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चंडीगढ़ अब नहीं रहा ब्यूटीफुल सिटी: सड़कों पर गड्डे, सफाई हो नहीं रही, रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशनों को 9 महीने से भुगतान नहीं – Chandigarh News

चंडीगढ़ अब नहीं रहा ब्यूटीफुल सिटी:  सड़कों पर गड्डे, सफाई हो नहीं रही, रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशनों को 9 महीने से भुगतान नहीं – Chandigarh News


चंडीगढ़ सेक्टर 25 में सड़कों पर पड़े गड्डे।

चंडीगढ़ अब सिटी ब्यूटीफुल नहीं रहा है, सड़क पर जगह- जगह पर गड्ढे बने हैं। रिहायशी क्षेत्रों में सफाई हो नहीं रही है और पेड़ों की प्रूनिंग तक नहीं हो रही है। यही नहीं नगर निगम के लिए काम करने वाली रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशनों को 9 महीने से भुगतान तक न

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जिससे शहर में पार्कों की हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। इन मुद्दों को लेकर शहर की करीब 80 से ज्यादा रेजिडेंशियल वेलफेयर एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (FOSWAC) के अध्यक्ष ने नगर निगम को चीफ इंजीनियर को पत्र लिखकर सवाल खड़े किए हैं।

चीफ इंजीनियर को लिखे गए पत्र में उनकी तरफ से शहर की सड़कों पर पड़े गड्ढों, पेडों की प्रूनिंग नहीं होने, अलग-अलग पार्क में गिरे पेडों के अवशेष और सेक्टरों में पड़ी हुई गंदगी नहीं उठाने का मुद्दा उठाया है। यानी कि फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (FOSWAC) की तरफ से नगर निगम को सिटी ब्यूटीफुल पर अव्यवस्था के लगे धब्बे का आइना दिखाया गया है।

चंडीगढ सेक्टर 38 के नजदीक सड़क पर पड़े पेडों से गिरे अवशेष।

रिहायशी क्षेत्रों में नहीं दिया जा रहा सफाई का ध्यान

FOSWAC के अनुसार क्षेत्रों के अंदर और बाहर की सफाई नहीं की जा रही है, जिस कारण “सिटी ब्यूटीफुल” की छवि धूमिल दिख रही है। चंडीगढ़ की सुंदरता सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सलाह के तौर पर आवश्यक है कि चंडीगढ़ को वास्तविक अर्थों में “सिटी ब्यूटीफुल” बनाए रखने के लिए सभी प्रयास किए जाएं। सड़कों की सफाई, पेड़ों से सूखे पत्ते और कचरा अलग करने के कार्य में लगी एजेंसी के लिए कोई उचित स्थान निर्धारित नहीं किया गया है। एजेंसी के अधिकारी अपनी सुविधा के अनुसार कहीं भी कचरा अलग करते हैं, क्योंकि उनके उपयोग के लिए कोई निर्धारित स्थान उपलब्ध नहीं है।

चंडीगढ़ सेक्टर 15 में कार पर गिरा पेड़।

चंडीगढ़ सेक्टर 15 में कार पर गिरा पेड़।

मकानों-गाड़ियों पर गिर रहे पेड़, हो रहा नुकसान

चंडीगढ़ में कई सूखे और बहुत पुराने पेड़ हैं, जो हमेशा मकानों और खड़ी गाड़ियों के लिए खतरा बने रहते हैं। बरसात के मौसम में ये पुराने सूखे पेड़ अपने आप गिर जाते हैं, जिससे निवासियों की खड़ी गाड़ियों को नुकसान पहुंचता है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं होती। अतः एक सर्वेक्षण टीम को नियुक्त करना आवश्यक है ताकि ऐसे सूखे, पुराने तथा दीमक-ग्रस्त पेड़ों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके, क्योंकि ये पेड़ लगातार आवासीय मकानों और पार्क की गई गाड़ियों के लिए खतरा बने हुए हैं।

चंडीगढ़ सेक्टर 25 में सड़क पर पड़े गड्डे।

चंडीगढ़ सेक्टर 25 में सड़क पर पड़े गड्डे।

फरवरी से नहीं मिले हैं रखरखाव के पैसे

चंडीगढ़ की रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन, नगर निगम के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत पड़ोसी पार्कों का रखरखाव कर रही हैं। यह देखा गया है कि पिछले एक वर्ष से पार्कों के रखरखाव के लिए दी जाने वाली मासिक राशि को नियमित रूप से जारी नहीं की जा रही है।

वित्तीय वर्ष 2024–2025 के दौरान केवल अगस्त 2024 तक के भुगतान आंशिक रूप से जारी किए गए थे और वर्तमान वित्तीय वर्ष में केवल जनवरी 2025 तक का भुगतान पिछले वर्ष का किया गया है। फरवरी 2025 से अब तक की बकाया राशि अभी तक जारी नहीं की गई है। फंड की अनुपलब्धता के कारण वेलफेयर एसोसिएशनों के लिए पार्कों का रखरखाव करना अत्यंत कठिन हो गया है।

पत्र में उठाए यह भी उठाए गए हैं मुद्दे

  • विभिन्न वेलफेयर एसोसिएशनों द्वारा यह रिपोर्ट किया गया है कि पूरे चंडीगढ़ में सड़कों की स्थिति बहुत खराब है। सड़कों पर गड्ढे, टूटी-फूटी, ऊबड़-खाबड़ सतह और यहां-वहां खड्डे होने के कारण आवाजाही बहुत जोखिम भरा हो गया है। सड़कों की ठीक से रि-कारपेटिंग नहीं की गई है। शहर की सुंदरता पूरी तरह से धूमिल हो गई है और “द सिटी ब्यूटीफुल” का नाम अब केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है, जब वास्तविक जमीनी स्थिति देखी जाती है।
  • मोड़ों (curves) और पानी की निकासी नालियों (water channels) की स्थिति भी बहुत खराब है क्योंकि वे टूटी-फूटी, असमान और बहुत नीचे धंसी हुई पाई जाती हैं। यह देखा गया है कि सड़कों की री-कारपेटिंग के समय, पानी की नालियों का स्तर सड़कों के स्तर के अनुरूप नहीं बढ़ाया जा रहा है, जिस कारण बरसात के मौसम में मिट्टी और मलबा नीचे पड़ी नालियों में भर जाता है। टूटी हुई नालियों और मोड़ों को नई नालियों से बदलने की आवश्यकता है, और सड़कों की रि-कारपेटिंग से पहले पानी की नालियों का स्तर उठाना भी आवश्यक है।
  • विभिन्न रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशनों द्वारा यह रिपोर्ट किया गया है कि चंडीगढ़ के आवासीय क्षेत्रों में कई पेड़ 45 फीट से अधिक ऊंचाई के हैं, जो हाईटेंशन तारों को छू रहे हैं। यह स्थिति आवासीय भवनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है, क्योंकि ये हाईटेंशन बिजली की तारें घरों के बहुत पास से गुजरती हैं। 45 फीट से अधिक ऊंचाई वाले पेड़ों की छंटाई (pruning) की जानी आवश्यक है ताकि उनकी ऊंचाई अनुमत सीमा में रखी जा सके।
  • यह देखा गया है कि एसोसिएशन को दिए जाने वाले मासिक फंड से प्रति वर्ग मीटर 8 पैसे की कटौती कूड़ेदानों से कचरा साफ करने के लिए की जा रही है। लेकिन समझौते के अनुसार कूड़ेदानों से साप्ताहिक रूप से कचरा साफ़ नहीं किया जा रहा है।
  • रेलिंग, बेंच, व्यायामशालाओं (जिम), झोपड़ियों तथा बच्चों के खेलने के उपकरणों की पेंटिंग पिछले दो वर्षों से नहीं की गई है। पार्कों के चारों ओर बने टो वॉल्स (toe walls) की पेंटिंग भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नहीं की जा रही है।

बिना पैसे के पार्कों का रखरखाव मुश्किल बिट्टू

फेडरेशन ऑफ सेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन चंडीगढ़ (FOSWAC) ने नगर निगम से बकाया राशि तुरंत जारी करने को कहा है। नगर निगम के मुख्य अभियंता को लिखे पत्र में FOSWAC के अध्यक्ष बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और नगर निगम के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन के अनुसार, आस-पड़ोस के पार्कों का रखरखाव कर रहे हैं।

पिछले एक साल से RWA को रखरखाव का मासिक भुगतान नियमित रूप से जारी नहीं किया जा रहा है। इस साल फरवरी से कोई भुगतान जारी नहीं किया गया है, जिससे RWA के लिए आस-पड़ोस के पार्कों का रखरखाव करना बहुत मुश्किल हो गया है।

मेयर बोलीं- मैंने पैसे जारी करने के लिए कह दिया है

मेयर हरप्रीत कौर बबला ने कहा कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आरडब्ल्यू को भुगतान जारी करने का निर्देश दिया है, क्योंकि नगर निगम को यूटी प्रशासन से 125 करोड़ रुपए का फंड प्राप्त हुआ है।



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