‘BJP के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह लखनऊ में एक कार्यक्रम में थे। तभी उनके फोन की घंटी बजी। ये फोन गृह मंत्री अमित शाह का था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम फाइनल हो गया है। नितिन नबीन के नाम का लेटर जारी कर दो। अगले एक घंटे के भीतर लेटर
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पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में हमारे सोर्स ये बात पूरे दावे से कहते हैं। 14 दिसंबर को BJP ने पार्टी के नए कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के नाम का ऐलान किया। 2020 से जेपी नड्डा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हुआ था। तब से वे एक्सटेंशन पर थे।
नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले के बारे में किस-किस को पता था, ये पूछने पर सोर्स ये भी दावा करते हैं कि इसे लेकर सबसे पहला फोन अरुण सिंह के पास गया। उससे पहले न किसी को इस नाम की भनक थी और न ही घोषणा की तारीख का पता था। इसके सिर्फ 3 ही राजदार थे।’
नितिन नबीन का पार्टी मुख्यालय में जोरदार स्वागत किया गया। अमित शाह और जेपी नड्डा उनके स्वागत के लिए BJP मुख्यालय में पहले से मौजूद थे।
दैनिक भास्कर की टीम ने BJP के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के चुनाव को लेकर रेस में शामिल कुछ पार्टी लीडर्स से बात की। साथ ही बिहार से लेकर BJP और RSS तक कई सोर्सेज से बात की। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानिए, आखिर कैसे हुआ कार्यकारी अध्यक्ष का फैसला…
2 दिन पहले PM ने ऑनलाइन मीटिंग ली, अध्यक्ष के लिए खासियतें पूछीं BJP सोर्स की मानें तो 12 दिसंबर को PM मोदी ने दो घंटे के नोटिस पर पार्लियामेंट्री बोर्ड के सभी मेंबर्स को ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ने का मैसेज करवाया। मीटिंग में पार्लियामेंट्री बोर्ड के मेंबर के तौर पर खुद PM नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी थे।
नरेंद्र मोदी ने मीटिंग को संबोधित करते हुए पूछा, ‘आपको पार्टी के लिए कैसा राष्ट्रीय अध्यक्ष चाहिए। आप लोगों को उसमें किन-किन गुणों की अपेक्षा है? यही आज इस मीटिंग का विषय है। ध्यान रहे कि हमें आपकी तरफ से कोई नाम नहीं चाहिए। बस आप लोगों को उन खासियतों के बारे में बताना है, जो आप राष्ट्रीय अध्यक्ष में देखना चाहते हैं?
बोर्ड मेंबर्स की ओर से अध्यक्ष के लिए संभावित गुणों की लिस्ट आने लगी। इसके बाद एक फाइनल लिस्ट तैयार हुई। इसमें मोटे तौर पर सबसे ज्यादा बार 4-5 बातें दोहराई गई थीं।
1. युवा चेहरा 2. संगठन और पार्टी में तालमेल बैठाए 3. विवादित न हो 4. संघ और पार्टी दोनों का बैकग्राउंड हो 5. हिंदी भाषी हो
पार्लियामेंट्री बोर्ड मेंबर्स की ये मीटिंग 45-50 मिनट तक चली। हालांकि न इसमें किसी नाम की चर्चा हुई और न ही ये कहा गया कि 2 दिन बाद ही पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का ऐलान हो जाएगा।

शाह ने कहा- नए पार्टी अध्यक्ष के नाम का लेटर तैयार करो 14 दिसंबर की बात बताते हुए पार्टी सोर्स कहते हैं, ‘शाम 4 बजे लखनऊ में BJP के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह एक कार्यक्रम में मौजूद थे। तभी उनके फोन की घंटी बजी। दूसरी तरफ से अमित शाह की आवाज थी। उन्होंने कहा, फौरन पार्टी के नए कार्यकारी अध्यक्ष के नाम का लेटर तैयार करवाओ और सर्कुलेट कर दो। हमारे नए कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन हैं।’
‘बस क्या था, एक घंटे के अंदर लेटर तैयार होकर सर्कुलेट भी हो गया।‘ फिर इस फैसले के बाद पार्टी में तो खलबली मची होगी? ‘खलबली जैसा कुछ नहीं था, लेकिन हां जो लोग रेस में थे, उन्हें झटका लगा होगा। एक का नाम तो मैं भी जानता हूं। उनसे मेरी बात भी हुई।’
ऐलान से पहले सिर्फ मोदी, शाह और बीएल संतोष को थी खबर BJP सोर्स ने बताया, ‘जिस दिन नितिन नबीन के नाम का ऐलान हुआ, उस दिन PM नरेंद्र मोदी और संगठन महामंत्री बीएल संतोष, गृह मंत्री अमित शाह के घर पर मौजूद थे। यहीं से बीएल संतोष ने ही नितिन नबीन को भी लेटर जारी होने के कुछ घंटों पहले फैसले की जानकारी दी।’
‘उस वक्त इसके बारे में सिर्फ इन्हीं 3 लोगों को पता था। ये लोग एक साथ कितनी देर तक थे, ये तो नहीं पता है। हालांकि ये एक साथ गृह मंत्री जी के घर पर थे, ये बात पक्की है।’
क्या इनके अलावा पार्टी के किसी और सीनियर लीडर को इसकी जानकारी थी, ये जानने के लिए हमने कुछ पार्टी लीडर से भी बात की, लेकिन उनका कहना है कि इस बारे में उन्हें भी तब पता चला, जब नितिन नबीन के नाम का लेटर जारी हुआ।

नितिन नबीन ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाला। गृहमंत्री अमित शाह और जेपी नड्डा ने हाथ पकड़कर उन्हें कुर्सी पर बैठाया।
नितिन नबीन को कब और कैसे मिली खुशखबरी अब सवाल था कि नितिन नबीन को इस फैसले के बारे में कब पता चला? महामंत्री अरुण सिंह से पहले या बाद में? इसे जानने के लिए हमने नितिन नबीन के एक करीबी सोर्स से बात की। वे बताते हैं, ‘ऐलान के दिन सुबह तक नितिन जी को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था कि उनका नाम फाइनल हुआ है। वो तो अपनी विधानसभा सीट बांकीपुर में थे। वहां वो कार्यकर्ता सम्मान कार्यक्रम में व्यस्त थे।’
‘इसे बिहार में जीत की खुशी में नबीन जी ने ही कार्यकर्ताओं के सम्मान में रखा था। इसी दौरान दोपहर 2 से 2.30 बजे के करीब उनके पास संगठन महामंत्री बीएल संतोष जी का फोन आया। उन्होंने कहा कि फौरन दिल्ली आ जाइए। आपका नाम अध्यक्ष पद के लिए तय हुआ है।’
प्रवक्ताओं को दी गई थी हिदायत, यूपी और राष्ट्रीय अध्यक्ष पर संभल कर बोलें BJP राष्ट्रीय कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, 13 दिसंबर को करीब 3 बजे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में एक मीटिंग हुई। मीटिंग BJP के सीनियर लीडर विनोद तावड़े के नेतृत्व में हुई थी। इसमें राष्ट्रीय स्तर के सभी प्रवक्ता थे। इसमें सभी से यूपी अध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर कोई भी बयान देने से बचने के लिए कहा गया था। ये भी कहा गया था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर कयास भरे बयान से बचें।
हालांकि मीटिंग में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के न तो नाम पर चर्चा हुई और न ही घोषणा की तारीख पर। ये जरूर कहा गया था कि यूपी अध्यक्ष की घोषणा के एक घंटे बाद से लेकर एक महीने बाद तक कभी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। सोर्स बताते हैं कि सबको यही लगा कि खरमास के खत्म होते ही पार्टी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा क्योंकि अध्यक्ष बनाने की एक प्रक्रिया होती है, उसे पूरा करने में ही 3-4 दिन लग जाएंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर नहीं हुई कोई औपचारिक बैठक पार्टी कार्यालय के एक कार्यकर्ता कहते हैं, ‘राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष पद को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में तो कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई, न ही कोई नोटिफिकेशन जारी हुआ। वैसे तो इस तरह के चुनाव बहुत कॉन्फिडेंशियल होते हैं। PM, गृहमंत्री और RSS के वरिष्ठजनों की राय से ही फैसला होता है। हां राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक मीटिंग जरूर होती है, लेकिन अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर ये मीटिंग नहीं हुई।’
वे आगे कहते हैं, ‘हालांकि जगत प्रकाश नड्डा का चुनाव भी पहले ऐसे ही हुआ था, जब वो कार्यकारी अध्यक्ष बने थे। अमित शाह गृहमंत्री बने और उसके 1-2 दिन बाद ही नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया था। फिर 6-7 महीनों बाद जब वो स्थायी अध्यक्ष बने, तब पूरी प्रक्रिया हुई।‘
यानी कार्यकारी अध्यक्ष के लिए ये प्रक्रिया जरूरी नहीं? इस पर जवाब मिला, ‘देखिए BJP में पहली बार नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। तब ये प्रक्रिया नहीं हुई थी, तभी हमें भी पता चला कि कार्यकारी अध्यक्ष के लिए किसी प्रक्रिया की जरूरत नहीं।‘

कार्यकारी अध्यक्ष के पास कितनी पावर? इस पर पार्टी सोर्स ने बताया, ‘वो अभी स्वतंत्र रूप से कोई फैसला नहीं ले पाएंगे। कार्यकारी अध्यक्ष न तो टीम से किसी सदस्य को निकाल सकता है और न ही नया सदस्य जोड़ सकता है। मतलब वो पुराने स्ट्रक्चर के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं कर सकता। जो काम या प्रोजेक्ट चल रहे हैं, उसे उन्हीं की निगरानी करना और बैठकें करना होगा।’
पुराने अध्यक्ष का क्या दखल रहेगा? हां, उसे कुछ वक्त मिलेगा कि वो अपने काम ट्रांसफर कर सकें। जिन फैसलों पर काम चल रहा है, उन्हें नए अध्यक्ष को डिटेल में बता सकें। ऐसे में उनका कुछ हद तक ही दखल रहेगा।
नितिन नबीन ने मंत्रिपद से इस्तीफा दिया नितिन नबीन ने 16 दिसंबर को मंत्रिपद से इस्तीफा दे दिया है। बिहार सरकार में उनके पास पथ निर्माण विभाग और नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी थी। अब ये विभाग किसी और मंत्री को सौंपे जाएंगे।
BJP में लंबे समय से ‘एक व्यक्ति एक पद’ का सिद्धांत लागू है। इसके तहत नितिन नबीन को मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा है। उन्होंने 15 नवंबर को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय पहुंचकर पदभार संभाला।
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BJP ने बिहार सरकार के मंत्री नितिन नबीन को अपना राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। वे इस पद पर पहुंचने वाले सबसे युवा नेता हैं। उम्र है महज 45 साल। अमित शाह जब अध्यक्ष बने थे तो उनसे 5 साल बड़े यानी 50 साल के थे।नितिन नबीन को भी इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने की भनक नहीं थी। नितिन नबीन को BJP ने क्यों बनाया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष? 5 पॉइंट में पढ़िए…
