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अमेरिकी संसद में मोदी-पुतिन की कार वाली तस्वीर: डेमोक्रेट सांसद बोलीं- यह फोटो हजार शब्दों के बराबर; कहा- ट्रम्प की विदेश नीति फेल हुई

अमेरिकी संसद में मोदी-पुतिन की कार वाली तस्वीर:  डेमोक्रेट सांसद बोलीं- यह फोटो हजार शब्दों के बराबर; कहा- ट्रम्प की विदेश नीति फेल हुई


वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिका की संसद में बुधवार को पुतिन-मोदी की कार वाली तस्वीर की चर्चा हुई।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का भारत दौरा अमेरिका में भी चर्चा में बना हुआ है। एक अमेरिकी सांसद ने पीएम मोदी और पुतिन की सेल्फी वाली तस्वीर दिखाकर राष्ट्रपति ट्रम्प की विदेश नीति की आलोचना की।

अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कैमलेगर-डव ने मोदी-पुतिन की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह पोस्टर हजार शब्दों के बराबर है। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत नीति की कड़ी आलोचना की।

डव ने कहा, “ट्रम्प की भारत को लेकर नीतियां ऐसी हैं जैसे हम खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हों। दबाव डालकर साझेदारी करना महंगा साबित होता है। और यह पोस्टर इसका सबसे बड़ा सबूत है। अमेरिका की दबाव वाली नीति भारत को रूस के करीब धकेल रही है।”

अमेरिकी सांसद सिडनी कैमलेगर-डव ने मोदी-पुतिन की कारपुलिंग वाली तस्वीर दिखाई।

अमेरिकी सांसद सिडनी कैमलेगर-डव ने मोदी-पुतिन की कारपुलिंग वाली तस्वीर दिखाई।

ट्रम्प के नोबेल प्राइज की डिमांड पर तंज कसा

सांसद डव ने ट्रम्प के उस दावे पर भी तंज कसा जिसमें ट्रम्प खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार बताते रहे हैं और दावा करते हैं कि उन्होंने आठ युद्ध रुकवाए हैं, जिनमें भारत-पाकिस्तान भी शामिल है।

डव ने कहा, “जब कोई देश अपने सबसे अहम रणनीतिक साझेदारों को ही विरोधियों की ओर धकेल दे, तो वह नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार नहीं कहलाता।”

सांसद बोलीं- नुकसान को जल्द ठीक करना जरूरी

डव ने आगे कहा कि अमेरिका को अब बेहद तेजी से कदम उठाने होंगे, ताकि ट्रम्प प्रशासन की नीतियों से अमेरिका-भारत साझेदारी को जो नुकसान हुआ है, उसे जल्द से जल्द ठीक किया जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देशों के बीच वह भरोसा और सहयोग फिर से बहाल करना जरूरी है, जो अमेरिका की समृद्धि, सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के लिए अनिवार्य है।

ये टिप्पणियां हाउस फॉरेन अफेयर्स सबकमेटी ऑन साउथ एंड सेंट्रल एशिया की उस सुनवाई के दौरान आईं, जिसका विषय था- ‘अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी: एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक की सुरक्षा’।

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