आर्मी से रिटायर्ड कैप्टन गुरप्रीत कौर।
पंजाब के लुधियाना की बेटी गुरप्रीत कौर भारतीय सेना से बतौर कैप्टन रिटायर हुई और अब पंजाब सिविल सर्विसिस (PCS) अधिकारी बन गई। सेना से कैप्टन के पद से रिटायर होने और पीसीएस अधिकारी बनने तक के लिए गुरप्रीत कौर को अलग तरह से संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने हार
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गुरप्रीत कौर ने पंजाब सेक्रेट्रिएट चंडीगढ़ में ज्वाइन कर दिया है और जल्दी ही उन्हें किसी जिले में नियुक्ति मिल जाएगी। चार साल के लंबे संघर्ष के बाद पीसीएस के तौर पर नियुक्ति मिलने से रिटायर्ड कैप्टन गुरप्रीत कौर व उसका परिवार बेहद खुश है। गुरप्रीत कौर का कहना है कि उन्हें अब स्टेशन अलॉटमेंट का इंतजार है जो कि इसी सप्ताह खत्म हो जाएगा।
गुरप्रीत कौर अपने पिता, मां व बेटे के साथ खुशी मनाते हुए।
सेना में कैप्टन, फिर PCS बनने तक का सफर…
- जैन पब्लिक स्कूल में पढ़ी: गुरप्रीत कौर लुधियाना के शिवाजी नगर गली नंबर एक में पली बढ़ी हैं। उनके पिता अमरीक सिंह एक व्यवसायी हैं और जसबीर कौर गृहणी हैं। दसवीं कक्षा तक जैन पब्लिक स्कूल में पढ़ी और उसके बाद 12वीं कक्षा तक भारतीय विद्या मंदिर किचलू नगर में पढ़ी। डीएमसी से नर्सिंग में ग्रेजुएशन की।
- शॉर्ट कमिशन के जरिए सेना में बनी लेफ्टिनेंट: नर्सिंग में ग्रेजुएशन करने के बाद गुरप्रीत कौर 2013 में शॉर्ट कमिशन के जरिए भारतीय सेना की मेडिकल नर्सिंग सर्विसेज विंग में बतौर लेफ्टिनेंट नियुक्त हुई। दो साल की सर्विस के बाद प्रमोशन हुई और कैप्टन बन गई।
- पुणे और विशाखापट्टनम में निभाई सेवा: गुरप्रीत कौर ने बताया कि सेना में रहते हुए उन्होंने मुख्यत: पुणे व विशाखापट्टनम में सेवाएं निभाई। उन्होंने बताया कि पांच साल की नौकरी के बाद उन्होंने 2018 में रिटायरमेंट ले ली। उस समय उनके पास तीन साल की सर्विस आगे बढ़ाने का ऑप्शन था या फिर रिटायरमेंट का। इसलिए उन्होंने रिटायरमेंट का फैसला लिया और उसके बाद पीसीएस की तैयारी में जुट गई।
- 2019 से 21 तक की पीसीएस की तैयारी: गुरप्रीत कौर ने 2019 से 2021 तक पीसीएस की तैयारी की। इसमें उनका आर्मी के बैकग्राउंड से होना भी काम आया। 2021 परीक्षा में उनका सिलेक्शन एक्स सर्विसमैन कोटे में हो गया। नियुक्ति मिली उससे पहले उनकी कैटेगरी कोर्ट में चैलेंज हो गई।
- 2024 तक हाईकोर्ट में लड़ी कानूनी लड़ाई: गुरप्रीत कौर ने बताया कि जब उनकी कैटेगरी को लेकर केस हाईकोर्ट में पहुंचा तो वहां तीन से साढ़े तीन साल लग गए। 2024 में हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया तो उसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में फैसला उनके पक्ष में दिया तो तब जाकर उन्हें नियुक्ति मिल सकी।
- लंबी लड़ाई के बाद मिली नौकरी: गुरप्रीत कौर ने बताया कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार उन्हें वह नौकरी मिल गई जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। उन्होंने बताया कि लुधियाना से सेना में कैप्टन बनने का सफर आसान रहा लेकिन पीसीएस की परीक्षा पास करने के बाद नौकरी हासिल करने का सफर बड़ा चुनौतीपूर्ण रहा।

पूर्व सैनिक मानने को लेकर रहा विवाद सेना में शॉर्ट सर्विस कमिशन के जरिए भर्ती होने वाले अधिकारी अगर जल्दी रिटायरमेंट लेते हैं तो उन्हें पेंशन नहीं मिलती है। इसी बात को आधार बनाकर गुरप्रीत कौर की नियुक्ति को एक्स सर्विसमैन कैटेगरी में चैलेंज किया गया। गुरप्रीत कौर ने कहा कि हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने माना कि शॉट कमिशन में के तहत सेना में सेवा निभा चुके अधिकारी भी सैनिक की कैटेगरी में आते हैं।
दादा सेना में सूबेदार थे तो सेना से हुआ लगाव गुरप्रीत कौर ने बताया कि उसके दादा सेना में सूबेदार थे तो बचपन में दादा जी को सेना की वर्दी में देखकर अच्छा लगता था। उन्हें देखकर ही सेना को जॉइन किया। उन्होंने बताया कि सेना के पांच साल बेहद अच्छे रहे। उन्होंने कहा कि अनुशासन और हर काम को जिम्मेदारी के साथ करना, समय पर करना यह सब सेना में सीखा है। यही नहीं अपने हक के लिए लड़ने का जज्बा भी सेना से ही मिला नहीं तो पीसीएस की नौकरी हासिल करने के लिए इतनी लंबी कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पाती।

गुरप्रीत कौर भारतीय सेना में बतौर लेफ्टिनेंट भर्ती हुई थीं।
पति शॉर्ट कमिशन के जरिए नेवी में बने लेफ्टिनेंट कमांडर गुरप्रीत कौर की शादी 2015 में पटियाला जिले के समाना में रहने वाले गगनदीप सिंह से हुई गगनदीप सिंह भी भारतीय नौ सेना में शॉर्ट सर्विस कमिशन के जरिए लेफ्टिनेंट कमांडर बने थे। उन्होंने 2023 में नेवी से रिटायरमेंट ले ली है और अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड दिल्ली में जॉब कर रहे हैं। सेना से रिटायर होने के बाद जहां गुरप्रीत कौर ने पीसीएस की तैयारी की वहीं उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। गुरप्रीत कौर ने मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन की और फिर बीएड किया। वर्तमान में वो पंजाब यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रही हैं।

पार्षद मंजू अग्रवाल व इंद्र अग्रवाल गुरप्रीत कौर को सम्मानित करते हुए।
पार्षद मंजू अग्रवाल व इंद्र अग्रवाल ने दी बधाई भारतीय जनता पार्टी की पार्षद मंजू अग्रवाल व पूर्व पार्षद इंद्र अग्रवाल ने गुरप्रीत कौर के पीसीएस अफसर बनने पर उन्हें और उनके परिवार को बधाई दी। उन्होंने उनके घर जाकर सिरोपा भेंट किया और इसे अपने वार्ड के लिए गौरव की बात बताया।
