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जालंधर में सांस्कृतिक विविधता दिवस मनाया गया: LPU में AI और भारतीय संस्कृति पर चर्चा, युवाओं को मातृभाषा बचाने का संदेश – Jalandhar News

जालंधर में सांस्कृतिक विविधता दिवस मनाया गया:  LPU में AI और भारतीय संस्कृति पर चर्चा, युवाओं को मातृभाषा बचाने का संदेश – Jalandhar News

जालंधर के इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटैक) जालंधर चैप्टर द्वारा आज लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के परिसर में सांस्कृतिक विविधता दिवस बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष कार्यक्रम की शुरुआत केरल की एक छात्रा द्वारा प्रस्तुत की गई मधुर सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय कर दिया। कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों का स्वागत करते हुए इंटैक के कनविनर हरप्रीत सिंह बल ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत पर प्रकाश डाला। उन्होंने विभिन्न संस्कृतियों के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह विविधता ही हमारे समाज की असली खूबसूरती है, जो आपसी भाईचारे और मानवीय सांझ को और अधिक मजबूत करती है। इस मौके पर सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिले, जहां बंगाल की एक अध्यापिका ने गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रसिद्ध कविता का बंगाली भाषा में पाठ कर समां बांध दिया। विभिन्न संस्कृतियों का मेल ज्ञान को बढ़ाता है:डॉ. जोहल कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. लखविंदर सिंह जोहल ने दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों की संस्कृतियों का गहरा विश्लेषण किया। उन्होंने विशेष रूप से जिक्र किया कि आज के आधुनिक युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का हमारी संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। डॉ. जोहल ने कहा कि विभिन्न संस्कृतियों का मेल हमारे ज्ञान को बढ़ाता है और इसी विविधता से एक समृद्ध समाज का निर्माण होता है। भारतीय संस्कृति के बारे में बताया इसके साथ ही, सोशियोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. सुखजीत गरचा ने भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत और इसके ऐतिहासिक महत्व को विस्तार से समझाया। वहीं, यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्चर विभाग के प्रोफेसर राजिंदर राजदान ने अपनी सुंदर कविता के माध्यम से भारत की साझी और मिली-जुली संस्कृति को बेहद खूबसूरती से पेश किया। युवाओं को दिया खास संदेश कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं जालंधर की जॉइंट कमिश्नर डॉ. मनदीप कौर ने युवाओं को एक बेहद खास संदेश दिया। उन्होंने नौजवानों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे आधुनिकता की दौड़ में आगे जरूर बढ़ें, लेकिन अपनी मां-बोली (मातृभाषा) को कभी न भूलें, क्योंकि हमारी भाषा ही हमारी असली पहचान है। इस सफल आयोजन में एच.आर.डी.सी. विभाग के डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर सरबजीत सिंह कड़वाल और मल्टीमीडिया विभाग के एच.ओ.डी. गुरदीप सिंह ने भी अपना विशेष योगदान दिया और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।



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