मुख्य बातें

मेयर चुनाव की तारीख का ऐलान: आप-कांग्रेस को अपने पार्षद बचाने की चुनौती, सबसे बड़ी पार्टी आप महज एक बार बना पाई मेयर – Chandigarh News

मेयर चुनाव की तारीख का ऐलान:  आप-कांग्रेस को अपने पार्षद बचाने की चुनौती, सबसे बड़ी पार्टी आप महज एक बार बना पाई मेयर – Chandigarh News


चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के चुनाव 29 जनवरी को होंगे। इस बार चुनाव हाथ खड़े कर कराया जाएगा, जिससे क्रॉस वोटिंग की आशंका समाप्त हो गई है। हालांकि, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपने प

.

चंडीगढ़ आप प्रभारी एसएस आहूवालिया, दिल्ली में जरनैल सिंह के साथ बैठक के दौरान।

AAP में बेचैनी, शीर्ष नेतृत्व की बैठक

2021 में 14 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी AAP अब तक केवल एक बार ही मेयर बना पाई है। मौजूदा हालात को देखते हुए चंडीगढ़ प्रभारी एसएस आहलूवालिया ने राष्ट्रीय प्रभारी जरनैल सिंह के साथ बैठक की। बैठक में पार्षदों की मौजूदा स्थिति और पार्टी छोड़कर भाजपा में गए नेताओं को लेकर चिंता जताई गई।जरनैल सिंह ने दो पार्षदों के भाजपा में जाने पर नाराजगी जाहिर की और बचे हुए पार्षदों को एकजुट रखने पर जोर दिया।

एक वोट से तय होगा मेयर

कांग्रेस और AAP के पास सांसद के वोट को मिलाकर भाजपा के बराबर वोट हैं। ऐसे में मेयर पद के लिए दोनों खेमों को महज एक अतिरिक्त पार्षद की जरूरत है। यही वजह है कि जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है।

2021 में यह थी स्थिति।

2021 में यह थी स्थिति।

सबसे बड़ी पार्टी, फिर भी मेयर नहीं

AAP ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए 36 में से 14 सीटें जीती थीं, लेकिन बहुमत नहीं जुटा सकी।

  • भाजपा: 12 सीट
  • कांग्रेस: 8 सीट
  • शिअद: 1 सीट

अब तक चुने गए चार मेयर में से तीन बार भाजपा का मेयर बना है। AAP के कुलदीप कुमार एकमात्र मेयर बने, वह भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद।

चंडीगढ़ में यह है मौजूदा स्थिति।

चंडीगढ़ में यह है मौजूदा स्थिति।

हार के बाद भी भाजपा सबसे बड़ी पार्टी

दिसंबर 2021 के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए।

  • भाजपा: 12 से बढ़कर 18 पार्षद
  • AAP: 14 से घटकर 11 पार्षद
  • कांग्रेस: 8 से घटकर 6 पार्षद
  • शिअद: शून्य

भाजपा ने जोड़-तोड़ की राजनीति में बढ़त बना ली है।

आखिरी साल में AAP की अग्निपरीक्षा

नगर निगम का मौजूदा कार्यकाल 2026 में खत्म हो रहा है। एक साल की मेयरशिप के इस आखिरी वर्ष में AAP के लिए मेयर बनाना बड़ी चुनौती है। कांग्रेस के समर्थन के बावजूद पार्टी अब तक लगातार चूकती रही है। इस बार मुकाबला सिर्फ एक वोट पर टिका है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *