आठ वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ने और जेल में रहने के बाद झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ते हुए अपने मन का दर्द सार्वजनिक किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि जीवन में कई मुश्किल समय आए, लेकिन अपने ही भाई नीरज सिंह की
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उन्होंने कहा कि नीरज सिर्फ उनके भाई नहीं, बल्कि बचपन से राजनीतिक सफर तक उनके सबसे करीबी साथी थे। ऐसे व्यक्ति की हत्या में उनका नाम जुड़ जाना उनकी कल्पना से भी बाहर था और इस घटना ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया।
हमने की थी सीबीआई जांच की मांग
संजीव सिंह ने बताया कि शुरुआत से ही उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी, ताकि सच्चाई उजागर हो सके। इसके लिए उन्होंने 2019 में न्यायालय का रुख भी किया था, लेकिन याचिका दो साल तक लंबित पड़ी रही।
2023 में अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा, जिस पर सरकार ने सीबीआई जांच की जरूरत से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में सच्चाई सामने आने में बेहद देर हुई, लेकिन अदालत ने अंततः उन्हें बरी कर न्याय किया।
परिवार राजनीति में सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं
अपनी पीड़ा साझा करते हुए संजीव सिंह ने बताया कि 2017 में जेल जाने के समय उन्होंने अपनी पत्नी रागिनी सिंह से कहा था कि वे जनता के बीच बनी रहें और जनसेवा का कार्य जारी रखें। उन्होंने कहा कि उनका परिवार राजनीति में सिर्फ चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेवा के उद्देश्य से आया है। यही कारण रहा कि रागिनी सिंह झरिया की विधायक के रूप में लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहीं और जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाए रखी।
संजीव सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी ने कठिन परिस्थितियों में भी परिवार और राजनीतिक जिम्मेदारियों को संभाला। उन्होंने कहा हमारी राजनीतिक संस्कृति संघर्ष से उपजी है। जनसेवा हमारा मूल उद्देश्य है और परिवार ने हमेशा इसी राह को चुना है।
भविष्य की रणनीति स्वास्थ्य पर निर्भर
नगर निगम चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वे स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। स्वास्थ्य ठीक होने के बाद ही वे आगे की राजनीतिक रणनीति तय करेंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी पीड़ा दोहराते हुए कहा कि हम पांच भाई और 13 बहनें हैं। इतने बड़े परिवार में हत्या का आरोप लगना मेरे लिए असहनीय था। आज तक नहीं समझ पाया कि मुझे ही क्यों आरोपी बनाया गया।
2017 में हुई थी पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या
गौरतलब है कि 2017 में झरिया के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह सहित चार लोगों की हत्या हुई थी। इस मामले में संजीव सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया था, लेकिन आठ साल की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
