‘पिछले 6 हफ्तों से उन्हें (इमरान खान) डेथ सेल में अकेले रखा गया है। उनकी बहनों को मिलने से रोका गया, जबकि कोर्ट ने इसकी परमिशन दी है। न कोई फोन कॉल, न मुलाकात और न उनके जिंदा होने का सबूत है। हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं है।’ – कासिम खान, पाकिस्तान के
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‘उनकी (इमरान खान) सेहत बिल्कुल ठीक है। उनकी पूरी देखभाल की जा रही है। डॉक्टरों की एक टीम है, जो उन्हें रोजाना चेक करती है। उनकी दवाओं, डाइट, सुविधाओं और एक्सरसाइज का ध्यान रखती है।’ – राणा सनाउल्लाह खान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के एडवाइजर
पाकिस्तान में इस वक्त सबसे बड़ा सवाल है कि इमरान खान कहां हैं। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में हैं। आखिरी बार 16 मई 2024 को पेशी के दौरान दिखे थे। परिवार का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और आर्मी उनके बारे में कुछ नहीं बता रही हैं।
सोशल मीडिया पर इमरान की सेहत खराब होने और हत्या की भी खबरें आईं। इमरान की तीन बहनें और समर्थक 4 दिन से जेल के बाहर डटे हैं।
इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान में हिंसा भड़क गई थी। PTI समर्थकों के गुस्से को देखते हुए फिर ऐसा होने की आशंका है। पाकिस्तान में अभी क्या चल रहा है और इमरान खान के बारे में सही खबरें क्या हैं, दैनिक भास्कर ने इस पर इमरान के वकील और एक्सपर्ट्स से बात की।
पूरा मामला कैसे शुरू हुआ मार्च, 2025 में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि इमरान खान परिवार और वकीलों से मिल सकते हैं। जेल मैनेजमेंट ने कोर्ट का आदेश नहीं माना। अक्टूबर, 2025 में कोर्ट ने दोबारा निर्देश दिया। इसके बाद भी उनकी बहनों को एक भी बार मिलने नहीं दिया गया।
26 नवंबर को सोशल मीडिया पर खबर आई कि जेल में इमरान खान की हत्या कर दी गई है। इसके बाद उनकी बहनें और समर्थक अडियाला जेल पहुंच गए। इमरान खान की बहनें नूरीन नियाजी, अलीमा और उजमा जेल के बाहर प्रदर्शन करने लगीं। इमरान की पार्टी PTI के कार्यकर्ता पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन करने लगे।

सोशल मीडिया पर इस तरह की पोस्ट वायरल हो रही हैं। इनमें दावा किया गया कि इमरान खान अब जिंदा नहीं हैं। उनकी हत्या कर दी गई है।
माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने जेल के बाहर कर्फ्यू लगा दिया। 27 नवंबर को इमरान खान का समर्थन करने अडियाला जेल पहुंचे खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी से पुलिस ने मारपीट की। इसके वीडियो भी सामने आए हैं। अफरीदी ने आरोप लगाया कि सरकार इमरान खान की हालत की सही जानकारी नहीं दे रही है। अगर इमरान खान को कुछ हुआ तो इसके नतीजे की जिम्मेदारी सरकार पर होगी।

पुलिस ने CM सोहेल अफरीदी और उनके साथ आए नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। धक्का-मुक्की के दौरान उन्हें लात-घूंसे भी मारे और जमीन पर गिरा दिया।
लीगल एडवाइजर बोले- इमरान ठीक हैं इस मसले पर हमने इमरान खान के लीगल एडवाइजर एडवोकेट फैसल चौधरी से बात की। उनसे पूछा कि इमरान खान से क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा?
वे कहते हैं, ‘इसकी कोई वजह नहीं बताई जा रही। इमरान खान की सेहत के बारे में उड़ाई जा रही अफवाह सही नहीं है। वे ठीक हैं, लेकिन परिवार और वकीलों को उनसे मिलने दिया जाए। विपक्ष के नेताओं के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, ये अच्छा नहीं है।’
सियासी तौर पर इमरान खान का कोई मुकाबला नहीं है। मौजूदा हुकूमत उनकी मशहूरियत से खौफजदा रहती है। मीडिया पर उनकी फोटो, वीडियो तक नहीं चलाई जा सकती है। इस सब के पीछे कानूनी नहीं, सियासी वजहें हैं।

‘आर्मी तय करती है, इमरान किससे मिलेंगे’ पाकिस्तान में सरकार के कामकाज को करीब से देखने वाले एक सोर्स बताते हैं, ‘इमरान खान को परिवार से न मिलने देने का फैसला सरकार का नहीं, आर्मी का है। इमरान खान से कौन मिलेगा, कौन नहीं मिलेगा, इसका फैसला आर्मी करती है।’
‘यहां फैसला लेने का हक सरकार को नहीं है, इस्टैब्लिशमेंट को है। ये इस्टैब्लिशमेंट आर्मी है। कोई आर्मी शब्द सीधा इस्तेमाल नहीं करना चाहता। इससे ऐसा मैसेज जाता है कि आर्मी का राज है, इसलिए लोग इस्टैब्लिशमेंट बोलते हैं।’

कैदियों से मुलाकातें रोकीं, वजह सिक्योरिटी बताई इमरान खान की सेहत पर जेल प्रशासन ने बयान जारी कर बताया है कि वे स्वस्थ हैं। सवाल है कि अगर सब कुछ ठीक है, तो फिर लोगों को उनसे क्यों नहीं मिलने दिया जा रहा? इसका जवाब सरकार से जुड़े एक सोर्स देते हैं।
वे कहते हैं कि सुरक्षा कारणों से अभी किसी भी कैदी से उनके परिवार को नहीं मिलने दिया जा रहा। ये सिर्फ इमरान खान का मामला नहीं है। अभी हम किसी भी कैदी को बाहरी व्यक्ति से नहीं मिलने दे रहे।’
‘हिटलर की कहानियां पाकिस्तान में सामने देख रहे’ इमरान की छोटी बहन नूरीन नियाजी पाकिस्तान की जानी-मानी राजनीतिक शख्सियत हैं। 16 साल पहले इमरान ने नई पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ बनाई, तब वे भी साथ थीं।
नूरीन कहती हैं, ‘पाकिस्तान के तानाशाह आसिम मुनीर के बारे में अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि वे हमारे दोस्त हैं। पाकिस्तान इस वक्त जुल्म के दौर से गुजर रहा है। हमने हिटलर की कहानियां पढ़ी थीं, पाकिस्तान में अब उनसे मिलती-जुलती कहानियां हैं। लोगों को पकड़कर बेसमेंट में रखा जा रहा है। कई लोगों को मार दिया गया। जुल्म की कहानियां, जो हमने पढ़ी थीं, अब वो सामने होता देख रहे हैं।’

इमरान खान की बहनें उनसे मिलने जेल गई थीं। वहीं धरने पर बैठ गईं। इसके बाद पुलिस ने उन्हें वहां से घसीटकर हटा दिया।
नूरीन कहती हैं, ‘ये इमरान की सेहत के बारे में कुछ नहीं बता रहे। पार्टी के लीडर उनसे मिलने गए, लेकिन अंदर नहीं जाने दिया। हमें मिलने नहीं दे रहे हैं। पुलिस को कहा गया है कि इमरान खान के समर्थकों के साथ जो करना है, करो।’
‘पाकिस्तान में पहले कभी औरतों के साथ इस तरह बदतमीजी नहीं हुई। पहली बार है कि वे बच्चे-बूढ़े कुछ नहीं देख रहे हैं। पुलिस को इजाजत है कि जो भी आपको दिख जाए उन्हें मारें, कोई पूछने वाला नहीं है।’
‘शहबाज शरीफ चुनाव हार गए थे, लेकिन आर्मी की वजह से सत्ता में बने हुए हैं। दूसरे मुल्क में बैठे लोगों के के पास बोलने की आजादी है। उन्हें घरों से नहीं उठाया जाएगा, परेशान नहीं किया जाएगा। बाहर बैठकर जो सोशल मीडिया पर लिख सकते हैं, जरूर लिखें।’

‘जिनके पास बंदूक नहीं, उन पर जुल्म करते रहेंगे’ नूरीन नियाजी ने कहा, ‘पाकिस्तान बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है। बाहर के लोगों को इसके बारे में बोलना चाहिए, लेकिन इंशाल्लाह हमारे लोग खुद ही उठेंगे और इसे ठीक करेंगे। पहले भी तानाशाह आए हैं। वे कितनी देर जिंदा रहेंगे। लोगों को जुल्म के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा और इनका मुकाबला करना पड़ेगा। वरना जिनके पास बंदूक नहीं है, उन पर ये हमेशा जुल्म करते रहेंगे।’
नूरीन इमरान खान की सेहत को लेकर फिक्रमंद हैं। आशंका जताई जा रही है कि आर्मी जानबूझकर उनकी सेहत बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं ताकि वे चुनौती देने की स्थिति में न रहें। नूरीन कहती हैं, ‘इमरान खान जेल के कमरे में अकेले रह रहे हैं। ये अपने आप में मुश्किल सजा है। जेल मैन्युअल के मुताबिक आप 4 दिन से ज्यादा किसी को आइसोलेट नहीं कर सकते।’
‘इमरान खान को कई हफ्तों से आइसोलेट करके रखा गया है। किताब, अखबार, टीवी, सब बंद कर दिया है। किसी को कुछ नहीं पता कि अंदर क्या हो रहा है। ये सरकार जुल्म की इंतहा पर पहुंच गई है।’

‘ये राजनीतिक लड़ाई, उसी तरह लड़ना होगा’ नूरीन नियाजी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को हिटलर बता रही हैं। ये कहने की नौबत क्यों आई? इसके जवाब में इमरान के वकील फैसल चौधरी कहते हैं, ‘उनके अल्फाज सख्त होते हैं। पाकिस्तान में हर सियासी फैसले के पीछे इस्टैब्लिशमेंट होती है। ये हमारा अंदरूनी मामला है। वो बहन हैं, उनके जज्बात हैं, हम उनका सम्मान करते हैं।’
‘इमरान खान की बहन अलीमा खान ने कोर्ट की अवमानना का केस दायर किया है। ये राजनीतिक लड़ाई है और उसी तरीके से लड़ी जाएगी। सरकार विरोध प्रदर्शन के बाद दबाव में आई है और हो सकता है कि अगले हफ्ते तक इमरान खान साहब से मिलने दिया जाए।‘

‘आर्मी को ज्यादा ताकत मिली, पाकिस्तान में हिंसा का खतरा’ ऑपरेशन सिंदूर और भारत के साथ संघर्ष के बाद पाकिस्तान में आसिम मुनीर को प्रमोशन देकर फील्ड मार्शल बना दिया गया। इसके बाद पाकिस्तान में बन रहे हालात पर हमने जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में साउथ एशियन स्टडीज पढ़ाने वालीं प्रोफेसर श्रीराधा दत्ता से बात की।
वे कहती हैं, ‘जिस तरह से आसिम मुनीर को ताकत मिली है, ये एक तरह से सेना के तख्तापलट की तरह है। इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी के पास इतनी ताकत नहीं होती थी। अब पाकिस्तान में सड़कों पर प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। पाकिस्तान की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कानूनी और संवैधानिक रूप से कोई कुछ नहीं कर सकता है।
‘इमरान खान की मौत को लेकर जो खबर फैली थी, मुझे इसमें दम नहीं लगता है। वे 2023 से जेल में बंद है। इमरान खान को शहरी लोगों का समर्थन हासिल है। पाकिस्तान में अवाम का सत्ता के खिलाफ विद्रोह कम ही देखने को मिला है। इसकी संभावना भी कम है। बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल में जैसा विद्रोह देखा है, पाकिस्तान में देखने को नहीं मिला।’

‘हमने 4 बार तानाशाहों को हटाया, ये मसला भी सुलझा लेंगे’ पाकिस्तान के हालात पर हमने इमरान के वकील एडवोकेट फैसल चौधरी से भी सवाल पूछा। वे कहते हैं, ‘अवाम ने 4 बार तानाशाहों को बाहर निकाला है। इस वक्त पाकिस्तान में इमरान खान सबसे बड़े राजनेता हैं। हम अपनी फौज के साथ नहीं लड़ना चाहते।’
‘हम संविधान के तहत रहकर काम करेंगे। फौज हमारी है और गलतफहमियां दूर हो जाती हैं। मुल्क भी हमारा है। ये हमारा अंदरूनी मामला है और हम इसे सुलझा लेंगे।’
इमरान खान का मैसेज है कि पाकिस्तान में ताकत के केंद्र अपने दायरे में रहकर काम करें। पाकिस्तान को आगे बढ़ाने के लिए राजनीति और मिलिट्री को अपनी-अपनी हद में काम करना चाहिए।’

वहीं पाकिस्तान के पॉलिटिकल एक्सपर्ट ताहिर नईम कहते हैं कि पाकिस्तान में इतिहास है कि जो नेता सत्ता से हटा, उसके साथ अच्छा नहीं हुआ। कई नेता बाहर चले गए, कई को फांसी हुई। इमरान खान के साथ भी यही हो रहा है।
इमरान खान इसी इस्टैब्लिशमेंट के कंधों पर बैठकर आए थे। पाकिस्तान में हालात ये हैं कि इमरान खान के समर्थकों की आवाज तक मीडिया में नहीं आ रही है। पाकिस्तान इससे बाहर नहीं निकल पा रहा है।
