चेक बाउंस मामले में MP MLA कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पूर्व मंत्री और भोजपुर के भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा गुरुवार को इंदौर कोर्ट में पेश हुए। कोर्ट ने उनका पक्ष सुनने के बाद उन्हें जमानत दे दी है। जमानत मिलने के बाद उन्होंने मीडिय
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जानिए क्या-क्या बताई परेशानियां
– कोर्ट से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा कि कहा कि 2016 में हुई नोटबंदी और उसके बाद कोरोना महामारी के कारण देश के व्यापारियों को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।
– पटवा ने कहा कि उनका व्यवसाय महिंद्रा एंड महिंद्रा, पॉलीमर और फार्मा से जुड़ा है। इसमें उन्हें भी गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
– यह भी कहा कि यह केवल उनकी समस्या नहीं है, बल्कि देश के हजारों कारोबारी इस दौर से गुजरे हैं।
– उन्होंने विश्वास जाहिर किया कि जब भी जरूरत पड़ी है, मैंने हमेशा भुगतान किया है और आगे भी अपनी देनदारियों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।
न्याय पालिका पर जताया विश्वास
उन्होंने कहा कि इस मामले में उन्हें हाई कोर्ट से स्टे मिला हुआ है और सुप्रीम कोर्ट में भी मामले की सुनवाई चल रही है। उन्होंने न्याय पालिका पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा कोर्ट का जो भी फैसला होगा, मैं उसका पूरा सम्मान करूंगा। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि जल्द ही सच्चाई सबके सामने आ जाएगी।
चेक बाउंस के 70 से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित
गौरतलब है कि विधायक पटवा के खिलाफ चेक बाउंस के 70 से ज्यादा मामले कोर्ट में लंबित हैं। ज्यादातर में मामला हाईकोर्ट तक जा चुका है। कुछ में उन्हें राहत भी मिली है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई है। बार-बार नोटिस के बाद भी पटवा कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे थे।
पत्नी के खिलाफ भी धोखाधड़ी का था मामला
अक्टूबर 2021 में सीबीआई ने सुरेंद्र पटवा और उनकी पत्नी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था। यह केस बैंक ऑफ बड़ौदा की इंदौर शाखा से मिली शिकायत पर दर्ज किया गया था। पटवा परिवार पर आरोप है कि उन्होंने बैंक से जुड़े लेन-देन में गड़बड़ी की। इसके बाद धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
बता दें कि सुरेंद्र पटवा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के भतीजे हैं। वे बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। वे रायसेन जिले की भोजपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वे शिवराज सरकार में पर्यटन मंत्री भी रह चुके हैं।
7 साल पहले संपत्ति कुर्क करने का आदेश
एमपी के पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा के भतीजे सुरेंद्र पटवा के खिलाफ 7 साल पहले भी तत्कालीन इंदौर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव की कोर्ट ने उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया था। यह आदेश 33.45 करोड़ रुपए का बैंक लोन नहीं चुकाने पर जारी किया गया था। कोर्ट ने कहा था कि गिरवी रखी गई संपत्ति बैंक को फौरन सौंपी जाए। बैंक इसकी कुर्की कर लोन की वसूली करेगा।
कोर्ट ने मेसर्स पटवा ऑटोमेटिव प्रा.लि. लसूड़िया मोरी देवास नाका और जमानतदार मेसर्स स्टार सिटी कंस्ट्रक्शन, सुरेंद्र पटवा, मोनिका पटवा, भरत पटवा, महेंद्र पटवा और फूलकुंवर बाई पटवा को संबंधित संपत्ति बैंक को तुरंत सौंपने का आदेश जारी किया था।
कंपनी ने 36 करोड़ रुपए का लोन लिया था
15 सितंबर 2014 को पटवा की कंपनी ने बैंक से 36 करोड़ का लोन लिया था। किस्तें नहीं चुकाने पर 2 मई 2017 को इसे एनपीए में डालते हुए संबंधित को 33.45 करोड़ जुलाई 2017 तक चुकाने का नोटिस जारी हुआ। लोन नहीं चुकाए जाने पर बैंक ने डीएम कोर्ट में संपत्ति का कब्जा दिलाने का आवेदन दिया था। इसमें लगातार सुनवाई हुई और मामला डीआरटी में गया। डीआरटी ने जनवरी 2019 तक लाेन चुकाने का मौका दिया था।
सुप्रीम कोर्ट से भी लगा था पटवा को झटका
अप्रैल 2025 में भी सुरेंद्र पटवा को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा था। तब अलग-अलग बैंकों में फर्जी खाते खोलने के मामले में CBI की FIR को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश को पलट दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 25 अप्रैल 2025 को दिए अपने आदेश में कहा था कि आपराधिक मामलों में FIR दर्ज करने से पहले आरोपी का पक्ष सुनना जरूरी नहीं है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामला फिर से हाईकोर्ट को भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि हाईकोर्ट ने जिस आधार पर FIR रद्द की थी, वह मामला पूरी तरह अलग था।
अलग-अलग बैंकों में खोले थे फर्जी अकाउंट्स
रिजर्व बैंक के निर्देश पर संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान एसबीआई सहित अन्य बैंकों में सुरेंद्र पटवा, विजय सोनी और राजीव सोनी के नाम पर फर्जी खाते पाए गए थे। मामले में सीबीआई ने FIR दर्ज की थी। FIR के खिलाफ पटवा समेत अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे 25 जुलाई 2023 को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने FIR निरस्त कर दी थी।
