बांग्लादेश के चिटगांव स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में कार्यरत नरेंद्र कुमार का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वे हरियाणा के छात्तर गांव के निवासी थे और चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। नरेंद्र कुमार का पार्थिव शरीर खटकड़ टोल से उनके पैतृक गांव तक बाइकों के काफिले के साथ लाया गया। इस दौरान युवा और ग्रामीण हाथों में तिरंगा लिए हुए थे। उनके अंतिम संस्कार में विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री की पत्नी सुषमा अत्री भी शामिल हुईं। चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें अंतिम सलामी दी। नरेंद्र कुमार अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके परिवार में पत्नी, 8 वर्षीय बेटा अर्श सिंह और माता-पिता हैं। उनके निधन से परिवार और गांव में शोक की लहर है। 15 साल पहले हुई थी शादी जानकारी के अनुसार, 18 मई को नरेंद्र कुमार ने दोपहर में अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। शाम को जब उनकी पत्नी ने दोबारा संपर्क करने का प्रयास किया तो बात नहीं हो पाई। उनके चचेरे भाई सुरेंद्र ने भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत नहीं हुई। 19 मई को सुरेंद्र को चिटगांव से नरेंद्र कुमार के निधन की सूचना मिली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु का कारण हृदय गति रुकना बताया गया है। उनकी शादी को 15 साल हुए थे। 4 साल से भारतीय उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी थे नरेंद्र कुमार 1 नवंबर 2008 को चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुए थे। वे पिछले 4 साल से भारतीय उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे थे और जल्द ही भारत लौटने वाले थे। उनके सहकर्मियों ने उन्हें मिलनसार और मददगार स्वभाव का व्यक्ति बताया। प्रोटोकॉल अधिकारी का चयन चंडीगढ़ पुलिस से होता है।
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