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भारत ने 67 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया: अटारी-वाघा बॉर्डर से वतन लौटे; कोई प्यार में पड़कर, तो कोई घर से झगड़ा करके आया – Amritsar News

भारत ने 67 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा किया:  अटारी-वाघा बॉर्डर से वतन लौटे; कोई प्यार में पड़कर, तो कोई घर से झगड़ा करके आया – Amritsar News


अमृतसर बॉर्डर से पाकिस्तान जाते हुए रिहा कैदी।

भारत ने 67 पाकिस्तानी कैदियों को रिहा कर दिया है। ये कैदी मंगलवार को अटारी-वाघा बॉर्डर से पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपे गए। रिहा किए गए कैदियों में 53 मछुआरे और 14 सिविल कैदी शामिल हैं, जो अलग-अलग जेलों में वर्षों तक अपने परिवारों से दूर रहकर सजा का

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प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण माहल ने बताया कि रिहा किए गए कैदियों में गुजरात से 21, राजस्थान से 1, पोरबंदर से 39, हैदराबाद और लुधियाना से एक-एक तथा अमृतसर से 4 कैदी शामिल थे। इमिग्रेशन और कस्टम की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें पाकिस्तानी रेंजर्स को सौंप दिया गया। विदाई के दौरान कई कैदियों की आँखों में अपने घर लौटने की खुशी और वर्षों की पीड़ा साफ झलक रही थी।

स्नैप चैट पर बातचीत के बाद वह भारत पहुंचा

रिहा हुए कैदियों ने अपनी आपबीती सुनाई। एक कैदी ने बताया कि वह प्यार में अंधा होकर सीमा पार कर आया था। स्नैप चैट पर बातचीत के बाद वह भारत पहुंचा और पकड़े जाने पर उसे चार साल की सज़ा भुगतनी पड़ी। एक अन्य कैदी ने कहा कि घरेलू विवाद के कारण वह अपने परिवार से अलग हो गया और सीमा पार कर भारत चला गया। पाँच साल जेल में बिताने के बाद अब वह परिवार से मिलने की आस लिए अपने वतन लौट रहा है।

पाकिस्तान भेजने से पहले कार्रवाई में लगी पुलिस।

दो साथियों की जेल में हुई मौत

कराची के मोहम्मद रिजवान नामक एक मछुआरे ने बताया कि जब वह महज़ 16 साल का था, तब गलती से मछली पकड़ते हुए भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर गया। उसके साथ 15 अन्य साथी भी थे, जिनमें से दो की जेल में ही मौत हो गई। आज वह अपने पिता के साथ रिहा होकर लौट रहा है, लेकिन उसके कई साथी अब भी भारतीय जेलों में बंद हैं। उसने भारत सरकार से हाथ जोड़कर अपील की—“मेरे साथियों को भी घर लौटने का मौका दिया जाए।”

तनावपूर्ण माहौल में हुई रिहाई

यह रिहाई ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में आतंकवादियों द्वारा निर्दोष लोगों की हत्या के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे। बावजूद इसके, भारत सरकार का यह मानवीय कदम दोनों देशों के बीच विश्वास और सहानुभूति का संदेश देता है।

साथियों के लिए की दुआ

इस मौके पर कई कैदियों ने भावुक होकर कहा—“हम घर लौट रहे हैं, पर दिल अभी भी अपने साथियों के लिए दुआ कर रहा है।” भारत की यह पहल न केवल एक सरकारी प्रक्रिया है, बल्कि यह इंसानियत, करुणा और रिश्तों की मरम्मत की दिशा में एक बड़ा कदम है।



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