लक्ष्मगणढ़ कस्बे में आमसभा में छात्र के परिजन, ग्रामीण व बीजेपी के नेतागण।
रूस में MBBS छात्र अजीत चौधरी की मौत के बाद आठवें दिन शव का पोस्टमार्टम हुआ और उससे पहले करीब 19 दिन में शव मिला था। अब शव कब तक आएगा। कुछ सुनिश्चित नहीं है। इधर, छात्र की मां की तबीयत अधिक बिगड़ चुकी है। छात्र के शव को लाने में हाे रही देरी को लेकर ल
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छात्र अजीत चौधरी के चाचा भोम सिंह ने आमसभा में कहा कि हमारे बेटे ने सुसाइड किया या किसी ने मारा है। हमें न्याय नहीं चाहिए। हमारी डैड बॉडी चाहिए। रूस से हमारे किस बात के अच्छे संबंध हैं। जो हमारे बेटे की डैड बॉडी नहीं दे रहे हैं। अलवर के नेताओं केा लेकर कहा कि 6 नवंबर को भी हमारे नेता बोलकर गए थे कि जल्दी शव लेकर आएंगे। बार-बार झूठा आश्वासन देते हैं। हमारे समाज के कुछ लोग बीजेपी का दबाव मान रहे हैं। हम अभी पांच-सात दिन इंतजार कर लेंगे। चाहे छात्र का पिता मरे या मां मरे। लेकिन 9 दिन में पोस्टमार्टम हुआ है। हमें लग नहीं रहा है कि अगले 5 दिन में भी शव आ सकेगा। अभी शव को ऊफा से मास्को भेजा जाएगा। ये केवल आश्वासन देते हैं। दूतावास जो बताते हैं वो मैसेज तो सबका पता है। सरकार कुछ नहीं कर रही। सरकार से ज्यादा तो प्रेम भंडारी मदद कर रहे हैं।
लक्ष्मणगढ़ कस्बे में आमसभा में मौजूद ग्रामीण। यहां परिजनों ने गुस्सा जाहिर किया।
जिला प्रमुख ने कहा दूतावास ने 5 दिन का समय दिया
जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर ने सभा में कहा कि दूतावास चार से 5 दिन का समय दे रहा है कि इतने समय में शव आ जाएगा। ये आखिरी बात हुई है। कल रात को भी हमारी बात हुई है। सामाजिक राजनीति नहीं करना चाहते हैं। हम रात साढ़े 11 बजे तक लगे हुए थे। हम सब समस्या का समाधान चाहते हैं।

आमसभा में जिला प्रमुख बलवीर छिल्लर जानकारी देते हुए।
जानिए छात्र अजीत चौधरी कब लापता हुआ और शव मिला
लक्ष्मणगढ़ के कफनवाड़ा गांव निवासी छात्र अजीत चौधरी 19 अक्टूबर को लापता होने के 19 दिन बाद 6 नवंबर को रूस में शव मिला था। उसके बाद 13 नवंबर की रात को पोस्टमार्टम हुआ है। अब शव कब तक आए कुछ सुनिश्नित नहीं है। इस कारण लक्ष्मणगढ़ कस्बे में दूसरे दिन भी आमसभा हुई है। गुरुवार को कस्बे के बाजार व स्कूल कॉलेज बंद कर विरोध जताया गया था।
छात्र के शव को भारत लाने के लिए एसोसिएशन करेगा पैसा खर्च
छात्र के शव लाने में होने वाले खर्च को लेकर प्रेम भंडारी पहले ही कह चुके थे, कि सरकारी फंड से इंतजाम नहीं होगा तो उनकी एसोसिएशन से पैसा खर्च किया जाएगा। लेकिन कई दिनों की मशक्कत के बाद आखिर शव का पोस्टमार्टम हो गया है। अब शव को भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
