हरियाणा में आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम विभाग की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. बनानी भट्टाचार्य के खिलाफ हरियाणा स्टेट विजिलेंस ब्यूरो एंड एंटी करप्शन ब्यूरो की पंचकूला यूनिट ने मामला दर्ज किया है। FIR में बनानी भट्टाचार्य पर आरोप है कि उन्होंने 2023-24 में ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार सर्वे (GPRS) के लिए टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं कीं, जिससे एक पसंदीदा एजेंसी को अनुचित लाभ हुआ। इसके अलावा, बाजार दर से दोगुनी कीमत पर काम आवंटित किया, जिससे सरकार को वित्तीय नुकसान हुआ। डिप्टी डायरेक्टर के पद पर उनकी नियुक्ति में भी नियमों का उल्लंघन किया गया, और उन्हें अवैध रूप से कॉन्ट्रैक्ट एक्सटेंशन दिए गए। FIR में बनानी भट्टाचार्य के साथ कानपुर के रहने वाले जावेद का भी नाम है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो SP पंखुड़ी कुमार ने कहा- FIR दर्ज कर ली गई है और मामला अभी बहुत शुरुआती चरण में है। अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है और आगे की जांच जारी है। अब सिलसिलेवार ढंग से जानिए पूरा मामला…. बिना टेंडर ‘पसंदीदा’ एजेंसी को काम
विजिलेंस के SPIO शुक्रपाल ने शिकायत में कहा कि डॉ. भट्टाचार्य ने 2023-24 में ग्राउंड पेनेट्रेशन रडार सर्वे (GPRS) करते वक्त पैसे का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने टेंडर के नियमों को तोड़ा और एक खास कंपनी को फायदा पहुंचाया। उन्होंने खरीद प्रक्रिया को अपने कंट्रोल में रखा और जानबूझकर टेंडर की जानकारी खुले बाजार में नहीं दी। किसी भी मीडिया में टेंडर का विज्ञापन नहीं किया गया, जिससे लोगों को इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। विभाग ने RTI के जवाब में माना कि टेंडर का विज्ञापन नहीं किया गया था। नियमों की अनदेखी कर GPRS सेवा खरीद की
इसके अलावा, आरोप है कि विभाग ने हरियाणा के वित्त विभाग के नियमों को तोड़े बिना ही GPRS सेवाओं को खरीदना शुरू कर दिया। FIR में कहा गया है कि डॉ. भट्टाचार्य ने बिना किसी वजह या मंजूरी के खरीद के नियमों का उल्लंघन किया। उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) के नियमों का पालन नहीं किया और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल से खरीदारी के जरूरी निर्देशों को भी नहीं माना। मेक इन इंडिया पॉलिसी की अनदेखी
शिकायत में यह भी कहा गया है कि हरियाणा सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ नीति का उल्लंघन हुआ, क्योंकि स्थानीय विक्रेताओं को टेंडर प्रक्रिया में ठीक से भाग लेने का मौका नहीं दिया गया। GPRS के काम के लिए सिर्फ IIT कानपुर को बुलाया गया। कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी या IIT रुड़की जैसे पास के संस्थानों को क्यों नहीं चुना गया, जबकि कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी भी GPRS का काम कर सकती थी। दूसरी एजेंसियों को जानबूझकर मौका नहीं दिया गया। बाजार दर से दोगुनी कीमत पर भुगतान
FIR के अनुसार, डॉ. भट्टाचार्य ने टोपरा कलां, प्राचीन टीला सुघ और प्राचीन टीला संधाये में GPRS के काम के लिए 24,33,750 रुपए दिए। जबकि, गैलेक्सी जियोमैटिक्स प्राइवेट लिमिटेड ने उसी काम के लिए सिर्फ 14,16,000 रुपए का कोटेशन दिया था। शिकायत में आरोप है कि यह कॉन्ट्रैक्ट एक पसंदीदा कंपनी को बाजार से लगभग दोगुनी कीमत पर दिया गया, जिससे सरकार को नुकसान हुआ और उस कंपनी को फायदा मिला। घोटाले में कानपुर के जावेद का भी नाम
आरोप है कि GPRS का कॉन्ट्रैक्ट बिना किसी प्रतिस्पर्धा के सीधे IIT कानपुर को दे दिया गया। यह भी कहा गया है कि IIT कानपुर के जावेद ने छह जगहों के लिए 47,20,000 रुपए का शुरुआती प्रस्ताव दिया था। इसी बीच, नवंबर 2025 में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एक और शिकायत दी गई, जिसमें डॉ. भट्टाचार्य की नियुक्ति पर सवाल उठाया गया। शिकायत में कहा गया कि उन्होंने गलत तरीके से सरकारी नौकरी पाई है और उनके कॉन्ट्रैक्ट को बार-बार गलत तरीके से बढ़ाया जा रहा है, इसलिए तुरंत कार्रवाई की जाए। कॉन्ट्रैक्ट आधार पर डिप्टी डायरेक्टर की नियुक्ति की
शिकायत में यह भी आरोप है कि डॉ. भट्टाचार्य, जो पहले कभी किसी अच्छे संस्थान में काम नहीं करती थीं, उन्हें नियमों को ताक पर रखकर कॉन्ट्रैक्ट पर डिप्टी डायरेक्टर (आर्कियोलॉजी म्यूजियम) बना दिया गया। उनकी नियुक्ति हरियाणा के मुख्य सचिव के विज्ञापन और मंजूरी के खिलाफ थी। शुरुआत से ही अयोग्य होने के बावजूद उन्हें लगभग दस साल तक हर साल कॉन्ट्रैक्ट पर रखा गया, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है। ये अनुच्छेद सरकारी नौकरी में समानता और निष्पक्षता की बात करते हैं।
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