कचरा केंद्र में पढ़ाई कर रहे बच्चे।
जमुई जिले के खैरा प्रखंड के भीमाइन पंचायत स्थित भोजपुर गांव में मनरेगा के तहत निर्मित अवशिष्ट प्रसंस्करण इकाई (WPU) अब बच्चों की अस्थायी कक्षा में बदल गई है। इस केंद्र का मूल उद्देश्य गांव में गीले और सूखे कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करना था, लेकिन वर
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कूड़े के लिए बनाया गया केंद्र
जानकारी के अनुसार यह प्रसंस्करण केंद्र पिछले दो से तीन महीनों से अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुका है, जहां कचरे की छंटाई और प्रबंधन होना चाहिए था, वहीं अब छोटे बच्चे फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

कूड़े की जगह बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह भवन लंबे समय से बंद पड़ा था और प्रशासन की उदासीनता के कारण इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा था। गांव में अध्ययन के लिए उपयुक्त जगह के अभाव में स्थानीय लोगों ने इसे कोचिंग सेंटर के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

कचरे के लिए रखा गया डब्बा।
यह स्थिति स्वच्छ भारत मिशन और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही को उजागर करती है। केंद्र की दीवारों पर स्वच्छता के नारे लिखे हैं, लेकिन अंदर कचरे की दुर्गंध, गंदगी और खुले तारों से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बना हुआ है। यहां न तो कचरा छंटाई की कोई मशीन है और न ही कोई पर्यवेक्षण कर्मचारी मौजूद है।

कचरे के लिए अलग-अलग खंड बनाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने थोड़ी भी सजगता दिखाई होती, तो यह भवन गांव में कचरा प्रबंधन की एक मिसाल बन सकता था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस इकाई को शीघ्र अपने मूल उद्देश्य से जोड़ने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
