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मोदी पहले दिन जिनपिंग से मिले, आज पुतिन से मुलाकात: रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर चर्चा होगी; SCO समिट में भी शामिल होंगे

मोदी पहले दिन जिनपिंग से मिले, आज पुतिन से मुलाकात:  रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे पर चर्चा होगी; SCO समिट में भी शामिल होंगे


बीजिंग17 मिनट पहले

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प्रधानमंत्री मोदी के चीन दौरे का आज दूसरा दिन है। उन्होंने कल चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से ट्रेड और टेररिज्म समेत अलग-अलग मुद्दों पर बात की और SCO समिट में शामिल हुए।

आज SCO समिट का आखिरी दिन है। पीएम इसमें शामिल होंगे और रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति की दिसंबर में होने वाली भारत यात्रा पर डिटेल वार्ता होगी।

भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि पीएम मोदी आज SCO के सम्मेलन को संबोधित करेंगे। इसमें वे भारत के क्षेत्रीय सहयोग को लेकर विचार साझा करेंगे। इसके बाद, राष्ट्रपति पुतिन से मिलेंगे और फिर भारत वापस लौट जाएंगे।

SCO समिट में आए सभी नेताओं ने कल ग्रुप फोटो खिंचाई, जिसमें पीएम मोदी के साथ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी एक ही मंच पर मौजूद थे।

पीएम मोदी और जिनपिंग की बातचीत के प्रमुख मुद्दे

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने रविवार को पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात का डिटेल ब्योरा दिया। यह पिछले एक साल में दोनों नेताओं की दूसरी मुलाकात थी। इससे पहले दोनों अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में मिले थे।

  • साझेदारी और शांति पर जोर- दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार हैं। दोनों देशों के दोस्ताना रिश्ते 2.8 अरब लोगों के लिए फायदेमंद होंगे। एशिया और दुनिया में मल्टी पोलर सिस्टम के लिए भारत-चीन का सहयोग जरूरी है।
  • सीमा मुद्दे पर चर्चा- पीएम मोदी ने सीमा पर शांति बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने पिछले साल में हुए समझौते और सीमा पर शांति बनाए रखने तारीफ की। मौजूदा सिस्टम के जरिए शांति बनाए रखने पर सहमति बनी।
  • जिनपिंग ने 4 सुझाव दिए- राष्ट्रपति शी ने संबंधों को बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिए- 1. डिप्लोमेटिक संवाद बढ़ाना, 2. आपसी भरोसा मजबूत करना, 3. आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाना, 4. एक-दूसरे की चिंताओं का ध्यान रखना और ग्लोबल मंचों पर साझा हितों की रक्षा करना।
  • सीमा विवाद और अन्य मुद्दे- दोनों नेताओं ने सीमा विवाद को आपसी सम्मान और दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखकर हल करने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने व्यापार संतुलन, लोगों के बीच संपर्क, सीमा पार नदियों पर सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर भी बात की।
  • BRICS सम्मेलन का न्योता- पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को 2026 में भारत में होने वाले BRICS सम्मेलन का न्योता दिया। शी ने न्योते के लिए शुक्रिया कहा और भारत की BRICS अध्यक्षता को समर्थन देने का वादा किया। पीएम मोदी ने चीन की SCO अध्यक्षता और तियानजिन समिट को भी समर्थन दिया।
  • आतंकवाद के मुद्दे पर चर्चा- पीएम मोदी ने जिनपिंग के सामने सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि आतंकवाद की समस्या का सामना भारत और चीन दोनों ने किया है। वहीं, चीन ने इस समस्या से निपटने के लिए कई तरह से अपना समर्थन देने का भरोसा दिया।
  • ग्लोबल संगठनों में सुधार की जरूरत- पीएम मोदी ने कहा कि WTO और UN जैसी संस्थाओं में खामियां हैं। भारत और चीन जैसे बड़े देशों के लिए यह साझा हित का विषय है, क्योंकि दोनों देश ग्लोबल आर्थिक और वित्तीय प्लेटफॉर्म पर अहम भूमिका निभाते हैं।
  • डायरेक्ट फ्लाइट शुरू करने की योजना- भारत और चीन के बीच जल्द ही डायरेक्ट फ्लाइट शुरू हो सकती हैं। हाल के महीनों में इस पर तकनीकी स्तर की कई दौर की बातचीत हुई है। दोनों पक्षों के बीच उड़ानों को फिर से शुरू करने पर सहमति बन गई है।
  • व्यापार घाटा- भारत और चीन के बीच बड़े व्यापार घाटे पर भी चर्चा हुई। यह मुद्दा कई सालों से बातचीत का हिस्सा रहा है। व्यापार घाटे को कम करने और पारदर्शी नीतियों के जरिए संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
  • ताइवान पर भारत का रुख– भारत ने बार फिर क्लियर किया कि ताइवान को लेकर भारत के रुख में कोई बदलाव नहीं है। भारत पूरी तरह वन चाइना पॉलिसी को मानता है।
मोदी और जिनपिंग ने द्विपक्षीय बैठक से पहले हाथ मिलाए।

मोदी और जिनपिंग ने द्विपक्षीय बैठक से पहले हाथ मिलाए।

रिश्तों में नरमी, लेकिन पुराने विवाद बरकरार

मोदी के चीन दौरे के बाद भारत और चीन के रिश्तों में नरमी के संकेत दिखे हैं। 2020 की गलवान झड़प के बाद पहली बार दोनों देशों ने सीमा और व्यापार से जुड़े कई अहम मसलों पर सहमति बनाई है।

लेकिन सीमा विवाद और पानी के मसले जैसे बड़े विवाद बने हुए हैं। आर्थिक दबाव और वैश्विक हालात ने दोनों को साथ बैठने पर मजबूर किया है, पर पूरी तरह भरोसा बनने में वक्त लग सकता है।

इस बार की SCO समिट 6 वजहों से खास

1. गलवान झड़प के बाद मोदी का पहला चीन दौरा: 5 साल पहले भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद यह पहला मौका है जब मोदी चीन पहुंचे हैं। इस वजह से पूरी दुनिया की नजर इस समिट और मोदी-जिनपिंग मुलाकात पर है।

2. ट्रम्प का SCO देशों पर हाई टैरिफ: ट्रम्प ने भारत (50%), चीन (30%), कजाकिस्तान (25%) समेत बाकी SCO देशों पर भी हाई टैरिफ लगाया है। ऐसे में यह उन देशों के लिए अहम है जो अमेरिकी दबाव के खिलाफ साझा मंच पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं।

3. अमेरिका की लीडरशिप को चुनौती: जिनपिंग इस समिट को अमेरिका के नेतृत्व वाले ग्लोबल ऑर्डर का विकल्प पेश करने का मंच बनाना चाहते हैं। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह रूस, भारत, ईरान जैसे देशों के साथ मिलकर ऑप्शनल पावर बन सकता है।

4. भारत का एजेंडा- आतंकवाद पर फोकस: जून 2025 में हुई SCO रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने जॉइंट स्टेटमेंट पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था। दरअसल, उसमें पहलगाम आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था। अब मुख्य मीटिंग में भारत, आतंकवाद पर चर्चा और समर्थन जुटाने की कोशिश करेगा। पाकिस्तान की मौजूदगी में यह मुद्दा छाया रहेगा।

5. 20 से ज्यादा देशों की मौजूदगी: इस बार समिट में सिर्फ SCO सदस्य ही नहीं, बल्कि ऑब्जर्वर और पार्टनर देशों को मिलाकर 20 से ज्यादा देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।

6. भारत-चीन में रिश्ते बेहतर हुए: गलवान के बाद पहली बार सीमा और व्यापार पर कुछ नरमी दिखी है। सीधी उड़ानें शुरू हुईं, बॉर्डर ट्रेड पर बातचीत हुई, कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल हुई।

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