देवरिया जिले के भटनी विकासखंड के महुराव गांव में मनरेगा योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय मनरेगा मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा, जबकि गांव के विकास कार्यों में प्रवासी मजदूरों से काम कराया जा रहा है। इस संबंध में रविवार को मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों ने विरोध किया और उच्च अधिकारियों से शिकायत की। लगभग 4000 की आबादी वाले महुराव गांव में सैकड़ों मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। नियमानुसार, प्रत्येक पंजीकृत मजदूर को वर्ष में 100 दिन का रोजगार मिलना अनिवार्य है। हालांकि, ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें पूरे साल काम नहीं मिल पाता, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में नाली और खड़ंजा निर्माण जैसे कई विकास कार्य लगातार चल रहे हैं। शासन के दिशानिर्देशों के तहत, इन कार्यों में मनरेगा मजदूरों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसके बावजूद, ग्राम प्रधान पर मनमानी करते हुए प्रवासी मजदूरों से काम कराने का आरोप है, जिससे स्थानीय मजदूर बेरोजगार बैठे हैं। रविवार को गांव में खड़ंजा निर्माण का कार्य चल रहा था, जिसमें प्रवासी मजदूर काम कर रहे थे। इस पर स्थानीय मनरेगा मजदूरों और ग्रामीणों ने आपत्ति जताई और कार्य को रुकवा दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, ग्रामीणों ने मौके का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया और संबंधित अधिकारियों को भी सूचित किया। ग्रामीणों ने विकास कार्यों में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है। गांव के मनोज ने बताया कि खड़ंजा निर्माण में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है और घटिया ईंटों का उपयोग हो रहा है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। भटनी विकासखंड अधिकारी संतोष कुमार यादव ने बताया कि उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी और यदि शिकायत सही पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
Source link
