शाजापुर में किसानों ने अश्वगंधा, चिया सीड की खेती शुरू की है।
शाजापुर के किसान अब परंपरागत आलू, प्याज और लहसुन जैसी अधिक लागत वाली फसलों के बजाय औषधीय और मसाला फसलों की खेती कर रहे हैं।
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बढ़ती लागत, जंगली जानवरों से नुकसान और बाजार में उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों को हो रहे आर्थिक नुकसान के चलते यह बदलाव देखा जा रहा है।
किसानों ने शुरू की अश्वगंधा और चिया सीड की खेती
जिले के कई गांवों में किसानों ने अश्वगंधा और चिया सीड की खेती शुरू कर दी है। इन फसलों में लागत अपेक्षाकृत कम आती है। साथ ही, खाद, बीज और पानी की आवश्यकता भी सीमित होती है। जंगली जानवरों से फसल को नुकसान की संभावना भी न के बराबर रहती है।
औषधीय और मसाला फसलें होने के कारण वर्तमान में बाजार और मंदिरों में इनके अच्छे भाव मिल रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है, जो उन्हें परंपरागत फसलों में नहीं मिल पा रही थी।
कृषि विज्ञान केंद्र शाजापुर की टीम और किसान संघ के प्रतिनिधियों ने खेतों का निरीक्षण किया।
कृषि विज्ञान केंद्र शाजापुर की टीम ने किया निरीक्षण
ग्राम खोरिया नायता में किसान किशन गोपाल बैरागी ने तीन बीघा में चिया सीड की खेती की है। इसी तरह, महेश पाटीदार ने दो बीघा में अश्वगंधा और संतोष पाटीदार ने दो बीघा में चिया सीड की फसल लगाई है। अन्य किसान भी भविष्य में इन फसलों को अपनाने की योजना बना रहे हैं।
फसलों के निरीक्षण के लिए कृषि विज्ञान केंद्र शाजापुर की टीम और किसान संघ के प्रतिनिधि खेतों में पहुंचे। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र से डॉ. जी.आर. अंबावती, कृषि विभाग से मुकेश सोनगरा, राजस्व विभाग से हल्का पटवारी ममता महिवाल, भारतीय किसान संघ से जिला मंत्री मुकेश पाटीदार, जिला कोषाध्यक्ष ललित नगर और तहसील मंत्री ज्ञान सिंह गुर्जर सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
