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नसबंदी के बाद 2 महिलाओं की मौत..पीड़ित-परिवार से मिले कांग्रेसी: अस्पताल ने दवा रिएक्शन बताया, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया – durg-bhilai News

नसबंदी के बाद 2 महिलाओं की मौत..पीड़ित-परिवार से मिले कांग्रेसी:  अस्पताल ने दवा रिएक्शन बताया, परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया – durg-bhilai News


दुर्ग जिला अस्पताल में नसबंदी और प्रसूति सर्जरी के दौरान दो महिलाओं की मौत मामले में कांग्रेस के जांच समिति के सदस्यों ने 17 नवंबर को पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। सदस्यों ने सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज से घटना की पूरी जानकारी ली।

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अस्पताल ने इसे दवा का रिएक्शन बताया है वहीं परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया। डॉ. मिंज ने बताया कि मौतों की जांच के लिए तीन अलग-अलग समितियां गठित की गई हैं। इनमें दवा और एनेस्थीसिया से जुड़े पहलुओं, बिसरा रिपोर्ट व केमिकल एनालिसिस, और ऑपरेशन थिएटर में संभावित लापरवाही की जांच शामिल है।

1 महीने बाद आएगी रिपोर्ट

सिविल सर्जन के अनुसार, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में “फेफड़ों में पानी भरने” की स्थिति बताई गई है। बिसरा रिपोर्ट एक माह में आने के बाद मौत का अंतिम कारण स्पष्ट हो पाएगा। उन्होंने समिति को निष्पक्ष जांच और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया

कांग्रेस जांच समिति का नेतृत्व पूर्व मंत्री अनिला भेड़िया कर रही हैं। सदस्यों ने सिकोला भाटा पहुंचकर किरण यादव के परिवार से मुलाकात की। परिजनों ने बताया कि महिला को सुबह 9 बजे सिजेरियन और नसबंदी के लिए ले जाया गया था, लेकिन दोपहर 3 बजे तक कोई सूचना नहीं दी गई।

इसके बाद अचानक परिवार को आईसीयू में भर्ती होने की जानकारी दी गई और मात्र आधे घंटे बाद महिला की मौत की सूचना दे दी गई। परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है।

परिजनों का साफ आरोप है- किरण बिल्कुल स्वस्थ थी, बच्चे का जन्म भी सामान्य हुआ। डॉक्टरों ने लापरवाही की, इसलिए उसकी मौत हुई।

डॉक्टरों पर तुरंत जानकारी नहीं देने का आरोप

इसके बाद समिति के सदस्य बजरंग नगर पहुंचे, जहां पूजा यादव के परिजनों ने भी यही कहा पूजा चार दिन पहले गर्भपात करवा चुकी थी, तब सब सामान्य था। नसबंदी के लिए ले जाने के बाद झटके और अकड़न की बात बताई गई, लेकिन अस्पताल ने तुरंत जानकारी नहीं दी।

पूर्व मंत्री भेड़िया ने कहा कि हम परिजन जो कह रहे हैं, उसे ही प्राथमिक सत्य मानते हैं, क्योंकि अब तक सरकार और स्वास्थ्य विभाग ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई है।

अस्पताल प्रबंधन का दावा – दवा का रिएक्शन हुआ

8 नवंबर को जिला अस्पताल के मदर-चाइल्ड यूनिट में कुल 9 सर्जरी हुई थीं। 8 सीजर और 1 केवल नसबंदी। सिविल सर्जन के अनुसार, दोनों मृत महिलाओं को बुपीवाकेन, मिडाजोलम, RL और ऑक्सीटोसीन जैसी दवाएं दी गई थीं। इंजेक्शन लगने के तुरंत बाद ही तेज झटके और शरीर में अकड़न जैसे लक्षण दिखे।

बाकी 7 महिलाएं बिल्कुल स्वस्थ हैं, इसलिए डॉक्टरों ने माना है कि यह सामान्य लापरवाही नहीं बल्कि दवा का रिएक्शन है। अस्पताल ने कहा कि अंतिम निष्कर्ष बिसरा रिपोर्ट और तीन सदस्यीय पैनल की जांच के बाद ही सामने आएगा।

कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी

अनिला भेड़िया ने कहा इतनी बड़ी घटना हो जाती है, लेकिन न स्वास्थ्य मंत्री बोल रहे, न सरकार। न शहर के और न ग्रामीण क्षेत्र के विधायक परिवारों से मिलने आए। स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है और यही नई सरकार की ‘मोदी गारंटी’ है।

उन्होंने कहा कि यादव समाज भी आंदोलन की तैयारी कर रहा है। अगर न्याय नहीं मिला, कार्रवाई नहीं हुई, तो कांग्रेस और समाज मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

8 नवंबर की घटना, ICU में दोनों की मौत

दरअसल घटना 8 नवंबर की है। जब जिला अस्पताल में नसंबदी कराने आई 2 महिलाओं की मौत हो गई। दोनों महिलाओं की हालत ऑपरेशन थिएटर में ही बिगड़ी। अकड़न, झटके और सांस की दिक्कतें एक जैसे लक्षण थीं, जो करीब- करीब एक ही समय में दोनों मरीजों में दिखीं।

अस्पताल का दावा है कि पूरा प्रोटोकॉल फॉलो किया गया, लेकिन परिजन इसे झूठ बताते हुए कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

जांच जारी-फाइनल रिपोर्ट का इंतजार

स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित टीम अभी भी जांच में लगी है। फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है। अस्पताल का कहना है कि “जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।”परिजन और कांग्रेस जांच समिति इसे “केस ऑफ मेडिकल नेग्लिजेंस” मान रही है।



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