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प्रयागराज में 5 हजार छात्र गाएंगे वंदे मातरम्: 150 वर्ष पूरे होने पर विजयोत्सव दिवस का आयोजन, शहीदों के परिवार होंगे सम्मानित – Prayagraj (Allahabad) News

प्रयागराज में 5 हजार छात्र गाएंगे वंदे मातरम्:  150 वर्ष पूरे होने पर विजयोत्सव दिवस का आयोजन, शहीदों के परिवार होंगे सम्मानित – Prayagraj (Allahabad) News


सचिन प्रजापति | प्रयागराज3 मिनट पहले

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प्रयागराज में वन्देमातरम गान के 150 वर्ष पूरे होने पर 16 दिसंबर को विजयोत्सव दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक कार्यक्रम होने जा रहा है। सांस्कृतिक एवं नैतिक प्रशिक्षण संस्थान और हिन्दू आध्यात्मिक एवं सेवा संस्थान प्रयागराज द्वारा देशभक्ति भाव जगाने के लिए सामूहिक पूर्ण वंदेमातरम् गायन समारोह का आयोजन किया जा रहा है।

खास बात यह है कि यह कार्यक्रम प्रयागराज में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर भारत स्काउट गाइड इंटर कॉलेज मम्फोर्डगंज में 11 बजे से आयोजित किया जाएगा। इसमें 5,000 से अधिक विद्यार्थी सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ गायन करेंगे।

इस समारोह की जानकारी देते हुए गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि कार्यक्रम में देशभक्ति गीतों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ होंगी, साथ ही शहीद परिवारों का सम्मान भी किया जाएगा। छात्रों और नौजवानों में राष्ट्रभक्ति की भावना बढ़ाने और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से जोड़ने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम एक बड़ी प्रेरणादायी पहल माना जा रहा है। कार्यक्रम में शिक्षक,डॉक्टर, व्यापारी के साथ अन्य वर्गों की भी भूमिका रहेगी।

कार्यक्रम की अध्यक्षता काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति तथा हिन्दू आध्यात्मिक सेवा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. गिरिराज चंद्र त्रिपाठी करेंगे। मुख्य अतिथि के तौर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्व प्रसिद्ध पद्मश्री सोमा घोष की उपस्थित रहेंगी, जो अपने संगीत से वातावरण को देशभक्ति से भर देगी। मुख्य वक्ता के तौर पर गुणवंत सिंह कोठारी की मौजूदगी रहेगी।

7 नवंबर 1876 को बंगाल के कांताल पाड़ी गाँव में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना की थी।

1882 में यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंद मठ में शामिल हुआ। 1896 में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने पहली बार कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे बंगाली शैली में लय और संगीत के साथ गाया। इस गीत के शुरुआती दो पद संस्कृत में और बाकी पद बंगला भाषा में हैं। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय नारा बना। 1906 में इसे नागरी लिपि में प्रस्तुत किया गया और टैगोर ने इसका संशोधित रूप दिया।



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