पानीपत में फैक्ट्री से धुआं निकलता हुआ।
पानीपत में दीवाली की रोशनी के साथ हवा में फिर से धुआं घुलने लगा है। शहर में फैक्ट्रियों का धुआं और पटाखों कर प्रदूषण हर साल लोगों की सांसों पर बोझ बढ़ा देते हैं। स्थिति यह है कि दिवाली के बाद पानीपत का एक्यूआई (AQI) लगातार 5 सालों से बहुत खराब श्रेणी
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दीवाली पर हर साल किस तरह बढ़ा प्रदूषण।
हवा ठंडी और स्थिर रहने से धूल और धुआं नीचे जम जाता है, जिससे सांस लेने में परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने बताया कि शहर के सेक्टर 25, रिफाइनरी क्षेत्र, सिवाह और समालखा रोड पर हवा की गुणवत्ता हर साल दीवाली के बाद सबसे खराब स्तर पर दर्ज की जाती है। इस साल भी इसके आंकड़े फिर लोगों के लिए परेशानी बनेंगे।

पानीपत के चांदनी बाग थाना के पास मैदान में पड़ा कूडा जलता हुआ।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग का बयान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आरओ भूपेंद्र चहल ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी विभाग ने फैक्ट्रियों को उत्सर्जन सीमित रखने के आदेश जारी किए हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में निरीक्षण बढ़ाया गया है। इसके अलावा स्कूलों और बाजारों में ग्रीन दिवाली अभियान चलाया जा रहा है। लोग पटाखों का कम उपयोग करें। उन्होंने बताया कि इस बार प्रशासन द्वारा दीवाली की रात को अभियान चलाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

पानीपत में औद्योगिक क्षेत्र में लगी फैक्ट्री से निकलता धुआं।
डॉक्टर बोले, सांस के मरीज बढ़ जाते हैं सिविल अस्पताल की डॉ. नेहा बंसल ने बताया कि दीवाली के बाद सांस की तकलीफ, खांसी, एलर्जी और सीने में जलन के मरीज बढ़ जाते हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को तुरंत असर होता है। प्रदूषण में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों तक पहुंचकर लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पहले से हृदय या श्वसन संबंधी समस्या है। वह दीवाली की रात और अगले दो दिन विशेष सावधानी रखनी चाहिए। इस समस्या से परेशान लोगों को गुनगुना पानी पीना चाहिए।

खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
