झारखंड में कुष्ठ और ठंड में होनेवाले त्वचा जनित रोग और उनसे जुड़ी विकलांगताओं के उन्मूलन की दिशा में एक अहम पहल करते हुए मंगलवार को राजधानी रांची में परामर्श बैठक आयोजित की गई। होटल आर्या में हुई इस बैठक का आयोजन एनएलआर इंडिया फाउंडेशन द्वारा किया गय
.
बैठक में बताया गया कि भारत दुनिया के कुल कुष्ठ मामलों के 50 प्रतिशत से अधिक का बोझ वहन करता है। वर्ष 2024-25 में देश में एक लाख से अधिक नए मामले सामने आए।
वहीं झारखंड में 7,825 कुष्ठ रोगी दर्ज किए गए, जिनमें 6.44 प्रतिशत बच्चे हैं। यह संक्रमण की निरंतरता को दर्शाता है। इसी तरह, लिम्फेटिक फाइलेरियासिस भी राज्य के लिए गंभीर चुनौती है। झारखंड के 24 में से 23 जिले एलएफ-एंडेमिक हैं, जहां हजारों लोग लिम्फेडेमा और हाइड्रोसील से पीड़ित हैं।
कई मुद्दों पर हुई चर्चा बैठक का उद्घाटन एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा ने किया। उन्होंने कुष्ठ, एलएफ उन्मूलन और दिव्यांगजन सेवाओं को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके बाद दो तकनीकी पैनल चर्चाओं में प्रारंभिक पहचान, रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और आजीविका से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। एनएलआर इंडिया फाउंडेशन ने बीते 26 वर्षों में रोकथाम उपचार, दिव्यांगजन-समावेशी देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक हस्तक्षेप के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
