नीलांबर पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह में सोमवार को राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने 72 गोल्ड मेडलिस्ट को स्वर्ण पदक और कुल 1038 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की।
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राज्यपाल ने छात्रों को कॉलेज और विश्वविद्यालय का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बताया। उन्होंने उच्च शिक्षा में राज्य की खराब स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यपाल ने शिक्षा के साथ-साथ चरित्र निर्माण, नैतिकता और अनुशासन को भी महत्वपूर्ण बताया।
कुलाधिपति ने अपने 16 वर्ष के कार्यकाल में केवल तीन दीक्षांत समारोह होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों को नियमित कक्षाओं का संचालन करते हुए समय पर परीक्षा और डिग्री प्रदान करने का निर्देश दिया। एनपीयू को भी अपना एकेडमिक कैलेंडर दुरुस्त करने को कहा गया।
विश्वविद्यालय के अधीन 50 महाविद्यालय संचालित
समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, सांसद बीडी राम, कालीचरण सिंह और पूर्व स्पीकर इंदर सिंह नामधारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कुलपति दिनेश कुमार सिंह ने अपने प्रतिवेदन में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और नई योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के अधीन 50 महाविद्यालय संचालित हैं और छात्रों की सुरक्षा व बेहतरी के लिए सीसीटीवी, वाईफाई, स्मार्ट क्लास जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं।
इसी दौरान, दीक्षांत समारोह में कथित अव्यवस्था और कुलपति के ‘भ्रष्ट आचरण’ को लेकर छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया और कार्यक्रम का बहिष्कार किया। विरोध प्रदर्शन के दौरान वाईजेकेएसएफ और आजसू के आधा दर्जन छात्र नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
वाईजेकेएसएफ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध राज्यपाल या दीक्षांत समारोह के खिलाफ नहीं, बल्कि एनपीयू कुलपति के कथित भ्रष्ट आचरण और कार्यक्रम की अव्यवस्था को लेकर था। जेसीएम, एबीवीपी, एनएसयूआई समेत अन्य छात्र नेताओं ने भी इस पर नाराजगी व्यक्त की। छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि तृतीय दीक्षांत समारोह के नाम पर लाखों रुपए की बर्बादी की गई, पीने के पानी और सीटों की व्यवस्था ठीक नहीं थी और खाने के पैकेट के खर्च में भी अनियमितता थी। उन्होंने कुलपति पर इस ‘ऐतिहासिक कार्यक्रम’ को ‘फ्लॉप’ करने का आरोप लगाया।
