25 मिनट पहलेलेखक: वर्षा राय
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धर्मेंद्र के निधन के बाद पूरे फिल्म उद्योग में शोक की लहर है। इस बीच अभिनेत्री और राजनीति में सक्रिय जया प्रदा ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने और धर्मेंद्र जी के रिश्तों, उनके साथ की गई फिल्मों और आखिरी मुलाकात को याद करते हुए भावुक हो उठीं। धर्मेंद्र के साथ बिताए पलों को याद करते हुए जया प्रदा ने कहा कि उनका जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं, बल्कि एक व्यक्तित्व, एक दौर का खत्म होना है।
उन्होंने बताया कि कैसे धर्मेंद्र जी की सादगी, उनका अपनापन और उनका ह्यूमर सेट पर सभी को अपना बना लेता था।उनके अनुसार, धर्मेंद्र सिर्फ सिल्वर स्क्रीन के हीरो नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी उतने ही बड़े दिल वाले इंसान थे। जया प्रदा का कहना है कि धर्मेंद्र जैसा स्टार और इंसान दोबारा शायद ही पैदा हो।

धर्मेंद्र की निधन की खबर सुनकर आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी? आखिरी मुलाकात आपकी उनके जाने से पहले कब हुई?
मैं यही कहना चाहूंगी कि यह बॉलीवुड के लिए सबसे बड़ा लॉस है। धर्मेंद्र जी ने अपने करियर में चाहे वो रोमांटिक, ड्रामा या एक्शन हर तरह के रोल निभाए हैं। इंडस्ट्री में आने से पहले से ही मैं उनकी फैन रह चुकी थी। वो इंडस्ट्री के लिए एक वरदान थे। मुझे अपने ऊपर गर्व है कि मैंने उनके साथ 17-18 फिल्मों में काम किया है। उनकी पर्सनैलिटी और लोकप्रियता का कोई जवाब नहीं था।
अगर कभी वो सेट पर किसी बात पर गुस्सा हो जाते, तो उन्हें कोई रोक नहीं सकता था। लेकिन अगर हंसते-मुस्कुराते तो सेट का माहौल मजेदार हो जाता था। मैं उनसे दो महीने पहले ही मिली थी। 2-3 घंटे तक हमने खूब गप्पें मारें, शेरो-शायरी की। यकीन नहीं होता कि वो इतनी जल्दी चले जाएंगे।
वो कहते थे कि मैं डांस और कैमरा के साथ रोमांस करने पर शर्माता था। क्या ऐसा कोई किस्सा आपके पास है जिसे आप बताना चाहें?
जी, बहुत ही शर्मीले किस्म के थे धर्मेंद्र जी। डायलॉग भी बोलते समय अगर सेट पर ज़रा भी शोर होता तो सभी को साइलेंट करवा देते थे। कमाल की स्पॉन्टेनिटी थी उनके अंदर हमें तैयार होना पड़ता था यह सोचकर कि पता नहीं अगले सीन में वो क्या बोल देंगे। पीठ पीछे किसी की बुराई या चुगली करने की आदत नहीं थी। वो मरते दम तक सिर्फ और सिर्फ एक्टिंग करना चाहते थे।

आपकी और धर्मेंद्र की केमिस्ट्री को बड़े पर्दे पर बहुत प्यार मिला है। ऐसी कौन-सी खास चीज थी जो आपकी जोड़ी को बाकियों से अलग करती थी?
उनका मिजाज बहुत प्यारा था। जब मैं उनसे मिलने गई, तो मुझे बैठाकर कहने लगे “बहुत वक्त हो गया है तुमसे मिले हुए, जया।” फिर हमने साथ में “आपकी नजरों ने समझा, प्यार के काबिल हमें…” गुनगुनाया। हमेशा इसी तरह का ही मूड रहता था उनका।
धर्मेंद्र के फैंस और उनके साथ काम करने वालों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगी?
मैं अच्छे से जानती और समझती हूं कि फैंस बहुत दुखी हैं। वो उन्हें आखिरी क्षणों में देखना भी चाहते थे। दिल से बहुत बड़े इंसान थे धर्मेंद्र।
