महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया संशोधनों के विरोध में आज पंचकूला कांग्रेस सड़कों पर उतरी। जिला प्रधान संजय चौहान के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि ये बदलाव न केवल गरीब मजदूरों के पेट पर लात मार रहे हैं, बल्कि इसके मूल उद्देश्य को खत्म करने की साजिश है। पंचकूला में कांग्रेसी वर्कर लघु सचिवालय में धरने के बाद डीसी सतपाल शर्मा को ज्ञापन भी सौंपने के लिए जाएंगें। धरने पर पूर्व चेयरमैन रविंद्र रावल, पूर्व प्रत्याशी उपिंद्र कौर सहित वरिष्ठ कांग्रेस वर्कर बैठे हुए हैं। बदलाव से श्रमिकों का नुकसान : चौहान कांग्रेस जिला प्रधान संजय चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार की नई नीतियों से लोगों से रोजगार छीना जा रहा है। उन्होंने बताया कि मनरेगा को वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा ग्रामीण आजीविका सुरक्षा के लिए लागू किया गया था। वक्ताओं ने मनरेगा का नाम बदलने और इसके जनहित के उद्देश्य को बिगाड़ने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा किए गए बदलाव गरीब मजदूरों और ग्रामीणों के हितों के खिलाफ हैं। इन बदलावों से ग्राम सभाएं और पंचायतें कमजोर होंगी। साथ ही केंद्र का मजदूरी अंशदान 90 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे राज्यों और मजदूरों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। राज्य की जिम्मेदारी को कमजोर करने का प्रयास पंचकूला के पूर्व चेयरमैन रविंद्र रावल ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने का प्रस्ताव केवल नाम परिवर्तन नहीं है। यह श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय और गरीबों के प्रति राज्य की जिम्मेदारी को कमजोर करने का प्रयास है। कांग्रेस ने इसे वैचारिक दुर्भावना से प्रेरित कदम करार दिया। रावल ने संघीय ढांचे पर प्रहार का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार मजदूरी भुगतान की जिम्मेदारी से पीछे हटकर पूरा बोझ राज्यों पर डालना चाहती है। इससे राज्यों की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और सहकारी संघवाद कमजोर होगा।
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