बद्रीनाथ धाम में इस साल 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे हैं।
उत्तराखंड का बद्रीनाथ धाम अब सिर्फ तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि जल्दी ही एक स्मार्ट आध्यात्मिक सिटी के रूप में विकसित होगा। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और मौजूदा सुविधाओं की कमी को देखते हुए ₹481 करोड़ की लागत से तैयार मास्टर प्लान के तहत यहां पर तेजी से न
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अभी बद्रीनाथ में संकरी गलियां, अव्यवस्थित पार्किंग, सार्वजनिक सुविधाओं की कमी और यातायात जाम जैसी समस्याएं आम हैं। मास्टर प्लान का उद्देश्य है इन समस्याओं को दूर करना और धाम को आने वाले 50 सालों के लिए सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाना।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि बद्री-केदार धाम के विकास पर पीएम नरेंद्र मोदी विशेष ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा-
पीएमओ इस प्रोजेक्ट की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। हमारी सरकार भी नियमित समीक्षा कर रही है। मैं स्वयं मौके पर जाकर प्रगति देखता हूं। मुख्य सचिव और गढ़वाल आयुक्त भी समय-समय पर जाकर कार्य की गुणवत्ता और स्थानीय लोगों की राय लेते हैं।


बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान का पूरा नक्शा गुजरात की कंपनी आईएनआई ने डिजाइन किया है।
पहले बद्रीनाथ धाम के मास्टर प्लान के बारे में पढ़ें….
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में 2014 में मोदी सरकार ने बद्रीनाथ मास्टर प्लान की रूपरेखा तैयार की थी। साल 2022 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ।
इस योजना में कुल 400-481 करोड़ रुपए की लागत अनुमानित है, जिसमें अब तक लगभग 200 करोड़ खर्च हो चुके हैं। पहले चरण में मंदिर के आसपास की सड़कों का विस्तार, एराइवल प्लाजा और सिविक एमेनिटी सेंटर का निर्माण, साथ ही बदरीश और शेषनेत्र झील का सुंदरीकरण किया गया।
दूसरे चरण में रिवर फ्रंट, अस्पताल और लूप रोड का निर्माण कार्य किया जा रहा है, हालांकि रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य फिलहाल रोके गए हैं, यह रोक मुख्य रूप से बद्रीनाथ मंदिर के नीचे तप्त कुंड से लेकर ब्रह्मकपाट तीर्थ तक लागू है। वहीं, अंतिम चरण में मंदिर के आसपास 75 मीटर रेडियस में सुंदरीकरण का काम होना है। इसके लिए 72 भवनों को हटाया जाना है। अभी 22 भवन स्वामियों ने भवन खाली नहीं किए हैं।

रिवर फ्रंट में निर्माण कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है।
अब समझिए नए प्लान के तहत मंदिर में क्या काम होगा
मास्टर प्लान के तहत मंदिर परिसर को पूरी तरह से नए तरीके से व्यवस्थित किया जाएगा। मंदिर के चारों ओर की गलियों को चौड़ा किया जाएगा और यातायात को सुव्यवस्थित किया जाएगा, ताकि तीर्थयात्रियों को दर्शन में कोई बाधा न हो।
अलकनंदा नदी के किनारे एक सुंदर रिवरफ्रंट और ओपन प्लाजा विकसित किया जाएगा, जो श्रद्धालुओं के अनुभव को और भी बेहतर बनाएगा। बिजली, पानी, सफाई और सार्वजनिक पार्किंग जैसी मूलभूत सुविधाओं को उन्नत किया जाएगा, जिससे धाम में आने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इस योजना का मुख्य कारण बढ़ती तीर्थयात्रियों की संख्या और धाम में जाम, गंदगी और अव्यवस्था जैसी समस्याओं को दूर करना है। इसके साथ ही, परियोजना में पर्यावरण और भूकंपीय सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

पूरा काम होने के बाद कुछ ऐसा नजर आएगा बद्रीनाथ धाम।
पूरी तरह से तैयार होने पर लोगों को मिलेगा फायदा
अगले 50 सालों में तीर्थ यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए परियोजना का भौतिक और सामाजिक बुनियादी ढांचा तीन चरणों में पूरा किया जाएगा, जो 85 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसके साथ ही बद्रीनाथ धाम के स्मार्ट आध्यात्मिक सिटी बनने के बाद पूरे धाम की तस्वीर बदल जाएगी, जिससे तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद दर्शन के लिए पर्याप्त जगह और आरामदायक व्यवस्था होगी।
संकरी गलियों और जाम की समस्या समाप्त होगी, और मुख्य मार्ग चौड़े किए जाने के कारण यातायात सुचारू रूप से चलेगा। मंदिर के आसपास के घाट, तप्त कुंड और ब्रह्मकपाट जैसी महत्वपूर्ण पूजा स्थलों तक पहुंच आसान और सुरक्षित होगी।
अलकनंदा नदी के किनारे भव्य रिवरफ्रंट और प्लाजा का निर्माण होने से श्रद्धालुओं को न केवल दर्शन में सुविधा मिलेगी बल्कि नदी किनारे मनोरम दृश्य और खुली जगहों का अनुभव भी मिलेगा। सड़कें, पैदल मार्ग और सार्वजनिक उद्यान विकसित किए जाएंगे, जिससे आने-जाने और घूमने-फिरने में आसानी होगी।

पूरे मंदिर परिसर को एक नया रूप देने के लिए काम तेजी से किया जा रहा है।

परिसर में इस साल जाड़ों में भी काम जारी रहेगा।
अब तक दर्शन कर चुके 16 लाख से ज्यादा श्रद्धालु
बद्रीनाथ के कपाट इस साल 4 मई 2025 को खुले थे और रोजाना यहां पर हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। इस साल अभी तक 16 लाख 26 हजार 791 श्रद्धालु धाम के दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले साल 2024 के 14 लाख 35 हजार 341 के रिकॉर्ड को पार कर चुका है।
वहीं, 25 नवंबर को धाम के कपाट शीतकालीन के लिए बंद कर दिए जाएंगे। प्रशासन का दावा है कि मंदिर के कपाट बंद होने के बावजूद यहां पर निर्माणकार्य होते रहेंगे, जिससे की पीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाए।
