पंजाब में फिल्लौर के तेईंग गांव में जन्मे कुलविंदर सिंह जोहल इंग्लैंड के लीसेस्टर सिटी में पहले गुरसिख यानी पगड़ीधारी लॉर्ड मेयर बन गए हैं। उन्होंने एक दिन पहले ही शहर के नए लॉर्ड मेयर के रूप में शपथ ली है। उन्हें लीसेस्टर के टाउन हॉल में आयोजित एक समारोह में आधिकारिक तौर पर चेन ऑफ ऑफिस सौंपी गई। काउंसिलर कुलविंदर सिंह जोहल लेबर पार्टी से हैं, जो 2015 से ब्रौनस्टोन पार्क और राउली फील्ड्स वार्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उन्हें काउंसिल की बैठक में शहर के प्रथम नागरिक के रूप में चुना गया। समारोह में नए लॉर्ड मेयर ने घोषणा की कि वह अपने कार्यकाल के दौरान दो धर्मार्थ संस्थाओं का समर्थन करेंगे। मिडलैंड लंगर सेवा सोसाइटी, जो लीसेस्टर में खाद्य असुरक्षा और बेघर होने की समस्या को दूर करने के लिए समर्पित है, और लीसेस्टर हॉस्पिटल्स चैरिटी, जो मधुमेह और गुर्दे की देखभाल के शुरुआती निदान के लिए शहर के अस्पतालों के साथ मिलकर काम करती है। कुलविंदर सिंह जोहल को उनके कार्यकाल के दौरान लेडी मेयरेस यानी उनकी पत्नी मंजीत कौर जोहल का सहयोग प्राप्त होगा। जबकि, उनकी बेटी गुरसिमरन कौर व बेटा अशवीर सिंह उनके कॉन्सोर्ट होंगे। लॉर्ड मेयर कुलविंदर सिंह जोहल ने कहा- अपना अधिकांश जीवन ब्रौनस्टोन पार्क और राउली फील्ड्स क्षेत्र में बिताने के बाद, 2015 में अपने समुदाय के वार्ड काउंसिलर के रूप में चुना जाना मेरे लिए सौभाग्य की बात था। अब उस शहर का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलना, जो मेरे जीवन के अधिकांश समय मेरा घर रहा है, एक सच्चा सम्मान है। मैं लीसेस्टर के प्रत्येक निवासी की खुलेपन, सम्मान और विनम्रता के साथ सेवा करने की प्रतिज्ञा करता हूं। फिल्लौर से लीसेस्टर के मेयर तक का सफर… धार्मिक और गुरुद्वारा सेवा करते हैं कुलविंदर जोहल अपनी सिख पहचान और सिद्धांतों के प्रति बहुत समर्पित हैं। वह गुरु नानक गुरुद्वारा (GNG), होली बॉन्स, लीसेस्टर के महासचिव के रूप में लंबे समय तक कार्यरत रहे। वब मिडलैंड लंगर सेवा सोसाइटी के साथ जुड़े हुए हैं, जो बेघर और भूखे लोगों को भोजन उपलब्ध कराती है। खेलों के माध्यम से युवाओं का सशक्तीकरण उन्होंने खेलों को सामुदायिक एकता का माध्यम बनाया। वह GNG फुटबॉल क्लब के संस्थापकों और प्रबंधकों में से एक रहे हैं। यह क्लब न केवल लीसेस्टर, बल्कि पूरे ब्रिटेन के सबसे बड़े सामुदायिक खेल संगठनों में से एक है। उन्होंने युवाओं को नशाखोरी और अन्य बुराइयों से दूर रखने के लिए उन्हें फुटबॉल और अन्य खेलों से जोड़ने के लिए दशकों तक जमीनी स्तर पर काम किया। श्रमिक अधिकार और ट्रेड यूनियन नेता रहे उन्होंने मजदूरों के लिए भी आवाज उठाई। उन्होंने लीसेस्टर की रसेल कास्टिंग्स नामक ढलाई फैक्ट्री में 25 साल तक एक साधारण कर्मचारी के रूप में काम किया। 2016 में फैक्ट्री बंद होने के दौरान और उससे पहले भी, वह ट्रेड यूनियन नेता रहे और मजदूरों के हक के लिए संघर्ष किया। ॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पंजाबी बहनें जर्मनी में इलेक्शन जीत संसद पहुंचीं:मां ने रेस्टोरेंट में जॉब कर पढ़ाया; पिता ने पुर्तगाल बुलाकर छोड़ दिया था होशियारपुर से जर्मनी गई महिला ने रेस्टोरेंट में काम कर अपनी 2 बेटियों को पढ़ाया और अब जर्मनी की संसद तक पहुंचा दिया है। टांडा के गांव रड़ा में ब्याही मनदीप कौर 2012 में 8 और 5 साल की बेटियों को लेकर पहले पुर्तगाल पहुंची थीं। वहां पति इनसे अलग होकर रहने लगा। पढ़ें पूरी खबर…
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