मुख्य बातें

पठानकोट में इंजीनियरिंग और एमबीए छोड़ अपनाई खेती: 35 एकड़ में आम-अमरूद के बाग; भेड़पालन से भी लाखों की कमाई – Pathankot News

पठानकोट में इंजीनियरिंग और एमबीए छोड़ अपनाई खेती:  35 एकड़ में आम-अमरूद के बाग; भेड़पालन से भी लाखों की कमाई – Pathankot News

अपने शीप फार्म में करुणेश पठानिया।

पठानकोट के करुणेश पठानिया एक पढ़े-लिखे और जुझारू किसान हैं। इंजीनियरिंग और MBA की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने ताइवानी पिंक अमरूद की बागवानी और भेड़ पालन को अपना व्यवसाय बनाया है, जिससे वे अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में सात साल नौ

.

शिक्षा और विदेश में नौकरी का अनुभव

अबरोल नगर निवासी 44 वर्षीय करुणेश पठानिया बताते हैं कि उसने भोपाल से आईटी इंजीनियरिंग और फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट में एमबीए किया। इसके बाद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया की एक कंपनी में सात साल तक कार्य किया। वहीं रहते हुए उन्होंने तय किया कि अब अपने देश लौटकर खेती करेंगे।

बागवानी की ओर रुझान और ताइवानी अमरूद की खेती

करुणेश के परिवार का कंदरोड़ी में 35 एकड़ में दशहरी आम का बाग है, जिसमें करीब 1000 पेड़ हैं। इसी लगाव ने उन्हें बागवानी की ओर प्रेरित किया। वर्ष 2022 में उन्होंने 3 एकड़ में ताइवानी पिंक अमरूद का बाग लगाया, जिसमें 900 पौधे लगाए गए। यह अमरूद अंदर से लाल और बेहद मीठा होता है, जिसका वजन करीब 500 ग्राम तक होता है।

एक पेड़ से औसतन 20 किलोग्राम अमरूद की पैदावार होती है। इस बाग से उन्हें करीब 180 क्विंटल उत्पादन मिलता है, जो बाजार में ऊंचे दाम पर बिकता है। पारंपरिक खेती की तुलना में यह काम 50 फीसदी अधिक लाभदायक साबित हुआ है।

हाई ब्रीड भेड़ पालन से अतिरिक्त आमदनी

करुणेश ने हाई ब्रीड भेड़ पालन भी शुरू किया है। इसके लिए उन्होंने जमुनापारी नस्ल की भेड़ें मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से मंगवाईं। वर्तमान में उनके पास 55 भेड़ें हैं, जिनके लिए उन्होंने शेड और घूमने-फिरने की जगह तैयार की है। ये भेड़ें मुख्य रूप से ब्रीडिंग और मीट के लिए बेची जाती हैं। मादा भेड़ हर पांच महीने में बच्चा देती है और हर छह महीने में लगभग 15 भेड़ों का नया स्लॉट तैयार हो जाता है।

वे बताते हैं कि एक नर भेड़ 15 से 18 हजार रुपए में बिक जाती है। कश्मीर और पंजाब में इनकी मीट के लिए अच्छी मांग है। छह महीने में वह करीब डेढ़ लाख रुपए की भेड़ें बेच देते हैं। उन्होंने मार्च 2024 में पटियाला के कंग गोट फार्म से भेड़ पालन की ट्रेनिंग भी ली है।

परिवार और जीवनशैली

मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले करुणेश का परिवार अब पठानकोट के अबरोल नगर में बस गया है। परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे हैं। खेती और पशुपालन के बीच भी वह परिवार के साथ समय बिताते हैं और खुद को खुशहाल व संतुष्ट महसूस करते हैं।

संपर्क – 85589-56963



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *