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भागवत बोले-हम जहां रहते हैं वो हिंदू घर जैसा दिखे: दीवारों पर विवेकानंद की तस्वीर हो या माइकल जैक्सन की, यह तय करना होगा

भागवत बोले-हम जहां रहते हैं वो हिंदू घर जैसा दिखे:  दीवारों पर विवेकानंद की तस्वीर हो या माइकल जैक्सन की, यह तय करना होगा


श्री विजय पुरम2 घंटे पहले

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तीन दिन के दौरे पर अंडमान पहुंचे थे। शनिवार को उनका दौरा खत्म हुआ।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि हिंदुओ को एकजुट होकर देश को आगे ले जाना होगा। इसके लिए वैसा ही आचरण करना होगा। हम जहां रहते है वो हिंदू घर की तरह सजा होना चाहिए। हमें यह तय करना होगा कि घर की दीवारों पर स्वामी विवेकानंद की तस्वीर हो या माइकल जैक्सन की।

भागवत ने ये बातें अंडमान के श्रीविजय पुरम में स्थित नेताजी स्टेडियम में विराट हिंदू सम्मेलन समिति द्वारा आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि हिंदू एकता के लिए एकरूपता को जरूरी नहीं मानता। बाकी दुनिया इसके उलट सोचती है।

अगर हिंदू जागेंगे तो दुनिया जागेगी। दुनिया मानती है कि भारत ही रास्ता दिखाएगा। समस्याओं पर समय बर्बाद करने के बजाय हमें समाधान खोजने चाहिए। किसी भी काम को पूरा करने के लिए शक्ति की आवश्यकता होती है और शक्ति केवल एकता से आती है।

भागवत की स्पीच, 3 बड़ी बातें…

  • दुनिया सत्य को नहीं शक्ति को देखती है। जिसके पास शक्ति है उसी की बात मानी जाती है। एक मजबूत समाज बनाने और राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकता आवश्यक है। इसके साथ ही भागवत ने टकराव से बचने की भी सलाह दी।
  • भगवान कृष्ण और जंगल में रहने वाले एक राक्षस के बारे में महाभारत की एक कहानी सुनाते हुए कहा कि अर्जुन और सात्यकि ने राक्षस से लड़ने की कोशिश की, लेकिन हर वार से वह और बड़ा होता गया। कृष्ण ने हस्तक्षेप किया, टकराव से बचाया और बिना लड़ाई के उसे वश में करने के लिए समझदारी का इस्तेमाल किया। सबक यह है कि हर समस्या के लिए बल की आवश्यकता नहीं होती। समाधान स्थिति को समझने पर निर्भर करते हैं।
  • हम परिवार के साथ घूमने जाते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि आप पेरिस, सिंगापुर जाओ। दुनिया घूमने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन कभी-कभी श्री विजयपुरम भी जाओ, वहां सेल्यूलर जेल देखो। लोगों ने यहां जेल में अपनी जिंदगी बिताई है। वे झुके नहीं, वे टूटे नहीं। उन्होंने आजाद भारत देखा।

भागवत का तीन दिन का अंडमान दौरा पूरा आरएसएस सरसंघचालक के रूप में भागवत का केंद्र शासित प्रदेश का यह पहला दौरा था। लगभग दो दशक पहले, वह संगठन के सरकार्यवाह (महामंत्री) के रूप में द्वीप समूह का दौरा कर चुके थे। वह तीन दिन के लिए यहां पहुंचे थे। यह दौरा 11-13 दिसंबर तक का था।

पिछले 2 दिन के कार्यक्रम

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर की मूर्ति का अनावरण किया। यह मूर्ति दक्षिण अंडमान जिले के 'वीर सावरकर प्रेरणा पार्क' में लगाई गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वीर सावरकर की मूर्ति का अनावरण किया। यह मूर्ति दक्षिण अंडमान जिले के ‘वीर सावरकर प्रेरणा पार्क’ में लगाई गई है।

12 दिंसबर: भागवत बोले-भारत के लिए जीने का समय, मरने का नहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि देश को हर चीज से ऊपर रखना चाहिए। यह भारत के लिए जीने का समय है, मरने का नहीं। हमारे देश में हमारे अपने देश की ही भक्ति होनी चाहिए। यहां ‘तुम्हारे टुकड़े-टुकड़े होंगे’ जैसी भाषा नहीं चलेगी।

भागवत, अंडमान में दामोदर सावरकर के गीत ‘सागर प्राण तलमाला’ की 115वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित समारोह में पहुंचे थे।

11 दिसंबर: अंडमान पहुंचे, RSS पदाधिकारियों के साथ बैठक की मोहन भागवत 11 दिसंबर को अंडमान पहुंचे थे। यहां उन्होंने स्थानीय आरएसएस पदाधिकारियों से मुलाकात की। भागवत ने अंडमान के श्री विजय पुरम में बैठक की। केंद्र सरकार ने 13 सिंतबर 2024 को अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर का नाम बदलकर श्री विजय पुरम रखा था।

इसका मकसद था कि पुराने नाम पोर्ट ब्लेयर में अंग्रेजों के औपनिवेशिक नाम का प्रभाव था। तो उसे बदलकर एक ऐसा नाम रखा गया जो स्वतंत्रता संग्राम में विजय और भारत की आजादी के संघर्ष को दर्शाए।

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मोहन भागवत बोले- पहले लोग संघ के काम पर हंसते थे: आज डंका बज रहा है

मोहन भागवत ने कहा- पहले लोग संघ के काम पर हंसते थे। डॉ. हेडगेवार पर भी हंसते थे, कहते थे नाक साफ नहीं कर सकते। ऐसे बच्चों को लेकर यह राष्ट्र निर्माण करने चले हैं। इस तरह का उपहास होता था। विचार भी अमान्य था। लोग कहते थे हिंदू संगठन मेंढक तोलने जैसी बात है, हो नहीं सकता है। हिंदू को काहे जगा रहे हो, मृत जाति है। पूरी खबर पढ़ें…

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