नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले
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दिसंबर की शुरुआत में छह दिनों के भीतर इंडिगो की 5,000 से ज्यादा फ्लाइट रद्द हो गईं थीं।
इंडिगो में बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन की जांच करने वाले पैनल ने शुक्रवार शाम अपनी रिपोर्ट एविएशन रेगुलेटर DGCA को सौंप दी है। समिति 5 दिसंबर को बनाई गई थी। हालांकि रिपोर्ट्स में क्या लिखा है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है।
पैनल में अध्यक्ष DGCA के डायरेक्टर जनरल संजय ब्रह्मणे, डिप्टी डायरेक्टर जनरल अमित गुप्ता, सीनियर फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन कपिल मांगलिक और फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन रामपाल शामिल थे।
पैनल ने उन हालात की समीक्षा और जांच की, जिनके कारण फ्लाइट कैंसिल हुईं। रिपोर्ट की कॉपी नागरिक उड्डयन मंत्री के राममोहन नायडू और सचिव समीर कुमार सिन्हा को भी दी गई हैं।
हालांकि, एक अलग सिस्टमैटिक रिव्यू में कहा गया है कि एयरलाइन ने ग्लोबल स्टैंडर्ड के मुकाबले 891 ज्यादा पायलट रखे थे। इससे पता चलता है कि क्रू की कमी नहीं, बल्कि शेड्यूलिंग में गड़बड़ी की वजह से ही फ्लाइट्स कैंसिल हुईं।
इधर, इंडिगो ने फ्लाइट कैसिलेशन प्रभावित यात्रियों को 10,000 के ट्रैवल वाउचर जारी करना शुरू कर दिया है। ये वाउचर 12 महीने तक वैध रहेंगे, जो इंडिगो की किसी भी फ्लाइट में इस्तेमाल किए जा सकेंगे।
दरअसल दिसंबर महीने की शुरुआत में इंडिगो की छह दिनों के भीतर 5,000 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो गईं थीं, जिससे देश भर में हजारों यात्री फंस गए थे।
जांच पैनल के अलावा भी रिव्यू का आदेश था
अंग्रेजी न्यूज पेपर हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने यह पता लगाने के लिए एक सिस्टमैटिक रिव्यू का भी आदेश दिया था कि क्या एयरलाइन की तैयारी बदले हुए नियमों को लेकर पर्याप्त थी।
इस रिव्यू में यह भी सामने आया कि इंडिगो ने नवंबर में अपने 307 एयरबस-विमानों के बेड़े को चलाने के लिए 4,575 पायलटों को नियुक्त किया था। यह ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस के तहत जरूरी 3,684 पायलटों की संख्या से 891 ज्यादा थे।
दरअसल ऑपरेशन, ट्रेनिंग, छुट्टी और इमरजेंसी कंडीशन को कवर करने के लिए हर प्लेन में छह क्रू सेट रखे जाते हैं। इंडिगो ने इस पूरे संकट को लेकर अपना जवाब भी DGCA को दिया था, जिसमें कहा गया था कि इंडिगो द्वारा पायलटों की संख्या तय सीमा से ज्यादा है, और असली दिक्कत पायलटों की शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग में थी।
