हरियाणा के यमुनानगर में शुक्रवार सुबह डिलीवरी के दौरान जच्चा बच्चा की मौत हो गई। परिजनों मामले में डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
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सूचना मिलते ही जगाधरी सिटी थाना पुलिस और डीएसपी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। मगर, परिजन डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ गए।
करीब एक घंटे तक हंगामा चला। इसके बाद परिजन पुलिस की ओर से दिए गए कार्रवाई के आश्वासन पर शांत हुए। पुलिस ने जच्चा और बच्चे के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल यमुनानगर में पहुंचाया। वहीं, डॉक्टर का आरोप है कि मृतका के परिजनों ने उनके अस्पताल में तोड़फोड़ की।
मृतका की पहचान 28 वर्षीय कोमल पत्नी अनूप निवासी अशोक विहार के रूप में हुई है। उसकी शादी को दस साल हो चुके थे, लेकिन कोई संतान नहीं थी। लंबे ट्रीटमेंट के बाद कोमल का यह पहला बच्चा था।
अस्पताल में विलाप करते हुए मृतका कोमल के परिजन।
डॉक्टरों का परिजनों पर तोड़फोड़ करने का आरोप उधर, डॉक्टर ने कोमल के परिजनों पर अस्पताल में तोड़फोड़ का इल्जाम लगाया है। इस दौरान अस्पताल परिसर में प्लैसेंटा भी पड़ा मिला। इसके बारे भी डॉक्टर का आरोप है कि इसे कोमल के परिजन मेडिकल वेस्ट से निकालकर लाए और यहां पर फेंका है।
वहीं, कोमल के परिजनों का कहना है कि यह मांस का टुकड़ा अस्पताल स्टाफ की ओर से यहां फेंका गया, ताकि उनके ऊपर झूठी कार्रवाई करा सकें। पुलिस द्वारा मांस के टुकड़े को भी कब्जे में लेकर जांच के लिए पोस्टमॉर्टम रूम में पहुंचाया गया है।

अस्पताल परिसर में पड़ा मिला प्लैसेंटा।
यहां जानिए मृतका कोमल के परिजनों ने क्या-क्या बताया…
10 साल बाद घर आनी थी खुशियां कोमल की शादी को 10 साल हो चुके थे, लेकिन अभी तक कोई संतान नहीं थी। लंबे ट्रीटमेंट के बाद अब घर में खुशियां आने वाले वाली थीं, लेकिन सब कुछ गम में तबदील हो गया। परिजन रोते हुए डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
कोमल के देवर रविंद्र ने बताया कि 9 माह पूरे होने पर गुरुवार की शाम करीब छह बजे उसकी भाभी को अस्पताल में दाखिल कराया गया था। इस दौरान डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड किया, जिसमें जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ पाए गए।

मृतका के देवर रविंद्र जानकारी देते हुए।
रात को लगी उल्टियां, कोई चेक करने नहीं आया देवर रविंद्र ने बताया कि सुबह करीब साढे तीन बजे उसकी भाभी को उल्टियां होने लगी। इस बारे उन्होंने स्टाफ को बताया, लेकिन कोई भी जांच करने के लिए नहीं आया। आरोप है कि इस दौरान अस्पताल का स्टाफ सो रहा था। उन्हें बस यही कहा गया कि दर्द तो होगा ही।
रविंद्र ने बताया कि सुबह चार बजे उसकी भाभी को डिलीवरी के लिए अंदर लेकर गए। इसके बाद डॉक्टर ने बाहर आकर कहा कि वह बच्चा नहीं बचा पाए। ऐसे में डॉक्टर को कहा कि बच्चे की मां को बचा लीजिए। इसके बाद स्टाफ उन्हें बोलता रहा कि पेशेंट कोमल ठीक है।

अस्पताल में हंगामा करते मृतका के परिजन।
आधे घंटे बाद बताया, कोमल की मौत हो गई देवर रविंद्र ने बताया कि करीब आधा घंटे बाद डॉक्टर ने बाहर आकर उन्हें बताया कि कोमल की भी मौत हो चुकी है। कोमल के दूसरे देवर ईशांत ने बताया कि जब उन्होंने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया, तो स्टाफ से मेडिकल वेस्ट से प्लैसेंटा अस्पताल परिसर में गिरा दिया और इल्जाम हमारे ऊपर लगा दिया, ताकि मामले को डायवर्ट किया जा सके।
सुबह मृतका के सभी परिजन अस्पताल परिसर में एकत्रित हो गए और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जोरदार हंगामा किया। हंगामे की सूचना मिलते ही जगाधरी सिटी थाना से पुलिस मौके पर पहुंची और डीएसपी राजीव मिगलानी भी मौके पर आए।

सूचना पाकर पहुंचे डीएसपी राजीव मिगलानी।
करीब एक घंटे चला हंगामा, पुलिस के समझाने पर माने पुलिस द्वारा हंगामा कर रहे परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। करीब एक घंटे के हंगामे के बाद डीएसपी ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया तो परिजन शांत हुए। इसके बाद ही पुलिस ने जच्चा और बच्चा का शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल यमुनानगर में भिजवाया।
साथ ही अस्पताल परिसर में पड़े प्लैसेंटा को भी जांच के लिए अस्पताल पहुंचाया।

इशान अस्पताल से डॉ. शैली गोयल जानकारी देते हुए।
यहां जानिए परिजनों के आरोप पर लेडी डॉक्टर ने क्या कहा…
- कोमल को सांस चढ़ने लगा, बच्चे की धड़कन नहीं मिल रही थी : इशान अस्पताल से डॉ. शैली गोयल ने कहा कि लेबर पेन के साथ पेशेंट को एडमिट किया गया था, पेशेंट बिल्कुल ठीक थी। रात करीब साढे तीन बजे पेशेंट बाथरूम गई। इसके बाद उसे सांस चढ़ने लगे, वह तुरंत उसे चेक करने के लिए आईं। ऐसे में बच्चे की धड़कन भी नहीं मिल रही थी। एक दम से डिलीवरी हुई है।
- हमनें पेशेंट को बचाने की पूरी कोशिश की : डिलीवरी के साथ ही बच्चे के आसपास जो पानी होता है, वह साथ के साथ फेफड़ों में चला गया। यह किसी भी कंडीशन में हो सकता है। हजार में से एक केस में ऐसा होता है। इसे पता लगाने के लिए कोई टेस्ट नहीं है, जिससे कि यह कंडीशन पहले पता लग सके। हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन पेशेंट को नहीं बचा सके।

डीएसपी राजीव मिगलानी जानकारी देते हुए।
पोस्टमॉर्टम के बाद होगी आगामी कार्रवाई- डीएसपी उधर, इस मामले में डीएसपी राजीव मिगलानी ने बताया कि डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा की माैत हो गई। उसके परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर ने इलाज में लापरवाही की। डेडबॉडी का पोस्टमॉर्टम कराया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल परिजनों को शांत कराया। मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।
