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चंडीगढ़ मेयर के लिए वर्चस्व का सवाल बना मनीमाजरा प्रोजेक्ट: बोलीं- आठ को ही होगी बैठक, भागने की जगह सुझाव दें पार्षद – Chandigarh News

चंडीगढ़ मेयर के लिए वर्चस्व का सवाल बना मनीमाजरा प्रोजेक्ट:  बोलीं- आठ को ही होगी बैठक, भागने की जगह सुझाव दें पार्षद – Chandigarh News


नगर निगम की बैठक में हंगामा करते पार्षदों का फोटो।

चंडीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बबला का कार्यकाल महज दो माह से भी कम रह गया है। अब उनके लिए मनीमाजरा प्रोजेक्ट वर्चस्व का सवाल बन गया है। नगर निगम हाउस की दो बैठक के एजेंडे में लाए गए इस प्रोजेक्ट को लेकर विवाद हो चुका है, नौबत हाथा पाई तक आ गई तो विरोधी

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विरोधी पार्षदों ने CBI से लेकर सरकार के बड़े अधिकारियों को इसकी शिकायत की तो प्रोजेक्ट की खामियों को दूर करने के लिए कमेटी का गठन कर दिया। ताकि इसे हाउस की बैठक में पास करवाया जा सके।

अब आठ अक्तूबर को कमेटी की बैठक होनी है, मगर इससे पहले चार सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है और बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला भी लिया है। जबकि, मेयर ने साफ कर दिया है कि बैठक तो होगी, जो सदस्य शामिल होंगे उनके सुझावों को रिपोर्ट में शामिल कर लिया जाएगा। साफ है कि भारतीय जनता पार्टी से संबंधित मेयर बबला द्वारा लाए गए इस प्रोजेक्ट को विरोधी पूरा नहीं होने देना चाहते हैं और वह इसे पूरा करने के लिए अड़ी हैं।

मनीमाजरा हाउसिंग प्रोजेक्ट।

क्या है मनीमाजरा प्रोजेक्ट? मनीमाजरा में पॉकेट नंबर 6 में निगम की कुल 33.55 एकड़ जमीन है, जिसमें से 7.7 एकड़ रेजिडेंशियल एरिया के लिए 5 प्लॉट हैं। इनके अलावा स्कूल, कॉमर्शियल एरिया, संत निरंकारी भवन, कस्तूरबा, रैन बसरा, ओपन ग्रीन एरिया और कुछ रिजर्व लैंड है।

नगर निगम के अधिकारी इस प्रापर्टी को आक्शन कर इससे पैसा कमाना चाहते हैं। जिससे 786 करोड़ रुपए आने हैं। मगर विरोधी पार्षद इसमें खामियां बताकर इस पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। यही नहीं हाउस की बैठक में इसके लिए दस करोड़ रुपए सड़कें, सीवरेज और पीने लायक पानी की पाइप डालने के लिए दस करोड़ रुपए को भी मंजूरी दे चुकी है। बनाए गए प्लान के तहत बिल्डिंग की ऊंचाई 72 फुट तय की गई है और इसे लेकर भी पार्षदों द्वारा इसे भी गलत बताया जा रहा है। कमेटी बनते ही चार पार्षदों का इस्तीफा मेयर हरप्रीत कौर बबला की तरफ से तीन अक्तूबर को आठ सदस्य कमेटी का गठन किया गया था। जिसमें दो पार्षद आम आदमी पार्टी, दो भारतीय जनता पार्टी, दो कांग्रेस और दो मनोनीत पार्षदों को लिया गया था।

मगर इनमें से विरोधी पक्ष के चारों पार्षदों ने अगले ही दिन यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया गया उन्हें गलत कार्य में भागीदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे वह कभी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं। वह इस प्रोजेक्ट का कभी हिस्सा नहीं बनेंगे।

बैठक भी होगी प्रोजेक्ट भी पूरा होगा मेयर मेयर हरप्रीत कौर बबला का कहना है कि शहर के लोगों के फायदे के लिए यह प्रोजेक्ट लाया जा रहा है। इसे हाउस में ही प्रवानगी मिल चुकी है, कुछ पार्षदों को इस पर आपत्ति थी, जिसे लेकर एक कमेटी बनाई गई है। जिसकी बैठक 8 अक्तूबर को होने वाली है। यह बैठक भी होगी और प्रोजेक्ट को भी सही ढंग से मंजूरी मिल जाएगी।

तानाशाही चलेगी नहीं, कई और विकल्प भी हैं, डिप्टी मेयर डिप्टी मेयर तरुना मेहता का कहना है कि हम किसी भी गलत प्रोजेक्ट को मंजूर नहीं होने देंगे। हमने बैठक की कार्रवाई पर ही आपत्ति बैठक के बाद ही अधिकारियों का पत्र लिखकर जता दी थी। हमने इस मामले की जांच के लिए भी जांच एजेंसियों को लिखा है।

अगर प्रोजेक्ट की कमियों को दूर नहीं किया जाता है तो हम दूसरे विकल्प की तरफ भी जाएंगे मगर लोगों के पैसे को बरबाद नहीं होने दिया जाएगा। सत्तापक्ष किसी एक खास को फायदा पहुंचाना चाहता है।



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