मुख्य बातें

चिदंबरम बोले- ऑपरेशन ब्लू स्टार ‘गलत तरीका’ था: इंदिरा गांधी ने उस गलती की कीमत जान देकर चुकाई, ये फैसला केवल उनका नहीं था

चिदंबरम बोले- ऑपरेशन ब्लू स्टार ‘गलत तरीका’ था:  इंदिरा गांधी ने उस गलती की कीमत जान देकर चुकाई, ये फैसला केवल उनका नहीं था


  • Hindi News
  • National
  • Chidambaram Said Operation Blue Star Was The Wrong Approach Former Pm Indira Gandhi

कसौली6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

पी. चिंदबरम दो बार कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। फाइल-फोटो

पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, ‘जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से उग्रवादियों को बाहर निकालने के लिए चलाया गया ऑपरेशन ब्लू स्टार ‘गलत तरीका’ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई। हालांकि, यह फैसला अकेले इंदिरा गांधी का नहीं था।’

ऑपरेशन ब्लू स्टार पर बीते 6 महीने दूसरी बड़ा बयान आया है। इससे पहले 4 मई को कांग्रेस नेता राहुल गांधी का एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें वे कहते नजर आए थे कि 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार गलती थी। जो भी गलतियां 80 के दशक में कांग्रेस से हुईं, मैं जिम्मेदारी लेने को तैयार हूं।

खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल हुए थे चिंदबरम

दरअसल, पी. चिदंबरम शनिवार को हिमाचल प्रदेश के कसौली पहुंचे थे। यहां ‘खुशवंत सिंह लिटरेचर फेस्टिवल’ में पत्रकार हरिंदर बावेजा की किताब ‘They Will Shoot You, Madam’ की चर्चा में शामिल हुए। बावेजा के कमेंट- इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के अपने फैसले की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।

इस पर चिदंबरम ने कहा था था …

QuoteImage

किसी सैन्य अधिकारी का अपमान किए बिना मैं कहना चाहता हूं कि स्वर्ण मंदिर को वापस पाने का वह गलत तरीका था। कुछ साल बाद हमने बिना सेना के उसे वापस पाने का सही तरीका दिखाया। ब्लू स्टार गलत तरीका था और मैं मानता हूं कि श्रीमती गांधी ने उस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई।

QuoteImage

चिदंबरम बोले- पंजाब की असली समस्या उसकी आर्थिक स्थिति

चिदंबरम में बुक की चर्चा के दौरान कहा कि मेरे पंजाब दौरों के दौरान मुझे महसूस हुआ कि खालिस्तान या अलगाव की राजनीतिक मांग अब लगभग खत्म हो चुकी है। आज की मुख्य समस्या आर्थिक है… सबसे अधिक अवैध प्रवासी पंजाब से ही हैं।

सिख दंगों में 3 हजार से ज्यादा सिख मारे गए: सरकारी आंकड़ा

1 जनवरी 1983 को अमृतसर के गुरुनानक निवास में अपने हथियारबंद लोगों के साथ भिंडरावाले (बीच में)।

1 जनवरी 1983 को अमृतसर के गुरुनानक निवास में अपने हथियारबंद लोगों के साथ भिंडरावाले (बीच में)।

  • जरनैल सिंह भिंडरावाले सिखों के कट्टर धार्मिक समूह दमदमी टकसाल का प्रमुख था। 13 अप्रैल 1978 को बैसाखी के दिन निरंकारी समुदाय का समागम हुआ। इस जुलूस के विरोध में भिंडरावाले ने दरबार साहिब के पास परंपरागत सिखों की सभा बुलाई और जोरदार भाषण दिया।
  • इसके बाद अखंड कीर्तनी जत्था और दमदमी टकसाल के लोगों का एक जुलूस निरंकारियों की तरफ बढ़ा। झड़प में 13 सिख और 2 निरंकारी मारे गए। 24 अप्रैल 1980 को निरंकारी पंथ प्रमुख गुरबचन सिंह की दिल्ली में उनके घर पर हत्या कर दी गई। अगले ही साल पंजाब केसरी के संस्थापक और संपादक लाला जगत नारायण की हत्या हुई। इन हत्याओं का आरोप भिंडरावाले और उसके नए पॉलिटिकल फ्रंट ‘दल खालसा’ पर था।
  • 1982 में भिंडरावाले ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से सटे गुरु नानक निवास को अपना ठिकाना बना लिया। मंदिर के ठीक सामने अकाल तख्त है। यहीं से भिंडरावाले सिखों के लिए कट्टर उपदेश और आदेश जारी करने लगा था।
  • केंद्र की कांग्रेस सरकार ने 82 से 84 तक कई बार भिंडरावाले को पकड़ने की कोशिश की थी, लेकिन नाकाम रही। अप्रैल 1983 में DIG एएस अटवाल की स्वर्ण मंदिर के कैंपस में सरेआम हत्या हुई थी। जिसके बाद स्थिति बिगड़ती देख, अक्टूबर 1983 में पंजाब की विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
  • दिसंबर 1983 में भिंडरावाले अकाल तख्त में जा घुसा। 27 मई 1984 को शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने भी भिंडरावाले को समझाने की कोशिश की थी, लेकिन जब कोशिशें नाकाम हुईं, तो मिलिट्री ऑपरेशन का ही रास्ता बचा।
  • सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस पूरे ऑपरेशन में 300 से 400 लोगों की मौत हुई, जबकि 90 सैनिक शहीद हुए। हालांकि चश्मदीद और मामले को करीब से देखने वाले लोगों की मानें तो करीब 1000 लोग मारे गए और 250 जवान शहीद हुए थे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर में (बाएं से दाएं) मेजर जनरल कुलदीप बरार, जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी और थल सेनाध्यक्ष जनरल ए एस वैद्य। ऑपरेशन लीड करने वाले तीन प्रमुख ऑफिसर्स में से दो सिख थे- स्वर्ण मंदिर में घुसने वाली फौज के कमांडर बरार और लेफ्टिनेंट जनरल रंजीत सिंह दयाल। इन दोनों ने जनरल सुंदर जी के साथ मिलकर पूरा प्लान बनाया था।

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद स्वर्ण मंदिर परिसर में (बाएं से दाएं) मेजर जनरल कुलदीप बरार, जनरल कृष्णस्वामी सुंदरजी और थल सेनाध्यक्ष जनरल ए एस वैद्य। ऑपरेशन लीड करने वाले तीन प्रमुख ऑफिसर्स में से दो सिख थे- स्वर्ण मंदिर में घुसने वाली फौज के कमांडर बरार और लेफ्टिनेंट जनरल रंजीत सिंह दयाल। इन दोनों ने जनरल सुंदर जी के साथ मिलकर पूरा प्लान बनाया था।

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *