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हरियाणा में 11 जिलों-1932 गांवों पर मानसूनी आफत: 70 घर ढहे, पौने 5 लाख एकड़ जलमग्न; मंत्री राणा बोले- चौमासे में तो बारिश होगी ही – Hisar News

हरियाणा में 11 जिलों-1932 गांवों पर मानसूनी आफत:  70 घर ढहे, पौने 5 लाख एकड़ जलमग्न; मंत्री राणा बोले- चौमासे में तो बारिश होगी ही – Hisar News


कुरुक्षेत्र व फरीदाबाद में डूबे घर और हिसार में गिरी बिल्डिंग।

हरियाणा में इस बार मानसून आफत बनकर टूट रहा है। प्रदेश से गुजरने वाली यमुना, घग्गर, मारकंडा, टांगरी, रूण, बेगना, राक्षी, सोम-पथराला नदियां उफन कर चल रही हैं। पहाड़ों पर बरसात की वजह से यमुना नदी लगातार 60 घंटे से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। 11 जिल

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सरकार के ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर ही 76 हजार से ज्यादा किसानों की ओर से करीब 4.68 लाख एकड़ फसल को बरसात या जलभराव से नुकसान होने का दावा किया गया है। हालांकि सरकार अभी वेरिफिकेशन के बाद ही आंकड़ा जारी करेगी। बरसात से जुड़े कारणों की वजह से अब तक 18 मौत प्रदेश में हो चुकी हैं। मौतों के संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

हरियाणा के 11 जिले ऐसे हैं, जहां बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। इसमें अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, सोनीपत, सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, गुरुग्राम, नूंह व फरीदाबाद जिले शामिल हैं। ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबे के आवेदन आए हैं, उनमें से सरकार की ओर से पटवारी स्तर पर सिर्फ 1487 एकड़ फसल का सर्वे हो पाया है।

सीएम नायब सैनी कह चुके हैं कि 15 सितंबर तक ई-क्षति पोर्टल खोला गया है। पूरी रिपोर्ट आने के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने भी कहा है कि चौमासे (बरसात का मौसम) में बारिश तो होगी ही। सरकार की ओर से प्रभावित किसानों, ग्रामीणों को राहत देने की तैयारी है। जल्द ही सरकार की ओर से राहत भरी खबर दी जाएगी।

अंबाला में सबसे ज्यादा नदियां, सभी उफनी शिवालिक की तलहटी पर बसे अंबाला जिले में सबसे ज्यादा नदियां गुजरती हैं। यहां टांगरी, मारकंडा, रूण, बेगना और घग्गर नदी प्रमुख हैं। घग्गर को छोड़ दें तो इस बार सभी नदियों ने नुकसान पहुंचाया है। टांगरी सीजन में दो बार उफन चुकी है। जबकि मारकंडा लगातार खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। रूण व बेगना ने नारायणगढ़ क्षेत्र में फसलों और जमीन का काफी नुकसान पहुंचाया है।

टांगरी ओवरफ्लो होने से तटबंध के अंदर बनी 10 से ज्यादा कॉलोनियों को लोगों को घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ा।

3 सितंबर को को टांगरी नदी के ओवरफ्लो होने से अंबाला की न्यू लक्की नगर कॉलोनी में पानी भर गया।

3 सितंबर को को टांगरी नदी के ओवरफ्लो होने से अंबाला की न्यू लक्की नगर कॉलोनी में पानी भर गया।

नदियां बना रहीं नए रिकॉर्ड…यमुना 60 घंटे से खतरे के निशान से ऊपर

  • यमुना: यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज पर यमुना नदी लगातार 60 घंटे से खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इससे पहले साल 2019 में यमुना में लगातार 3 दिन तक 3 लाख क्यूसेक से ऊपर जल स्तर रहा था।
  • मारकंडा: मुलाना क्षेत्र में बुधवार को मारकंडा नदी का जलस्तर 52,694 क्यूसेक दर्ज किया गया। विभाग के आंकड़ों के मुताबिक कई साल बाद नदी में इतना पानी आया है। इस सीजन में तीन बार 45 हजार क्यूसेक से ऊपर पानी आ चुका है।
  • टांगरी: बुधवार शाम को साढ़े 7 बजे टांगरी नदी में महेशनगर में 40,500 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि कई साल बाद नदी में इतना बहाव देखा गया है। पिछले सप्ताह नदी में 38 हजार क्यूसेक पानी दर्ज हुआ था। दोनों बार 10 कॉलोनियों से पलायन हुआ।

हरियाणा के इतिहास में सिर्फ एक बार ‘सरकारी बाढ़’ हरियाणा बनने के बाद से यूं तो कम से कम प्रदेश में करीब 15 बार बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। लेकिन सिर्फ 2023 में प्रदेश सरकार ने सरकारी तौर पर बाढ़ घोषित की थी। उस साल प्रदेश के 12 जिलों में 1354 जगह बाढ़ प्रभावित हुईं। तब 4,475 गांवों के 1.35 किसानों ने कुल 6.62 लाख एकड़ फसल में खराबा क्लेम किया था। 5,380 घरों को नुकसान पहुंचा था। सरकारी तौर पर बरसात संबंधी कारणों से 47 मौतों की पुष्टि हुई थी। वैसे, लोग 1978, 1995, 2010 की बाढ़ को सबसे खौफनाक बताते हैं।

अब पढ़िए हरियाणा के किस जिले में क्या स्थिति…

  • हिसार: हिसार में बारिश के कारण सभी ड्रेनेज खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। 8 ड्रेन हिसार में टूट चुकी हैं। इनमें कैमरी गांव ड्रेन, बालसमंद की बासड़ा, गांव घिराय स्थित ड्रेन, टोकस-पातन, मात्रश्याम, दौलतपुर, न्योलीकलां, शाहपुर और लुदास ड्रेन शामिल हैं। हिसार के 307 गांवों में से 180 गांवों में पानी भरा। 100 से अधिक परिवारों को ऊंचे स्थानों पर पलायन करना पड़ा। 81 गांवों में करीब 65 हजार एकड़ फसल को नुकसान पहुंचा है। हिसार में 10 से अधिक घर गिरे हैं। 5 लोगों की मौत बारिश से जुड़े कारण से हुई।
  • जींद: जींद के 20 से ज्यादा गांवों के खेतों में बरसाती पानी भरा हुआ है। इनमें उझाना, दनौदा कलां, दनौदा खुर्द, बेलरखां, मोरखी, लुदाना, भंभेवा, भिड़ताना, चाबरी, निडाना, शामलो, बुआना, गोसाई खेड़ा, मालवी शामिल हैं। 22 हजार एकड़ में खड़ी कपास की फसल को नुकसान हुआ है।
  • सोनीपत: यमुना नदी उफान पर होने से दो दर्जन से ज्यादा गांवों के खेत डूब चुके हैं। यमुना नदी में गन्नौर से लेकर दिल्ली बॉर्डर तक करीबन 30 गांव हैं। सबसे ज्यादा नुकसान किसानों की जमीन नदी में समा जाने से हुआ है। किसानों के मुताबिक करीबन 2 से ढाई हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई है।
सोनीपत में यमुना के पानी से धान की फसल बर्बाद हुई।

सोनीपत में यमुना के पानी से धान की फसल बर्बाद हुई।

  • गुरुग्राम: गुरुग्राम में नजफगढ़ नाला (पुरानी साहिबी नदी) धर्मपुर गांव के पास ओवरफ्लो हुई। जिससे तीन सोसाइटी और धर्मपुर गांव में पानी भर गया। अरावली बांध टूटने से पहाड़ों का पानी कादरपुर और आसपास के क्षेत्र में पानी जमा हो गया। जिले में 5 घर ढहे या दरार आई। एक घर गिरने से महिला की मौत हुई।
  • करनाल: जिले में पश्चिमी यमुना नहर और आवर्धन नहर है। यमुना के तटबंध के अंदर और किनारे की 800 एकड़ फसलें खराब हुई हैं। हालांकि यमुना के पानी ने पटरी को क्रॉस नहीं किया। बल्हेड़ा के पास ईंख बांधने के लिए गए यूपी निवासी मुस्तलिन यमुना में बह गया था, जिसका पता नहीं चला।
  • रोहतक-झज्जर-बहादुरगढ़: झज्जर में ड्रेन नंबर 8 के टूटने से क्लोई गांव के पास से सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हुई है। ड्रेन की कैपेसिटी 4000 क्यूसेक पानी की है, जबकि इसमें 6381 क्यूसेक पानी बह रहा है। बहादुरगढ़ में करंट लगने से एक बच्चे की मौत हुई। गांव रईया, गांव अच्छेज में मकान भी गिर चुके हैं। 30 से अधिक गांवों और 11000 एकड़ फसल में जलभराव है। बहादुरगढ़ में मुंगेशपुर ड्रेन ओवरफ्लो हुई। रोहतक में ड्रेन नम्बर 8 ओवरफ्लो चल रही है। करीब 10 हजार एकड़ से अधिक में फसल में जलभराव हुआ है।
रोहतक के गांव भैणी सुरजन और सैमाण के खेतों में भरा पानी।

रोहतक के गांव भैणी सुरजन और सैमाण के खेतों में भरा पानी।

  • कैथल: घग्गर में इस समय 22 फीट से अधिक पानी बह रहा है जो खतरे के निशान से सिर्फ 1 फीट नीचे है। गुहला चीका क्षेत्र के स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई हैं। अलर्ट किया गया है।
  • यमुनानगर: यमुनानगर जिले में यमुना, सोम-पथराला उफान पर हैं। सोम नदी चिंतपुर के पास से ओवरफ्लो हो गई, जिस कारण पानी चिंतपुर, खानुवाल और मानकपुर में घुस गया था। अब यमुना नदी के किनारे सटे लापरा, छोटा लापरा, घोड़ो पिपली, टापू माजरी, कमालपुर टापू, पाबनी, उन्हेड़ी, कनालसी, भोगपुर, बीबीपुर, बाकरपुर लाकड़,तेलीपुरा, कैट मंडी व कलेसर गांव प्रभावित हुए हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति लापरा और कमालपुर टापू में देखने को मिला है। बड़े पैमाने पर भूमि कटाव हुआ है। यमुनानगर में दो युवक यमुना में बहकर आ रही लकड़ियों को निकालने के चक्कर में बहे। वहीं रादौर क्षेत्र में मकान गिरने से 40 वर्षीय मान सिंह की मौत हुई। मानसून में यमुनानगर में चार मकान व एक श्मशानघाट ढहा है।
  • पंचकूला: पंचकूला जिले की बरवाला तहसील की बंदर घाटी की सड़क बारिश के कारण टूट गई। गांव दिला, बतौड़, खनौली व समानवा में करीब 8 मकान क्षतिग्रस्त हुए। एसडीएम चंद्रकांत कटारिया ने बताया कि मोरनी ब्लॉक में भी काफी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
  • फरीदाबाद: फरीदाबाद में यमुना नदी उफान पर है। गांव बसंतपुर, राजपुर, चांदपुर, अल्लीपुर में पानी भरा है। बसंतपुर में करीब 3 हजार घरों से पलायन हुआ। करीब 2000 एकड़ फसल पानी में डूबी है।
फरीदाबाद के गांव बसंतपुर में पानी में डूबे मकान।

फरीदाबाद के गांव बसंतपुर में पानी में डूबे मकान।

  • चरखी दादरी: जिले में गांव रानीला, दादरी शहर सहित आधा दर्जन गांवों में मकान गिरे हैं। गांव काकड़ोली हुक्मी,कादमा में 4 लोग करंट की चपेट में आए हैं। कपास, बाजरा, मूंग फसलों को काफी नुकसान हुआ है।
  • पानीपत: गांव तामशाबाद, जलमाना, अधमी, सनौली, पत्थरगढ़ में यमुना के पानी से स्थिति खराब हो गई थी, हालांकि अब काफी हद तक पानी उतर गया है। सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता सुरेश सैनी का कहना है कि पानीपत में अब बिल्कुल सामान्य है।
  • सिरसा: सिरसा जिले में घग्गर नदी उफान पर है। ढाणी चुंबन, बालासर, तलवाड़ा खुर्द, नेजाडेला कलां और मल्लेवाला में बरसाती पानी से नुकसान हुआ। यहां से करीब 150 परिवारों को पलायन कर दूसरी जगह शरण लेनी पड़ी। जिले में करीब 75,000 हेक्टेयर में कपास को नुकसान का अनुमान है। 15 से ज्यादा घरों को नुकसान हुआ है।
  • कुरुक्षेत्र: मारकंडा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। घग्गर व राक्षी उफान पर हैं। शाहाबाद में कठवा, मुगल माजरा, पट्टी जामड़ा, मलकपुर, गुमटी, अरूप नगर, तंगौर व मदनपुर में सड़कें और खेत डूब गए हैं। पिहोवा में घग्गर ओवरफ्लो होने से कुपिया प्लाट, रोड़ी प्लाट, अधोया, दीवाना और आसपास गांव के खेतों में पानी भरा हुआ है। लाडवा में राक्षी नदी 2 जगह से टूट गई। 3 सितंबर को शाहाबाद की अमर विहार कॉलोनी में कमरे की छत गिरने से 2 सगे भाई संदीप और कुलदीप निवासी प्रयागराज की मौत हो गई। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 70 गांवों में 13 हजार एकड़ से ज्यादा फसलें प्रभावित हुई हैं।
कुरुक्षेत्र के तंगौर गांव में भरे पानी से गुजरते लोग।

कुरुक्षेत्र के तंगौर गांव में भरे पानी से गुजरते लोग।

  • भिवानी: बारिश के कारण तालु, धनाना, जताई, सैय, मंढाना, प्रेम नगर, तिगड़ाना, गुजरानी, घुसकानी, मिताथल, मुंढाल, बडेसरा, खरक, कलिंगा, चांग, ढाणी चांग, दांग, बीरण, सांगवान आदि गांवों में जलभराव है। गांव सांगवान से परिवारों में तोशाम में शरण ली है। गांव कलिंगा में एक घर गिर गया। जिसके नीचे दबने से तीन बच्चियों की मौत है
  • नूंह: नूंह में करीब 53 गांवों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। करीब 4105 एकड़ भूमि में फसल खराब हो चुकी है। बारिश के कारण 12 मकान गिर चुके हैं। जिसमें 5 लोगों की मौत हुई।



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