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पंजाब में बाढ़ से पशुधन को भारी नुकसान: राज्यभर में 502 पशु मारे, सबसे अधिक नुकसान अमृतसर में दिखा; 6,515 पक्षी ढूबे – Amritsar News

पंजाब में बाढ़ से पशुधन को भारी नुकसान:  राज्यभर में 502 पशु मारे, सबसे अधिक नुकसान अमृतसर में दिखा; 6,515 पक्षी ढूबे – Amritsar News


पंजाब में बाढ़ के बीच सबसे अधिक नुकसान अमृतसर में पशुधन को पहुंचा है।

पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुंचाया। लोगों को हुए धन नुकसान के अलावा भारी गिनती में पशुओं और पोल्ट्री सेक्टर को भी इसकी मार पड़ी है। सबसे गंभीर स्थिति अमृतसर जिले में देखने को मिली, जहां अकेले सबसे अधिक पशु और पक्षियो

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पशुपालन विभाग द्वारा 23 सितंबर तक जारी आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में कुल 6,515 पक्षियों की मौत हुई, जिनमें से 5,015 सिर्फ अमृतसर में मरे। इनमें पोल्ट्री पक्षी भी शामिल हैं। दूसरे नंबर पर होशियारपुर रहा, जहां तकरीबन 1,500 पोल्ट्री बर्ड्स की मौत दर्ज की गई।

सेहत विभाग की तरफ से पशुओं को मेडिकल एड देना शुरू कर दिया गया है।

सबसे ज्यादा मवेशी भी अमृतसर में ही मरे

पूरे पंजाब से मिले आंकड़ों के अनुसार 502 मवेशी इस बाढ़ में मारे गए व बह गए। यहां भी सबसे अधिक मार अमृतसर को ही पड़ी। अमृतसर के अजनाला सेक्टर में अचानक आई बाढ़ में लोग अपने पशुओं को भी ना बचा सके। अमृतसर में 218 मवेशियों की मौत हुई या वे बह गए। इसके बाद गुरदासपुर 151 मवेशियों की मौत के साथ दूसरे नंबर पर रहा।

अमृतसर जिले में 172 सूअर, सात बैल, 18 बछड़े, 22 बछियां और एक घोड़े की मौत दर्ज की गई। वहीं, फिरोजपुर में एक बछड़े और एक हीफर की मौत की पुष्टि हुई।

पंजाब में शुरू हुआ टीकाकरण अभियान

इस संकट से निपटने और बचे हुए पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान शुरू किया है। शुक्रवार तक पूरे पंजाब में 2.33 लाख से अधिक पशुओं को हैमरेजिक सेप्टीसीमिया (HS) वैक्सीन की बूस्टर डोज दी जा चुकी है।

पशुपालन विकास एवं मत्स्य विभाग के प्रमुख सचिव राहुल भंडारी ने जानकारी सांझा करते हुए बताया“हमने पूरे राज्य में सभी मवेशियों को HS की बूस्टर डोज दे दी है। हमारा पशुधन अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और हम किसानों को हर संभव सहयोग देंगे।”

बीमारी का खतरा बढ़ रहा

राहुल भंडारी ने बताया कि अब तक किसी बड़ी महामारी जैसी स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन पशुओं में खुरपका, थनों में सूजन, टिक-बॉर्न संक्रमण, त्वचा रोग, गैस्ट्रोएंटेराइटिस (पेट संबंधी बिमारियां) और पोषण की कमी जैसे लक्षण पाए गए हैं। हरे चारे की कमी के कारण कई पशुओं में पाचन संबंधी दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन प्रभावित हुआ है।

पशुओं को उपचार देना शुरू किया गया

पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के लिए मुफ्त दवाएं, मिनरल मिक्सचर (यूरोमिन लिक्स), साइलेंज और क्लोरीन टैबलेट्स बांटी जा रही हैं। पशुओं के लिए साफ पानी उपलब्ध करवाने के प्रयास भी जारी हैं।

पशु चिकित्सा टीमों और पैरा-स्टाफ को रोजाना गांव-गांव जाकर पशुओं की स्थिति की निगरानी करने, इलाज उपलब्ध कराने और समय पर हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया है ताकि नुकसान की भरपाई हो सके और किसान फिर से अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिल सके।



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