स्केटिंग के जरिए पांच तख्तों की यात्रा को पूरी करते हुए पुनीत।
पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के रहने वाले पुनीत इन दिनों चर्चा में है। चर्चा इसलिए कि उन्होंने 10 हजार किलोमीटर चलने का रिकॉर्ड बनाया है, वो भी स्केट्स के जरिए। उनकी इस यात्रा की खास बात यह भी रही कि यह यात्रा उसने सिखी बाणे में पूरी की।
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पुनीत की इस उपलब्धि के पीछे लंबे संघर्ष की कहानी भी है। वे बताते हे कि जब दो साल का था तो मां को खो दिया, पिता ने दूसरी शादी कर ली। मैं दादा-दादी के पास रह गया। उन्होंने ही मुझे पाल-पोसकर बड़ा किया।
जब छठी क्लास में आया तो अचानक स्केटिंग से लगाव हुआ। मगर, न तो हमारे इलाके में स्केट मिलते थे और न ही स्केटिंग सिखाने वाला था। घर के हालात भी इतने अच्छे नहीं थे कि परिवार के सामने यह ख्वाहिश रख सकूं।
मगर, मन में तय कर लिया था कि मुझे स्केटिंग में कुछ करना है। किसी तरह सेविंग करके पैसे-पैसे जुटाए और खुद ही स्केटिंग शुरू की। कई बार गिरा, लेकिन डरा नहीं। खून भी बहा, फिर भी डरा नहीं। जैसे ही स्केटिंग में माहिर हुआ तो पांचों तख्तों की यात्रा दस हजार किलोमीटर स्केटिंग से पूरी कर एक रिकॉर्ड बनाया।
पुनीत का कहना है कि अब उसके दो सपने हैं। एक ओलिंपिक खेलना और दूसरा गुरुद्वारा पत्थर साहिब तक स्केट्स से जाना। अब वह इन दोनों सपनों को पूरा करने में जुटा है।
पंजाब के सुल्तानपुर लोधी के रहने वाले पुनीत पांच तख्तों की यात्रा स्केटिंग से ही की।

यात्रा के दौरान जहां जगह मिलती, वहीं रात गुजार लेते थे।

विभिन्न संस्थाओं की ओर से पुनीत को सम्मानित किया गया।
पुनीत के संघर्ष की कहानी 5 पॉइंट में…
स्केट खरीदने के लिए मजदूरी तक की : पुनीत ने बताया कि वह अब 19 साल के हैं। छठी क्लास से स्केटिंग शुरू की थी। मगर, स्केटिंग आसान नहीं थी, क्योंकि उनके दादा-दादी इतने अमीर नहीं थे कि वे उसे स्केट खरीदकर दे सकें। दादा राज मिस्त्री थे। घर का गुजारा भी मुश्किल से चलता था। ऐसे में उसने भी छठी क्लास के बाद उनके साथ काम पर जाना शुरू कर दिया था। स्कूल में छुट्टी वाले दिन दादा के साथ काम पर जाने से जो मजदूरी उसे मिलती थी, उसे वह सेव कर लेता था।
पड़ोसियों के घर छुपाकर रखे स्केट : पुनीत ने बताया कि अपनी ख्वाहिश की घरवालों को भनक तक नहीं लगने दी कि उसे स्केटिंग का शौक है। एक दिन खुद के पैसे से स्केट खरीद लिए। मगर, कोच 120 किलोमीटर दूरी पर मिल सकता था। ऐसे में खुद ही स्केटिंग शुरू कर दी। घरवालों को पता न लगे, इसलिए स्केट दोस्तों के घर में छिपाकर रखता था। सुबह जब सारे घर वाले सो रहे होते थे तो वह स्केटिंग करने निकल जाता था।
स्केटिंग में एक्सपर्ट हुआ तो यात्रा शुरू की : पुनीत बताते है कि जब स्केटिंग में पूरी तरह एक्सपर्ट हो गया तो तय किया कि पांचों तख्तों की यात्रा करनी है। ऐसे में मार्च महीने में अकेले घर से बैग उठाकर निकल पड़ा। सफर चुनौतियों भरा रहा, लेकिन जिस भी शहर में जाता था, वहां के लोग उसके प्रयास की सराहना करते थे। वह सड़क किनारे टेंट लगाकर रात काटता था। कई बार खाना खा लेता था, नहीं तो अगले दिन आगे बढ़ जाता था।
सिखी पहनावे में पूरी की यात्रा : पुनीत कहते है कि यात्रा की खास बात यह भी रही कि यह यात्रा उसने सिखी बाणे में पूरी की। इससे युवा पीढ़ी को संदेश देने की कोशिश की गई कि वे अपनी संस्कृति से जुड़े रहें। वह हमेशा चाहते हैं कि पंजाब के युवा दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत बनें। वह पंजाब में जो भी आंदोलन चलते है, उसमें शामिल होते है।

स्कूली बच्चों के साथ अपने स्केटिंग का हुनर दिखाते पुनीत।
पुनीत का आगे का सफर क्या….
जिला गेम्स नहीं खेल पाया, ओलिंपिक की तैयारी पुनीत के मुताबिक, उसने दो बार जिला गेम्स में खेलने की कोशिश की, लेकिन एंट्री नहीं मिल पाई। हालांकि इस यात्रा ने उसके अंदर एक नया विश्वास पैदा किया। अब उसके दो सपने हैं — एक तो लेह लद्दाख में गुरुद्वारा पत्थर साहिब तक स्केटिंग से जाना और दूसरा स्केटिंग में ओलिंपिक खेलना। इसके लिए वह 90 हजार रुपए के स्केट खरीदने जा रहा है। पुनीत का कहना है कि वह इन दोनों सपनों को हर हाल में पूरा करेगा।
अपने रिकॉर्ड को दर्ज करवाऊंगा पुनीत ने बताया कि बताया कि 10 हजार किलोमीटर स्केट्स के जरिए पांच तख्तों की यात्रा आज तक किसी ने नहीं की। यह उसका रिकॉर्ड है। पहले उसे पता नहीं था कि वह अपने काम को दर्ज कैसे करवाए। इसके लिए अब उन्होंने प्रोसेस शुरू कर दी है। भविष्य में अब जो भी काम वह करेगा, उसे रिकॉर्ड पर लेकर आएगा।
