लव जिहाद और ड्रग्स तस्करी के बाद भोपाल के मछली परिवार का कनेक्शन अब शूटिंग की आड़ में कारतूसों की हेराफेरी से भी जुड़ गया है। भोपाल में शूटर्स के कारतूसों में हेरफेर की आशंका के खुलासे के बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। कुल 80 रजिस्टर्ड शूटर्स में से 75
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जांच के दौरान खिलाड़ियों का आपराधिक रिकॉर्ड भी खंगाला गया। पुलिस, आबकारी और फॉरेस्ट विभाग से जानकारी मांगी गई। पता चला कि मछली परिवार का शाहिद अहमद पिता शरीफ अहमद, निवासी बुधवारा का आपराधिक रिकॉर्ड है।
इसी वजह से उसके तीन गन लाइसेंस निरस्त कर दिए गए। शाहिद को 2012 में लाइसेंस मिला था। उसके पास तीन हथियार थे- 0.32 बोर रिवॉल्वर, 12 बोर सेमी-ऑटोमैटिक गन और 30.06 राइफल (विदेश से खरीदी गई)। उसे सालाना 30 हजार कारतूस की लिमिट मिली थी।
जांच में सामने आया कि शाहिद ने किसी शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं लिया। न इस आधार पर कारतूस खरीदे। उसने सिर्फ आत्मरक्षा के लिए जरूरी कारतूस खरीदे। जिला प्रशासन ने बताया कि मछली परिवार से जुड़े कुल 5 लोगों के लाइसेंस सस्पेंड किए गए हैं। शाहिद के अलावा सोहेल, शहरयार, शफीक और शावेज के नाम पर भी शस्त्र लाइसेंस थे। इन पर कुल 8 हथियार दर्ज थे।
खेल कैटेगरी के कारतूस का निजी इस्तेमाल किया
जांच में खुलासा हुआ है कि खेल कैटेगरी में मिलने वाले कारतूस का कोटा भी निजी इस्तेमाल के लिए किया जा रहा है। यानी बड़ी संख्या में सेल्फ डिफेंस के नाम पर कारतूस खरीदे गए। कुछ शूटर्स का मूल लाइसेंस दरअसल सेल्फ डिफेंस का है।
बाद में उन्होंने खेल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के नाम पर उसी लाइसेंस पर चार-चार हथियार तक ले लिए। जांच में ऐसे शूटर भी सामने आए हैं जिन्होंने खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा तो लिया। लेकिन अब तक लाइसेंस पर कारतूस खरीदे जाने का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखाया।
रिकॉर्ड की क्रॉस-चेकिंग पुलिस और जिला प्रशासन ने शूटर्स द्वारा जमा कराए गए रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि किसने कब, कितने और कहां से कारतूस खरीदे और उनका इस्तेमाल कहां किया। इन रिकॉर्ड्स को विभागीय दस्तावेजों और अन्य एजेंसियों से मिले आंकड़ों से मिलाया जाएगा। यहां तक कि शूटर्स ने जिन रेंजों में कारतूस चलाने का दावा किया है, वहां उनकी मौजूदगी की भी पुष्टि की जाएगी।
