हिरण के बच्चे अपने दोस्त चीकू को दुलारती राजवीर की बेटी नैना
मेरठ में एक हिरण के बच्चे को इंसानी परिवार से प्यार हो गया है। हिरण का ये बच्चा किसान राजवीर के परिवार को अपना ठिकाना बना चुका है। बच्चे को राजवीर के घर से ऐसा लगाव है कि वो जंगल में अपना मूल घर भूल गया है। वो रास्ता भटककर राजवीर के घर आ गया। अब किसा
.
महीने भर पहले आया था घर मेरठ के दौराला थानाक्षेत्र के जलालपुर बेहटा गांव में किसान राजवीर सैनी का परिवार रहता है। राजवीर के घर में इन दिनों एक हिरण का बच्चा पला हुआ है। राजवीर ने बताया कि वो सामान्य किसान है। मजदूरी करते हैं। घर में बेटी नैना, पत्नी हैं। राजीवर ने बताया लगभग एक महीने पहले एक हिरण का बच्चे को कुत्ते दौड़ा रहे थे। हमारे घर का गेट खुला था। तो वो हिरण दौड़ते हुए हमारे घर में घुस गया। हमें लगा गाय का बच्चा होगा। फिर पड़ोसियों ने बताया कि ये गाय नहीं हिरण का बच्चा है। ये बच्चा बहुत घबराया हुआ था। हमने इसे घास खिलाई। थोड़ी देर बाद हमने 112 नंबर पर फोन करके हिरण के बच्चे की घर में आने की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस आई तो हमने ये हिरण का बच्चा उनको दे दिया।
3 बार छोड़ा दोबारा लौटकर आया राजवीर आगे कहते हैं कि पुलिस वालों ने या वनविभाग की टीम ने शायद उस बच्चे को जंगल में छोड़ दिया था। लेकिन 10 दिन बाद वो हिरण फिर हमारे घर आ गया। हमने दोबारा पुलिस को कॉल करके उसे वापस भेज दिया। लेकिन अभी लगभग 7 दिन पहले ये हिरण हमारे घर आ गया। ये गांव में कुत्तों से बचकर भाग रहा था। हमारा घर खुला था तो यहीं आकर बैठ गया। लगातार तीसरी बार ये हिरण का बच्चा हमारे घर आया है। अब ये यहीं रह रहा है। जब पुलिस या वनविभाग की टीम चाहे इसे यहां से ले जा सकती है। नहीं तो हम इसे यहीं सुरक्षित रखे हैं। बेटी बोली मुझे नया दोस्त मिला इसका नाम चीकू रखा राजवीर की बेटी नैना कहती है कि इस बच्चे का नाम मैंने चीकू रखा है। ये मेरा दोस्त है और मुझे बहुत अच्छा लगता है। मैं इसे घास और रोटी खिलाती हूं। ये मेरे साथ ही दिनभर खेलता है। रात को मेरी ही चारपाई पर सोता भी है। हम इसे दो बार जंगल में छोड़कर भी आए लेकिन ये फिर हमारे घर आ गया। अब तो ये हमारे घर का मेंबर बन गया है। हम लोग चीकू के साथ खेलते हैं। इसे प्यार करते हैं बहुत अच्छा लगता है।
पड़ोसियों के लिए बना मनोरंजन का साधन राजवीर के घर में जबसे ये हिरण आया है तबसे पड़ोसियों के लिए भी ये मनोरंजन का साधन बन गया है। पड़ोसियों के बच्चे और गांव के लोग बार-बार उनके घर आकर इस हिरण के बच्चे को खिलाते, दुलारते हैं। बच्चों के लिए ये मनोरंजन का साधन बन गया है।
किसान के घर में बेहद खुश है चीकू हिरण का बच्चा चीकू भी इस घर में इतना रच, बस गया है मानो उसका अपना घर हो। ये उसकी जंगल की दुनिया हो। चीकू घर में घूमता, टहलता है। चारपाई पर बैठता, सोता है। रोटी और घास खाता है। सारे दिन खेलता है।
