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सिवनी में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी समाप्त: पोर्टल बंद होने से किसानों को नहीं मिला मौका; भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी – Seoni News

सिवनी में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी समाप्त:  पोर्टल बंद होने से किसानों को नहीं मिला मौका; भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी – Seoni News

सिवनी जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की तय प्रक्रिया मंगलवार शाम को समाप्त हो गई। सरकारी उपार्जन केंद्रों पर कांटे बंद होते ही खरीदी रुक गई, जिससे कई किसान अपनी धान की फसल नहीं बेच पाए। इससे वंचित किसानों की चिंता बढ़ गई है। पोर्टल बंद, किसानों को नहीं मिला मौका खरीदी पोर्टल बंद होने के बाद तकनीकी दिक्कतों, स्लॉट बुकिंग की समस्या और फसल कटाई में देरी के कारण कई किसान धान बेचने से वंचित रह गए। कई उपार्जन केंद्रों के बाहर अब भी किसान मौजूद हैं और खरीदी की तारीख बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इस संबंध में किसान संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर पोर्टल दोबारा खोलने की मांग की है। जिले में रिकॉर्ड धान खरीदी सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष धान खरीदी का आंकड़ा रिकॉर्ड रहा। कुल 61,051 पंजीकृत किसानों में से 52,599 किसानों ने अपनी उपज बेची। जिले में कुल 3.44 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 815.19 करोड़ रुपए है। भुगतान में देरी से बढ़ी परेशानी अब तक किसानों के खातों में केवल 565.70 करोड़ रुपए का भुगतान ही हो पाया है। बाकी राशि अभी प्रक्रिया में है। भुगतान में देरी के कारण किसानों को रबी फसल के लिए खाद, बीज और अन्य जरूरी सामान खरीदने में परेशानी हो रही है। परिवहन धीमा, धान खुले में रखा खरीदी समाप्त होने के बाद अब प्रशासन के सामने धान के सुरक्षित उठाव और भंडारण की बड़ी चुनौती है। कुल खरीदी के मुकाबले अब तक करीब 2.81 लाख मीट्रिक टन धान का ही परिवहन हो पाया है। लगभग 62,571 मीट्रिक टन धान अब भी उपार्जन केंद्रों पर खुले में रखा हुआ है, जिससे नमी और कीटों से नुकसान का खतरा बना हुआ है। तिथि बढ़ाने पर कोई आदेश नहीं नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रबंधक सुरेश सनखेड़े ने बताया कि धान खरीदी की तिथि बढ़ाने को लेकर शासन से कोई नया आदेश नहीं मिला है। फिलहाल विभाग का पूरा ध्यान बचे हुए धान के जल्द परिवहन और सुरक्षित भंडारण पर है। अधिकारियों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत परिवहन कार्य पूरा हो चुका है। वहीं किसान अब भी शासन के फैसले का इंतजार कर रहे हैं कि उन्हें अपनी बची हुई उपज बेचने का एक और मौका मिलेगा या नहीं।



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