प्रयागराज में वरिष्ठ पत्रकार, अनुवादक और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता सत्यम वर्मा तथा थिएटर आर्टिस्ट व शोध छात्रा आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के विरोध में गुरुवार को एक साझा प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रयागराज प्रेस क्लब में “सत्यम वर्मा रिहाई मंच” के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने नोएडा मजदूर आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को दमनकारी बताया और गिरफ्तार लोगों की रिहाई की मांग की। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वरिष्ठ कवयित्री कात्यायनी ने कहा कि असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्यों के बिना सत्यम वर्मा और आकृति चौधरी पर कार्रवाई की और उन्हें अवैध रूप से गिरफ्तार किया। कात्यायनी ने दावा किया कि सत्यम वर्मा का नोएडा मजदूर आंदोलन से सीधा संबंध नहीं था और वे घटना के समय नोएडा में मौजूद भी नहीं थे। कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता कविता कृष्णपल्लवी ने प्रेस वार्ता का संचालन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मजदूर आंदोलन के दौरान पुलिस की भूमिका संदिग्ध रही और सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो व साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच नहीं की गई। वक्ताओं ने यह भी बताया कि पुलिस ने लखनऊ स्थित जनचेतना कार्यालय और निजी आवासों पर छापेमारी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, किताबें और दस्तावेज जब्त किए, लेकिन कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता कमल कृष्ण राय ने इस अवसर पर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि किसी विचारधारा को मानना अपराध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त साक्ष्य न होने के बावजूद एनएसए लगाकर लोगों को जेल में रखने का प्रयास किया जा रहा है। प्रेस वार्ता में विभिन्न सामाजिक, किसान और ट्रेड यूनियन संगठनों के प्रतिनिधियों ने सभी गिरफ्तार मजदूर, छात्र और सामाजिक कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई तथा उन पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। इस कार्यक्रम में कई अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और शहर के बुद्धिजीवी भी उपस्थित रहे।
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