादुरगढ़ नगर परिषद और झज्जर जिला प्रशासन का कोई भी अधिकारी कैमरे के सामने कुछ भी बोलने को तैयार नहीं दिखा। अधिकारियों की चुप्पी के चलते विवाद और चर्चा का विषय बन गया है। अब सभी की नजरें अदालत की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता
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