भागीरथपुरा क्षेत्र में सप्लाई हो रहे नर्मदा जल को लेकर चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गुरुवार को आई जांच रिपोर्ट में पता चला है कि यह पानी पीने योग्य नहीं है। सैंपल में फीकल कॉलिफॉर्म, ई-कोलाई, विब्रियो और प्रोटोजोआ जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
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सूत्रों के मुताबिक पानी में हैजा फैलाने वाला विब्रियो कोलेरी भी मिला है, लेकिन सरकारी तंत्र इसे अब भी प्रारंभिक रिपोर्ट कहकर टाल रहा है। रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि पानी में जिस तरह के बैक्टीरिया मिले है, इसका मतलब साफ है कि पानी में सीपेज मिल रहा था।
भागीरथपुरा से पानी के सैंपल्स रविवार से इकट्ठा किए जा रहे हैं। निगम की खुद की लैब में करीब 80 सैंपल्स भेजे गए। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब में पानी और मरीजों के सैंपल कल्चर के लिए भेजे गए। गुरुवार दोपहर निगम की नर्मदा प्रदाय शाखा ने सैंपल्स की रिपोर्ट निगमायुक्त को सौंपी। इसमें सैंपल्स को ‘अनसेटिस्फेक्ट्री’ बताया गया है। भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपल पीने और अन्य घरेलू उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं था।
हां, दूषित तत्व पाए गए हैं भागीरथपुरा से लिए गए पानी के कुछ सैंपल्स की रिपोर्ट मिली है। वे पॉजिटिव है। उसमें पानी को दूषित करने वाले तत्व पाए गए हैं। अभी और रिपोर्ट आना बाकी है। – दिलीप कुमार यादव, निगमायुक्त
मरीजों की कल्चर रिपोर्ट में भी हैजे की आशंका भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से बीमार हुए लोगों का इलाज निजी अस्पतालों के साथ एमवायएच में भी चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक मरीजों की कल्चर रिपोर्ट में भी हैजा की आशंका सामने आ रही है। इसके बावजूद सरकारी स्तर पर अब तक बीमारी को नोटिफाई नहीं किया गया है।
एमवायएच में भर्ती मरीजों को डॉक्सीसायक्लीन दी जा रही है, जो आमतौर पर हैजा के इलाज में उपयोग होती है। मरीजों में दवा का असर भी दिख रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि हैंगिंग ड्रॉप टेस्ट से एक घंटे में हैजा की पुष्टि हो सकती है। रविवार से मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं, लेकिन प्रशासन अब भी कल्चर रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है।
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया के अनुसार रिपोर्ट आने में दो-तीन दिन लगेंगे। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में अब तक हैजा दर्ज नहीं किया गया है। अधीक्षक डॉ. अशोक यादव और डॉ. एडी भटनागर को भी रिपोर्ट की जानकारी नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग ने भी हैजा रिपोर्ट नहीं किया है।
