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पंजाब के शिक्षामंत्री मोहाली के प्राइवेट अस्पताल पहुंचे: बैड होने पर भी लोगों को करते परेशान, सेहतमंत्री को करेंगे शिकायत; वीडियो से दिखाएं हालात – Chandigarh News

पंजाब के शिक्षामंत्री मोहाली के प्राइवेट अस्पताल पहुंचे:  बैड होने पर भी लोगों को करते परेशान, सेहतमंत्री को करेंगे शिकायत; वीडियो से दिखाएं हालात – Chandigarh News


शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस अस्पताल का के बारे में जानकारी देते हुए।

पंजाब के शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस मोहाली के एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल की इमरजेंसी में बैड होने के बावजूद भी लोगों को परेशान किया जाता है। उन्होंने वीडियो बनाकर इमरजेंसी में खाली पड़े बैड तक दिखाए और मरीजों के पर

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शिक्षामंत्री ने कहा कि इस मामले को वह सेहतमंत्री के समक्ष उठाएंगे। साथ ही अस्पताल के बैड तक चैक करवाएंगे। उन्होंने बताया कि हमीरपुर से एक माता आए थे, उन्हें इलाज के लिए 20-25 मिनट एंबुलेंस में बिठाए रखा। इमरजेंसी में दाखिल नहीं किया गया। उन्हें मजबूर होकर माता व एक अन्य मरीज को अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा।

शिक्षामंत्री ने कहा उन्हें यह सोचकर काफी हैरानी होती है कि इन प्राइवेट अस्पतालों के लिए इंसान की कीमत से ज्यादा पैसा महत्वपूर्ण है। जहां मरीजों से इलाज के नाम पर लाखों रुपए वसूल लिए जाते हैं, वहीं उन्हें भटकना और परेशान होना पड़ता है। जिन्हें भगवान का दूसरा रूप माना जाता है, मैं “डॉक्टर साहिबान” का तहे दिल से आदर करता हूं, लेकिन कुछ ऐसे अस्पताल और उनके प्रबंधको को देखकर बहुत दुःख होता है जब वो ऐसे काम करते हैं।

पंजाब के शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस द्वारा शेयर की गई पोस्ट।

शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट फेसबुक पर 1 मिनट 31 सेकेंड के वीडियो में सारा हाल दिखाय

1. मंत्री ने वीडियो में बताया कि मैं मैक्स अस्पताल मोहाली आया था। हमारे सरपंच साहब के जीजा जी यहां पर दाखिल है। उन्हें आईसीयू में लेने के लिए, हम बैड अरेंज कर रहे थे। जब तक उनका कार्ड बना था, पैसे नोचने थे, उन्हें यहां पर एडमिड किया गया। अब कह रहे हैं अब रुक जाओ। हमारे पास बैड नहीं हैं। जबकि हमारे यहां खड़े रहते ही आधे घंटे में दो एंबुलेंस मरीज में तड़फ रहे है। लेकिन सारी इमरजेंसी खाली पड़ी है।

2. शिक्षामंत्री ने फिर अस्पताल के अंदर जाकर एक जगह दिखाई। इसके बाद वह अंदर चले जाते है और दावा करते है कि सारी इमरजेंसी खाली पड़ी है। इनका मकसद यही है कि जहां से पैसे बन सके। मरीज को आईसीयू में शिफ्ट नहीं कर रहे। फिर वह बाहर आते हैं और मरीजों के परिवारों से बात करते हैं।

3. इस दौरान एक व्यक्ति बताता है कि वह बीस मिनट से आए हुए हैं। पहले फाइल देखी, फिर कहते इमरजेंसी में बैड नहीं है। दूसरा पेशेंट भी एंबुलेंस में है। मंत्री कहते है यह तो बेसिकली देखते ही कि पैसा कहा से आ सकता है। मरीज के साथ आया व्यक्ति कहता है हम तीसरी चौथी बार आए हैं।

शिक्षामंत्री ने कहा कि मैं हेल्थ मंत्री को अभी फोन कर शिकायत कर रहा हूं। एक तो इनके बैड चेक किए जाए। यह बहुत ही दुखदायी है। अगर आपके पास बेड फुल है तो पहले ही साफ करे।

शिक्षामंत्री मरीज के साथ आए व्यक्ति से बात करते हुए।

शिक्षामंत्री मरीज के साथ आए व्यक्ति से बात करते हुए।

अस्पताल ने दिया यह तर्क

अस्पताल के प्रवक्ता ने कहा, “60 वर्षीय मरीज़, जिन्हें इलाज के लिए कई बार हमारे अस्पताल में भर्ती कराया गया। आखिरी बार 22 सितंबर 2025 को छुट्टी दी गई थी। आज, उन्हें और भी गंभीर समस्याएं होने पर आईसीयू देखभाल की आवश्यकता होने पर हमारे इमरजेंसी विभाग में वापस लाया गया। उस समय, कोई आईसीयू बिस्तर उपलब्ध नहीं था, और इस बारे में मरीज़ और उसके परिवार को विधिवत सूचित कर दिया गया था। बाद में, बैड उपलब्ध होने पर मरीज़ को सीसीयू में भर्ती कराया गया।”



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