मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट बोला-कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट आलोचना दबाने का हथियार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट से 1 हफ्ते की सजा पाने वाली महिला को राहत


  • Hindi News
  • National
  • Supreme Court Update: Contempt Of Court Not A Weapon To Suppress Criticism | Bombay High Court Sentence Set Aside

नई दिल्ली24 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की शक्ति न तो जजों की निजी सुरक्षा का कवच है और न ही आलोचना को दबाने का हथियार। अदालत ने कहा- न्याय में दया और क्षमा भी उतनी ही अहम है, खासकर तब जब व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर ले।

यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश को पलटते हुए दी। इस फैसले में एक महिला को स्वतः संज्ञान लेते हुए क्रिमिनल कंटेम्प्ट मामले में एक हफ्ते की जेल और ₹2,000 जुर्माने की सजा दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला ने अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगी थी, इसलिए सजा को माफ किया जाता है।

महिला सीवुड्स एस्टेट्स लिमिटेड हाउसिंग सोसाइटी की पूर्व निदेशक थीं। उनपर आरोप था कि उन्होंने जनवरी 2025 में एक नोटिस जारी किया था, जिसमें डॉग माफिया जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया।

यह टिप्पणी उस समय अदालत में चल रहे एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023 के खिलाफ मुकदमे के दौरान आई थी। हाईकोर्ट ने इसे अदालत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया और अवमानना माना।

महिला ने सशर्त माफी मांगी

महिला ने बाद में अदालत में बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि यह सर्कुलर सोसाइटी निवासियों के दबाव में जारी हुआ था। लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट ने माफी को असली पश्चाताप नहीं मानते हुए सजा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कंटेम्प्ट कानून सजा देने के साथ-साथ माफ करने की शक्ति भी देता है, और एक सच्ची माफी को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि वह सशर्त है।

‘बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा सुनाते समय विवेक से काम नहीं लिया’

कोर्ट ने माना कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सजा सुनाते समय विवेक से काम नहीं लिया और सही तरीके से कानून का अर्थ नहीं समझा।

बेंच ने कहा कि गलती स्वीकारने के लिए साहस चाहिए और माफ करने के लिए उससे भी ज्यादा बड़ा दिल।

अदालत ने अंत में कहा कि यह मामला सजा का नहीं, बल्कि पश्चाताप स्वीकारने और न्याय में मानवीय नजरिया अपनाने का उदाहरण है।

—————————-

ये खबर भी पढ़ें…

रोहिंग्या मामला, CJI के समर्थन में 44 पूर्व जज:कहा- बयान का गलत मतलब निकाला; सीजेआई बोले थे- क्या घुसपैठियों को रेड कार्पेट वेलकम देना चाहिए

हिंग्या मामले में CJI सूर्यकांत की टिप्पणी के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट और देशभर की हाईकोर्ट के 44 जज समर्थन में आए हैं। 9 दिसंबर को सभी जजों के साइन वाला लेटर जारी किया गया। 44 जजों का ये रिएक्शन 5 दिसंबर को रिटायर जजों, वकीलों और कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स के सीजेआई और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जारी लेटर के विरोध में आया है। पूरी खबर पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट का BLO की सुरक्षा पर ECI को नोटिस:कहा- हालात से तुरंत निपटें वरना अराजकता फैलेगी, जो राज्य सहयोग नहीं कर रहे हमें बताएं

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने बंगाल और दूसरे राज्यों में SIR का काम रहे BLO को मिल रही धमकियों पर चिंता जताई। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। इसमें कहा- इस स्थिति को तुरंत संभाला जाए, नहीं तो अराजकता फैल सकती है। जो राज्य सहयोग नहीं कर रहे हमें बताएं। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *