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भगवंत मान अकाल तख्त में पेश होने वाले चौथे CM: बरनाला को सबसे सख्त सजा मिली; बादल को सजा के बाद अवॉर्ड पर विवाद हुआ – Jalandhar News

भगवंत मान अकाल तख्त में पेश होने वाले चौथे CM:  बरनाला को सबसे सख्त सजा मिली; बादल को सजा के बाद अवॉर्ड पर विवाद हुआ – Jalandhar News


अकाल तख्त, भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला, प्रकाश सिंह बादल और भगवंत मान।

भगवंत मान पंजाब के चौथे मुख्यमंत्री हैं, जाे अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब में पेश हो रहे हैं। अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने गुरुओं के दसवंध के सिद्धांत-गुरू की गोलक, एक आपत्तिजनक वीडियो को लेकर उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए बुला

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भगवंत मान से पहले 3 और मुख्यमंत्री भीमसेन सच्चर, सुरजीत सिंह बरनाला और प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त पर पेश हो चुके हैं। भीमसेन सच्चर अविभाजित पंजाब के दूसरे मुख्यमंत्री थे। अकाल तख्त पर पेश होने वाले मुख्यमंत्रियों में सबसे सख्त सजा सुरजीत सिंह बरनाला को दी गई थी। उन्हें पंथ से निष्कासित करने के साथ गले में तख्ती डालकर पेश होने को कहा गया था।

सबसे ज्यादा विवाद प्रकाश सिंह बादल को लेकर हुआ। इसकी वजह ये थी कि सजा पूरी करने के बाद उन्हें फक्र ए कौम अवॉर्ड से नवाजा गया। जिसका सिखों के भीतर ही विरोध हुआ।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और CM भगवंत मान।

पंजाब के मुख्यमंत्री अकाल तख्त पर कब पेश हुए, उन्हें क्यो तलब किया गया, क्या सजा मिली, पढ़िए पूरी रिपोर्ट….

1. भीम सेन सच्चर

  • 18 सितंबर 1955 को पेशी, माफी मांगी: भीम सेन सच्चर 18 सितंबर 1955 को अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए थे। वे दरबार साहिब के अंदर नंगे पैर गए थे। अकाल तख्त के सामने हाथ जोड़कर खड़े हुए। यहां उन्होंने जुलाई 1955 को पुलिस द्वारा दरबार साहिब परिसर में की गई कार्रवाई (आंसू गैस के गोले छोड़ना और मर्यादा का उल्लंघन) के लिए लिखित में माफीनामा पढ़ा।
  • बर्तन और जूते साफ करने की सजा: अकाल तख्त के जत्थेदार अचहर सिंह ने उनकी माफी स्वीकार की और उन्हें धार्मिक सेवा बर्तन और जोड़े (बर्तन साफ करने और जूते साफ करने) का आदेश दिया था, जिसे उन्होंने पूरी मर्यादा के साथ पूरा किया।
  • तलब करने का कारण: 4 जुलाई 1955 को पंजाबी सूबा आंदोलन चल रहा था। भीम सेन सच्चर पर सीएम होने के नाते आंदोलन को दबाने का आरोप लगा। ये भी आरोप लगा कि उन्होंने दरबार साहिब में पुलिस फोर्स भी भेजी। पुलिस ने गुरुद्वारा परिसर में आंसू गैस के गोले छोड़े और कई गिरफ्तारियां कीं। इस घटना से सिखों में रोष पैदा हो गया। राजनीतिक असंतोष के चलते उन्होंने बाद में पद से इस्तीफा दे दिया।

2 . सुरजीत सिंह बरनाला

  • 5 दिसंबर 1988 को अकाल तख्त के सामने पेशी: सुरजीत सिंह बरनाला 1985 से 1987 तक पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन पर दो आरोप लगे। पहला, ऑपरेशन ब्लैक थंडर में दरबार साहिब में पुलिस को जाने की इजाजत दी। अकाल तख्त ने इसे मर्यादा का उल्लंघन माना। दूसरा , अकाल तख्त के आदेश को न मानना। दरअसल फरवरी 1987 में अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार ने सभी सिख राजनीतिक दलों को भंग करके एक संयुक्त दल बनाने का आदेश दिया था। बरनाला ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए इस धार्मिक आदेश को मानने से इनकार कर दिया।
  • 11 फरवरी 1987 को ‘तनखैया’ घोषित: अकाल तख्त के जत्थेदार प्रोफेसर दर्शन सिंह ने उन्हें 11 फरवरी 1987 को ‘तनखैया’ (धार्मिक अपराधी) घोषित कर दिया और बाद में पंथ से निष्कासित कर दिया गया। बरनाला लगभग डेढ़ साल पंथ से निष्कासित रहे। वे 5 दिसंबर 1988 को अकाल तख्त के सामने पेश हुए और माफी मांगी।
  • गले में तख्ती लटकाई, लिखा-मैं पापी हूं: अकाल तख्त जत्थेदार ने उन्हें सख्त सजा दी। गले में तख्ती डालकर दरबार साहिब के गेट पर बैठना पड़ा। तख्ती पर लिखा- मैं पापी हूं, जत्थेदार के आदेश की नाफरमानी की। इसके अलावा जूतों और बर्तन साफ करने की सजा मिली। उन्हें 501 रुपए देग और धार्मिक कोष में दान देने को कहा गया।

3 .प्रकाश सिंह बादल

  • 4 अक्टूबर 1979 को अकाल तख्त पर पेश: प्रकाश सिंह बादल 4 अक्टूबर 1979 को अकाल तख्त साहिब के सामने पेश हुए थे। उस समय वे पंजाब के मुख्यमंत्री थे। उन पर पंथक एकता को नुकसान पहुंचाने और अकाल तख्त के आदेशों की अनदेखी करने के आरोप थे। निरंकारी विवाद: 1978 के सिख-निरंकारी विवाद के बाद सिखों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ी। बादल पर आरोप था कि वे निरंकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहे हैं।
  • पार्टी में अंदरूनी कलह: उस समय अकाली दल दो धड़ों (जत्थेदार जगदेव सिंह तलवंडी और प्रकाश सिंह बादल) में बंट गया था। अकाल तख्त ने दोनों गुटों को एकजुट होने का आदेश दिया था, लेकिन बादल गुट पर इस आदेश को पूरी तरह न मानने और सरकार बचाने के लिए समझौते करने के आरोप लगे।
  • जत्थेदार भौरा ने तलब किया: सीएम रहते हुए परकाश सिंह बादल को अकाल तख्त के तत्कालीन जत्थेदार जत्थेदार साधु सिंह भौरा ने तलब किया था। जत्थेदार भौरा ने अकाली दल के विवाद को सुलझाने के लिए बादल और अन्य नेताओं को अकाल तख्त पर स्पष्टीकरण के लिए बुलाया था।
  • सजा के तौर पर जूते साफ किए, जूठे बर्तन मांजे: प्रकाश सिंह बादल अकाल तख्त के सामने पेश हुए और अपनी गलतियों को स्वीकार किया। उन्हें सजा के तौर पर धार्मिक सेवा दी गई। उन्होंने अकाल तख्त साहिब के सामने खड़े होकर माफी मांगी और मर्यादा के अनुसार बर्तन मांजने और जूते साफ करने की सेवा की।

CM भगवंत मान को धार्मिक सजा नहीं होगी… सीएम भगंवत मान पर आरोप है कि उन्होंने सिखों की पवित्र परंपरा दसवंध और गुरुद्वारों की गोलक के मिसयूज को लेकर टिप्पणियां कीं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से लोगों से गोलक में पैसे न डालने की बात कही थी, जिसे सिख सिद्धांतों पर हमला माना गया। सीएम ने बार-बार ऐसे बयान दिए जो सिख रहत मर्यादा और अकाल तख्त की सर्वोच्चता को चुनौती देते हैं।

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मुख्यमंत्री के कैरेक्टर को लेकर सवाल उठे। अकाल तख्त ने इसे सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना। हालांकि सीएम मान को धार्मिक सजा नहीं मिलेगी क्योंकि अकाल तख्त उन्हें पूर्ण सिख नहीं मानता। उनसे सिर्फ स्पष्टीकरण लिया जाएगा।

जानें श्री अकाल तख्त क्या है? SGPC मेंबर भाई मंजीत सिंह ने बताया कि श्री अकाल तख्त साहिब सिखों की सर्वोच्च राजनीतिक और न्यायिक संस्था है। इसका काम सिख समुदाय के सांसारिक और धार्मिक मामलों पर कौम का मार्गदर्शन करना और निर्णय लेना है। अकाल तख्त की स्थापना 5वें पातशाह श्री गुरु अर्जुन देव के बेटे गुरु श्री हरगोबिंद पातशाह ने 1606 में की।

उन्होंने देखा कि दुनिया में बहुत बड़ा जुल्म हो रहा था। इस पर उन्होंने दो तलवारें अपनाने का सिद्धांत बनाया। एक मीरी और दूसरी पीरी। इसका मतलब ये था कि धर्म और सियासत पर फैसले एक मंच से लिए जाएंगे। श्री अकाल तख्त अमृतसर में हरमंदिर साहिब के ठीक सामने अकाल तख्त स्थित है। अकाल तख्त का मतलब काल रहित परमात्मा का सिंहासन है।

यह सिखों के 5 तख्तों में सबसे सर्वोच्च और पुराना है। सिख धर्म या समुदाय से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण विषय या विवाद पर यहां से हुक्मनामा जारी किया जाता है। यह हुक्मनामा पूरी दुनिया के सिखों के लिए मानना जरूरी होता है।

श्री अकाल तख्त साहिब का वो हिस्सा जहां से जत्थेदार सजा सुनाते हैं।

श्री अकाल तख्त साहिब का वो हिस्सा जहां से जत्थेदार सजा सुनाते हैं।

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