हरियाणा के सीएम नायब सैनी प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक स्व.पंडित जसराज की जयंती मनाने फतेहाबाद जिले के गांव पीलीमंदोरी आएंगे। इसके लिए 2 फरवरी को राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम के जरिए प्रदेशभर के मिरासी समाज को भी सीएम साधने का काम करेंगे।
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इस कार्यक्रम की प्रशासन और पंचायत के स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम में पंडित जसराज के बेटे सारंगदेव और बेटी दुर्गा जसराज भी शामिल होंगे।
बता दें कि, पंडित जसराज मूल रूप से फतेहाबाद जिले के गांव पीलीमंदोरी के निवासी थे। उनकी मात्र चार वर्ष की उम्र उनका परिवार मुंबई शिफ्ट हो गया था। उनका जन्म 28 जनवरी 1930 को हुआ। उनका निधन 90 साल की उम्र में 17 अगस्त 2020 को हुआ।
एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंडित जसराज को प्रणाम करते हुए। फाइल फोटो
गांव में पिता के नाम से बनवाई थी लाइब्रेरी, वहीं लगेगी प्रतिमा
पंडित जसराज साल 2014 में अपना 84वां जन्मदिन मनाने के लिए गांव पीलीमंदोरी पहुंचे थे। यहां उन्होंने अपने पिता मोतीराम के नाम पर बनी लाइब्रेरी और अपने खुद के नाम पर बने पार्क का उद्घाटन किया था। इसी लाइब्रेरी में अब पंडित जसराज की प्रतिमा लगेगी।
इस प्रतिमा का अनावरण 2 फरवरी को सीएम नायब सैनी की ओर से किया जाएगा। इस प्रतिमा का निर्माण लाइब्रेरी प्रबंधन कमेटी ने करवाया है।

भाईयों का परिवार रहता है गांव पीलीमंदोरी में
गांव पीलीमंदोरी के सरपंच धर्मवीर गोरछिया ने बताया कि पंडित जसराज के भाई का परिवार आज भी गांव में रहता है। गांव में जन्में पंडित जसराज ने दुनियाभर में ख्याति प्राप्त की। यह ग्रामीणों के लिए बेहद गौरव का विषय है कि पंडित जसराज के कारण गांव पीलीमंदोरी का नाम भी प्रसिद्ध हुआ।
सरपंच ने बताया कि पिछले दिनों इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ग्रामीणों का प्रतिनिधिमंडल सीएम से मिला था। उन्होंने उस निमंत्रण को स्वीकार कर लिया। अब कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि भी हो चुकी है। इसलिए तैयारियां शुरू कर दी गई है।

पंडित जसराज। फाइल फोटो
जानिए… कौन थे पंडित जसराज
- मेवाती घराने से जुड़े हुए थे पिता पंडित जसराज के पिता मोतीराम मेवाती घराने से जुड़े हुए थे। वह हैदराबाद के निजाम के गवैये थे। इसके चलते उनका परिवार हैदराबाद शिफ्ट हो गया। उस समय पंडित जसराज की उम्र मात्र 7 साल की ही थी। पंडित जसराज ने भी मेवात घराने को आगे बढ़ाया।
- पिता से ही मिली संगीता शिक्षा पंडित जसराज को उनके पिता मोतीराम ने मुखर संगीत में दीक्षा दी और बाद में उनके बड़े भाई पंडित प्रताप नारायण ने उन्हें तबला सिखाया। वह अपने सबसे बड़े भाई पंडित मनीराम के साथ अपने एकल गायन प्रदर्शन में अक्सर शामिल होते थे।
- 14 साल की उम्र में बने गायक पंडित जसराज ने 14 साल की उम्र में एक गायक के रूप में प्रशिक्षण शुरू किया, इससे पहले तक वे तबला वादक ही थे। उन्होंने 22 साल की उम्र में गायक के रूप में अपना पहला स्टेज कॉन्सर्ट किया।
- पद्मश्री और पदम विभूषण सम्मान मिला पंडित जसराज को साल 2000 में शास्त्रीय संगीत गायन में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। इससे पहले 1975 में उन्हें पद्मश्री सम्मान मिला।
