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शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्ग्याणा के बड़ा श्री हनुमान मंदिर में चल रहा लंगूर मेला शुक्रवार को समाप्त हो गया। मेले के समापन पर लंगूर बने बच्चों ने अपने बाणे उतारे। लंगूर बने बच्चे अपने परिजनों के साथ सुबह 5 बजे ही मंदिर पहुंच गए। बाणे उतारने के बाद, उन्होंने सरोवर में स्नान किया और नए वस्त्र धारण किए।
इसके उपरांत, सभी बच्चों ने बड़ा श्री हनुमान मंदिर में जाकर माथा टेका और लंगूर बनने के दौरान अनजाने में हुई भूल के लिए श्री हनुमान जी से क्षमा याचना करके प्रार्थना की। श्री गिरिराज सेवा संघ के प्रधान संजय मेहरा ने बताया कि यह लंगूर मेला कई वर्षों से चला आ रहा है।
दशहरा के दिन लंगूर बने बच्चे रावण को गदा मारते हैं और उसके अगले दिन माथा टेकने के बाद अपना बाणा उतारते हैं। बाणा उतारने के बाद सभी बच्चे अपना जीवन सामान्य रूप से गुजारना शुरू करते हैं और वे चाकू से कटी फल और सब्जियां भी खा सकते हैं। इस अवसर पर, सेवा दल के कई सदस्यों ने लंगूरों के बाणे संभाले और उन्हें उचित स्थान पर रखा।
