नई दिल्ली17 मिनट पहले
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी एक हेल्थ एडवाइजरी में कहा है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत के बाद यह एडवाइजरी जारी की गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीजीएचएस ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाना है तो उनका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए, उसे उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नही दिया जाए।
स्वास्थ्य मंत्रालय की एडवायजरी में ये बातें
- दो साल से कम उम्र के बच्चों को ना कफ सिरप नहीं दें।
- पांच साल से कम उम्र के बच्चों को भी कफ सिरप देने से बचना चाहिए।
- पांच साल से कम उम्र के बच्चों को दवा देने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।
- डॉक्टर सिरप देने के बजाए पहले बिना दवा के इलाज बताएं।
- बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ, सही देखभाल और भाप दें और गरम पानी पिलाएं।
- बच्चों में खांसी के ज्यादातर मामले अपने आप ही ठीक होने वाली बीमारियां हैं जो बिना दवा के ठीक हो जाती हैं।
डीजीएचएस की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है।
सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों और क्लिनिक से कहा गया है कि वे अच्छी कंपनी की और फार्मास्युटिकल-ग्रेड दवाएं खरीदें। यह भी कहा गया है कि यह एडवाइजरी सभी सरकारी दवाखानों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, जिला अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में लागू की जाए।
सिरप के नमूनों में घातक रसायन नहीं
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौतों को कफ सिरप से जोड़ने वाली खबरों पर स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त टीम ने घटनास्थल का दौरा किया था। राज्य के अधिकारियों के साथ कफ सिरप के सैंपल लेकर इनकी जांच की गई। सैंपल में घातक रसायन डाइएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल की मौजूदगी नहीं पाई गई है।
मंत्रालय ने बताया कि एनसीडीसी, एनआईवी, सीडीएससीओ समेत विभिन्न संस्थानों की संयुक्त टीम ने मौके पर जाकर सिरप, रक्त और अन्य सैंपल लिए थे। मध्य प्रदेश की राज्य खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने भी तीन नमूनों की जांच की, जिनमें डाइएथिलीन ग्लाइकोल या एथिलीन ग्लाइकोल नहीं मिला। वहीं एनआईवी पुणे की जांच में एक मामले में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की पुष्टि हुई है।

