चंडीगढ़ में मेयर बने सौरभ जोशी 45 साल के हैं और चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। उनका भाजपा से भी काफी गहरा रिश्ता है। उनके पिता दिवंगत जय राम जोशी 1990 के दशक में भाजपा चंडीगढ़ के प्रधान रहे हैं। उन्हें चंडीगढ़ का गांधी तक कहा जाता था। वहीं, जब वीरवार को सौरव जोशी मेयर बने, तो वह अपने पिता की फोटो लेकर मेयर सीट पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पिता की तस्वीर को नमन करते हुए कहा कि पिता ने कहा था कि- सही रास्ता देर से पहुंचाता है, पर खाली हाथ नहीं लौटाता। उन्होंने कहा कि यह कुर्सी मेरे और जनता के बीच दीवार नहीं बनेगी। आइए सौरभ जोशी के बारे में जानते हैं- कौन हैं सौरव जोशी
सौरभ जोशी वार्ड नंबर-12 से भाजपा के पार्षद हैं। वह 45 साल के हैं। उन्होंने तीन बार पार्षद का चुनाव लड़ा है और दो बार पार्षद बने हैं। वह पिछले 25 साल से राजनीति में सक्रिय हैं। राजनीति में कब और कैसे आए
सौरभ जोशी की राजनीतिक यात्रा काफी प्रेरणादायक है। वर्ष 1989 में, जब वह सिर्फ सात साल के थे, तब वह अपने पिता के साथ चुनाव के दौरान बूथों पर जाया करते थे। उनके पिता भी कट्टर आरएसएस कार्यकर्ता थे। सौरभ जोशी बताते है कि उन्होंने अपने पिता को हर वर्ग के लोगों की सेवा करते देखा है। उन्होंने हमें सिखाया है कि सबसे पहले इंसानियत आती है, राजनीति बाद में। मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हू कि उनकी विरासत को आगे बढा रहा हूं। चुनावी सफर यूनिवर्सिटी से शुरू हुआ
सौरभ जोशी की पढ़ाई चंडीगढ़ के सेक्टर-16 स्थित गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर-10 के डीएवी कॉलेज से हुई। इसके बाद उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से कानून की डिग्री ली। यूनिवर्सिटी के दौरान ही उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े रहे और पीयू कैंपस स्टूडेंट काउंसिल के चुनावों में अध्यक्ष और महासचिव जैसे अहम पदों के लिए चुनाव भी लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। 29 साल की उम्र में पहली पार्षद बने छात्र राजनीति के इसी अनुभव के सहारे उन्होंने नगर निगम तक पहुंचने का रास्ता बनाया। साल 2011 में, 29 साल की उम्र में, वह पहली बार पार्षद बने। यह नगर निगम में उनका दूसरा कार्यकाल है और अब तक वह तीन बार चुनाव लड़ चुके हैं। वर्तमान में वह वार्ड नंबर-12 का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जिसमें सेक्टर-15, 16 और 24 शामिल हैं। बड़े भाई पंजाब भाजपा के नेता
सौरभ जोशी के सबसे बड़े भाई विनीत जोशी पंजाब भाजपा में सक्रिय नेता हैं और भाजपा-अकाली दल गठबंधन सरकार के दौरान मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार रह चुके हैं। बड़े भाई नवनीत जोशी पंजाबी फिल्म उद्योग में इवेंट मैनेजमेंट के लिए प्रसिद्ध थे, जिन्होंने पंजाबी सिनेमा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका 2012 में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था, जिसमें प्रसिद्ध व्यंग्यकार जसपाल भट्टी भी मारे गए थे।
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