5 अगस्त 2019, केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाने का एलान किया। इसके साथ ही जम्मू कश्मीर में आने वाले लद्दाख को अलग कर यूनियन टेरिटरी बनाने का भी फैसला हुआ। लेह में इस फैसले का जमकर स्वागत हुआ। हालांकि जल्द ही लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्ज
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लद्दाख में तब से धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों का दौर जारी है। इसी मांग को लेकर लेह में 10 सितंबर से भूख हड़ताल और अनशन चल रहा था। 24 सितंबर को ये आंदोलन पहली बार हिंसक हो गया। इसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 45 लोग घायल हुए। प्रदर्शन का चेहरा रहे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा कि अगर सरकार हमारी बातें अनसुनी करती रहेगी तो बदकिस्मती से ऐसा आगे भी हो सकता है।
हालांकि 25 सितंबर को गृह मंत्रालय के अधिकारी बातचीत के लिए लेह पहुंच चुके हैं। अब लद्दाख की एपेक्स बॉडी और सरकार के बीच तमाम मुद्दों पर बातचीत होगी। प्रदर्शनकारियों को उम्मीद है कि उनकी मांगें सुनी जाएगी।
इधर वांगचुक के NGO- स्टूडेंट्स एजुकेशन एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख को विदेशी से मिलने वाले फंड से जुड़ा लाइसेंस केंद्र सरकार ने कैंसिल कर दिया है। इससे पहले गृह मंत्रालय ने लेह में हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया था। इस पर वांगचुक ने कहा, ‘मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इससे हालात सुधरेंगे नहीं, बल्कि और बिगड़ेंगे।’
लेह में 24 सितंबर को क्या-क्या हुआ? शांतिपूर्ण प्रदर्शन अचानक हिंसक कैसे हो गया? अब आगे इस आंदोलन की दिशा क्या होगी? ये समझने के लिए हमने प्रदर्शन का समर्थन कर रहे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक और सीनियर जर्नलिस्ट से बात की।
सबसे पहले सोनम वांगचुक से बात… अगर सरकार नहीं सुनती तो बदकिस्मती से ऐसी घटनाएं फिर होंगी लेह में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर हमने सोनम वांगचुक से बात की। वे लद्दाख में पूर्ण राज्य और 6वीं अनुसूची की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के समर्थक हैं और आंदोलनकारियों की बातों को दुनिया तक पहुंचाते रहे हैं। पढ़िए पूरी बातचीत…
सवाल: 24 सितंबर को प्रदर्शन अचानक हिंसक कैसे हो गया? जवाब: वो मेरी जिंदगी का सबसे दुखद दिन रहा। पिछले 5 साल से आंदोलन करते हुए हमने महात्मा गांधी का शांति का रास्ता अपनाया लेकिन 24 सितंबर को हिंसा हो गई। हमने अपनी मांगों को लेकर दिल्ली तक पैदल मार्च भी किया लेकिन ऐसा होगा कभी नहीं सोचा था।
अपने आप युवा सड़कों पर आ गए और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। उन्हीं में से एक ग्रुप अलग होकर तोड़फोड़ करने लगा। मैं उन युवाओं की नाराजगी और भावनाओं को समझ सकता हूं, क्योंकि वो कई सालों से बेरोजगार हैं। सरकारी नौकरियां मिल नहीं रही हैं।

प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हो गई, जिसके बाद भीड़ ने BJP ऑफिस और CRPF की गाड़ी में आग लगा दी।
सवाल: प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस ने क्या गोलियां चलाईं? जवाब: मुझे बिल्कुल नहीं पता है कि पुलिस ने किस तरह के हथियारों का इस्तेमाल किया। हमने रबर बुलेट का सुना था। वहीं लीथल वेपन का भी इस्तेमाल किया गया है। इसलिए बहुत सारे लोगों की जानें गईं।
सवाल: अब लद्दाख के आंदोलन की दिशा क्या होगी? जवाब: अभी तो सब कुछ धुंधला है। ये गृह मंत्रालय से अधिकारी से बातचीत के बाद ही पता चलेगा कि सरकार हमें सुनना चाहती है या फिर हमें अनसुना करती है। अगर वो हमारी बात नहीं सुनते हैं तो बदकिस्मती से ऐसी और घटनाएं हो सकती हैं।
मेरी सरकार से सबसे बड़ी शिकायत है कि कई सालों से हम शांति के रास्ते पर थे, लेकिन उन्होंने अशांतिपूर्ण तरीकों को हवा दी। हमारा शांतिपूर्ण रास्ता असफल रहा, तब ये युवा सड़कों पर आए।

वांगचुक समेत 15 लोग पिछले 15 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे थे। मांगें पूरी न करने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने 24 सितंबर को बंद बुलाया था।
सवाल: क्या आप इसे सच में GenZ क्रांति की शुरुआत मानते हैं? जवाब: मैंने इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया है। मैं इसे GenZ रेवोल्यूशन नहीं कह सकता।
सवाल: प्रदर्शन उग्र और हिंसक होने की क्या वजह है? जवाब: 23 सितंबर को जो 15 लोग अनशन पर बैठे थे, उनमें से एक महिला और एक पुरुष को कमजोरी की वजह से हॉस्पिटल ले जाना पड़ा।
युवाओं में गुस्सा और नाराजगी की सबसे बड़ी वजह यही थी। 15 दिनों से हम बातचीत की मांग कर रहे थे लेकिन सरकार ने काफी ज्यादा वक्त लगा दिया।

सवाल: क्या इस हिंसा के पीछे कोई राजनीति भी है? जवाब: हमारे आंदोलन की एपेक्स बॉडी ने कांग्रेस को निर्देश दिया था कि वो इससे बाहर हो जाए। पहले हमारा नेतृत्व करने वाले समूह में सभी राजनीतिक पार्टियों के लोग थे। जब BJP एपेक्स बॉडी से बाहर हुई, तब हमने कांग्रेस से भी बाहर जाने को कहा। प्रदर्शन में करीब 4-5 हजार युवा शामिल हुए थे। मुझे नहीं लगता कि लेह की सड़कों पर कांग्रेस में इतने लोग इकट्ठा करने की क्षमता है।
पुलिस ने रोकने की कोशिश की इसलिए पुलिस की गाड़ी को नुकसान पहुंचा। BJP ने लेह में चुनाव लड़ते हुए वादा किया था कि लद्दाख को 6वीं अनुसूची में डाला जाएगा लेकिन वादा कभी पूरा नहीं किया।

पुलिस के प्रदर्शन रोकने पर प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।
सवाल: लद्दाख जैसे सीमावर्ती इलाके में हिंसा और तनाव क्या चिंता की वजह नहीं है? जवाब: सरकार इस सीमावर्ती संवेदनशील इलाके में ये सब होने दे रही है ये सवाल सरकार से होना चाहिए। हमने अपनी मांगें लेकर कई अनशन किए हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। हमने 5 साल से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया है। सरकार के पास इसे सुनने के लिए बहुत समय था।
लद्दाख के युवा मुझे ही कटघरे में खड़ा करते रहे हैं कि शांतिपूर्ण रास्ते पर चलने से कुछ नहीं होगा, लेकिन मैंने उनको हमेशा समझाया कि यही एक रास्ता है।

सुरक्षाबलों ने आगे बढ़ने से रोका इसलिए भड़की हिंसा घटना को लेकर लद्दाख के सीनियर जर्नलिस्ट और सोनम वांगचुक के करीबी तसेवांग रिग्जिन कहते हैं कि सरकार ने बातचीत के लिए 6 अक्टूबर की तारीख दी है। ये काफी लंबा वक्त था। लोगों की चिंता थी कि अगर अनशन आगे बढ़ा तो और ज्यादा लोगों की तबीयत खराब हो सकती है। अनशन में दो लोगों की तबीयत जब बिगड़ी तभी 24 सितंबर को बंद और प्रदर्शन बुलाया गया।
ये हिंसा कैसे हुई पूछने पर रिग्जिन कहते हैं, ‘इसके बारे में अभी ठीक से कुछ नहीं कहा जा सकता। इतना ही पता है कि प्रदर्शनकारी भीड़ काउंसिल दफ्तर की तरफ मार्च कर रही थी लेकिन सुरक्षाबलों ने आगे बढ़ने नहीं दिया। पहले झड़प शुरू हुई और फिर हिंसा होने लगी। वहां से भीड़ करीब आधा किमी मार्च करते हुए BJP दफ्तर जा पहुंची।’
’पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागने शुरू कर दिए। हमें पता चला है कि पुलिस ने फायरिंग भी की है। अपने ही लोगों को इस तरह फायरिंग में जान देनी पड़े, इसे बुरा क्या हो सकता है। हमने ये कभी नहीं सोचा था। हम सब सदमे में हैं।’ रिग्जिन बताते हैं कि प्रदर्शन में ज्यादातर युवा थे, जिनकी उम्र करीब 18 से 22 साल थी।

पुलिस फायरिंग कर ऐसे अपनों की जान लेगी, कभी सोचा नहीं लद्दाख एपेक्स बॉडी (LAB) और कर्जोक (Kargil) डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) मिलकर आंदोलन को लीड करती हैं। दोनों ने साथ मिलकर एक जॉइंट कोआर्डिनेशन कमेटी बनाई है, जो बातचीत और आंदोलन की स्ट्रैटजी बनाती हैं। सोनम वांगचुक भी आंदोलन का चेहरा हैं, लेकिन औपचारिक नेतृत्व LAB–KDA गठबंधन के पास है। ये दिल्ली और लेह में केंद्र सरकार से बातचीत करते हैं।
लेह एपेक्स बॉडी के लीगल एडवाइजर मुस्तफा हाजी से हमने आंदोलन की रणनीति और न्यायिक पहलुओं पर बात की। उन्होंने बताया, ‘हमारी मांगों को लेकर गृह मंत्रालय के साथ बातचीत चल रही है। नित्यानंद राय के नेतृत्व में एक हाई पावर्ड कमेटी बनाई गई है।’
एपेक्स बॉडी की मांगें…

मुस्तफा बताते हैं, ‘नौकरियों में आरक्षण को लेकर हमारी कुछ बातें मानी गई हैं, लेकिन पूर्ण राज्य और 6वीं अनुसूची को लेकर अब तक कोई बातचीत नहीं हुई है। हमने पिछले 5 साल से हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए हैं। हम 1 हजार किमी पैदल चलकर दिल्ली भी पहुंचे।‘
24 सितंबर के प्रदर्शन ने हमारे 4 लोगों को मार दिया गया। हमें ये आशंका तक नहीं थी कि हम पर फायरिंग की जाएगी। हम चाहते हैं कि शांतिपूर्ण ढंग से मुद्दों का समाधान हो। जो हिंसा हुई, वो फिर ना हो। हमें लगता है कि गृह मंत्रालय और भी कुछ लोगों को हिरासत में लेना चाहता है, ऐसा कुछ ना किया जाएग। कुछ लोगों को सरेंडर करने के लिए फोन आ रहे हैं। हमारे नेताओं से बात करके इस मुद्दे का समाधान किया जाए।

प्रदर्शन और हिंसा के बाद लेह में कर्फ्यू प्रदर्शन में मारे गए लोगों की पहचान त्सेवांग थारचिन (46 साल), स्टानजिन नामग्याल (24 साल), जिगमेत दोरजय (25 साल) और रिनचेन ददुल (21 साल) के रूप में हुई। शव परिवारों को सौंप दिए गए। इस मौके पर एपेक्स बॉडी के चेयरमैन थुप्स्तान छेवांग और को-चेयरमैन चेरिंग दोरजय ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
हिंसा के दौरान 45 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। ऑफिशियल आंकड़ों के मुताबिक, लद्दाख DGP एसडी सिंह जमवाल ने बताया कि 15 लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जबकि 30 को मामूली चोटें आई हैं। इसमें प्रदर्शनकारी, पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री जवान शामिल हैं। लेह में अभी BNS की धारा 162 के तहत कर्फ्यू लगाया गया है। सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है।

24 सितंबर को प्रदर्शन के दौरान हिंसा में घायल हुए लोगों का लेह के अस्पताल में इलाज चल रहा है।
वांगचुक के NGO के अकाउंट्स की जांच हो रही CBI ने वांगचुक की NGO हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ ऑल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) के खिलाफ विदेशी फंडिंग मामले में जांच शुरू कर दी है। सरकार ने उनके NGO की विदेशी फंडिंग का लाइसेंस रद्द कर दिया है। उनके NGO HIAL और स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) पर विदेशी चंदा कानून (FCRA) के उल्लंघन का आरोप है।
CBI की टीमें लद्दाख में डेरा डाले हुए हैं। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल कोई FIR दर्ज नहीं की गई है। CBI की टीम NGO के अकाउंट्स और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
इस मामले में वांगचुक ने कहा कि करीब 10 दिन पहले CBI की टीम गृह मंत्रालय का आदेश लेकर उनके पास आई थी। इसमें कहा गया था कि उनकी दोनों संस्थाओं ने विदेशी चंदा लेने के लिए जरूरी मंजूरी नहीं ली। इस पर सोनम का कहना है कि उनकी संस्थाएं विदेशी चंदे पर निर्भर नहीं हैं। दोनों संस्थाएं जरूरतमंद बच्चों को मुफ्त शिक्षा देती हैं। HIAL में तो छात्रों को प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए स्टाइपेंड भी दिया जाता है। ……………..
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लद्दाख के सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुवार को लेह में हिंसा भड़काने के आरोपों को खारिज किया है। वांगचुक ने कहा, ‘मुझे बलि का बकरा बनाया जा रहा है। इससे हालात सुधरेंगे नहीं, बल्कि और बिगड़ेंगे।’ 24 सितंबर की देर रात गृह मंत्रालय ने लेह में हिंसा के लिए वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया था। पढ़िए पूरी खबर…
